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MP किसान आंदोलन: 10 दिनों में 16 किसानों ने की आत्महत्या
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 21 Jun 2017 09:59 AM IST
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मध्यप्रदेश किसान आंदोलन - 10 दिनों में 16 किसानों ने की आत्महत्या
- फोटो : the week
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मध्यप्रदेश में पिछले दस दिनों के बीच 16 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। भारी कर्ज की समस्या और फसल की कम कीमत मिलने के चलते किसान अपनी जान दिनों दिन गंवा रहे हैं। इससे पहले किसान आंदोलन के चलते पुलिस फायरिंग में 6 लोग मारे गए थे। मंगलवार को नरसिंहपुर जिले के एक और किसान के आत्महत्या करने की खबर आई है।
नरसिंहपुर जिले के धामधा गांव के किसान लक्ष्मी प्रसाद ने बीते मंगलवार को कर्ज के चलते फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। वहीं, होशंगाबाद से एक और अन्य किसान बाबूलाल वर्मा सोमवार को खुद को आग के हवाले कर लिया था जिसकी भोपाल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बता दें कि अस्पताल ले जाने से पहले बाबूलाल 60 प्रतिशत तक जल चुका था।
मंगलवार को सीहोर जिले के जामनिया खुर्द गांव के 50 वर्षीय किसान बंसीलाल मीना ने भी मंगलवार को खुद को फांसी लगा ली। बता दें कि बंसीलाल जमीदारों के भारी कर्ज के तले दबे हुआ था बंसीलाल के भांजे और गांव के सरपंच जगदीश पटेल ने बताया कि बंसीलाल ने एक स्थानीय बैंक से 2.50 लाख रुपये और स्थानीय सहयोगी सोसाइटी से 56 हजार रुपये का कर्ज लिया था।
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विदिशा के सायरबमोरा गांव से जीवन लाल मीना ने और हरदा जिले के मुरलीधर ने रविवार को जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानो की आत्महत्या कोई नया मामला नहीं है।
ये हैं किसानों की आत्महत्या के आकड़े
खबर है कि पिछले साल एमपी के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने विधानसभा में माना था कि 1 जुलाई, 2016 से 15 नवंबर 2016 के बीच 3,469 लोगों ने आत्महत्या की थी जिनमें से 531 किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर शामिल थे।
वहीं, राज्य में 16 नवंबर 2016 से 27 फरवरी 2017 के बीच 1,761 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं जिनमें 106 किसानों के और 181 बंधुआ मजदूरों के केस हैं।
राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में कुल 10, 293 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए जिसमें से 6,294 पुरुष किसान और 3,999 महिला किसान शमिल थे।
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नरसिंहपुर जिले के धामधा गांव के किसान लक्ष्मी प्रसाद ने बीते मंगलवार को कर्ज के चलते फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। वहीं, होशंगाबाद से एक और अन्य किसान बाबूलाल वर्मा सोमवार को खुद को आग के हवाले कर लिया था जिसकी भोपाल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बता दें कि अस्पताल ले जाने से पहले बाबूलाल 60 प्रतिशत तक जल चुका था।
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मंगलवार को सीहोर जिले के जामनिया खुर्द गांव के 50 वर्षीय किसान बंसीलाल मीना ने भी मंगलवार को खुद को फांसी लगा ली। बता दें कि बंसीलाल जमीदारों के भारी कर्ज के तले दबे हुआ था बंसीलाल के भांजे और गांव के सरपंच जगदीश पटेल ने बताया कि बंसीलाल ने एक स्थानीय बैंक से 2.50 लाख रुपये और स्थानीय सहयोगी सोसाइटी से 56 हजार रुपये का कर्ज लिया था।
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विदिशा के सायरबमोरा गांव से जीवन लाल मीना ने और हरदा जिले के मुरलीधर ने रविवार को जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानो की आत्महत्या कोई नया मामला नहीं है।
ये हैं किसानों की आत्महत्या के आकड़े
खबर है कि पिछले साल एमपी के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने विधानसभा में माना था कि 1 जुलाई, 2016 से 15 नवंबर 2016 के बीच 3,469 लोगों ने आत्महत्या की थी जिनमें से 531 किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर शामिल थे।
वहीं, राज्य में 16 नवंबर 2016 से 27 फरवरी 2017 के बीच 1,761 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं जिनमें 106 किसानों के और 181 बंधुआ मजदूरों के केस हैं।
राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में कुल 10, 293 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए जिसमें से 6,294 पुरुष किसान और 3,999 महिला किसान शमिल थे।