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देश के 79 बाल गृहों की देखभाल करना चाहती है मदर टेरेसा मिशनरीज ऑफ चैरिटी, किया आवेदन
Mon, 08 Jul 2019 02:43 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Nilesh Kumar
Updated Mon, 08 Jul 2019 02:43 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
मदर टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ संचालित सभी बाल देखभाल गृहों ने किशोर न्याय कानून के तहत अपनी संस्थाओं को मान्यता देने के लिए आवेदन किया है। हालांकि, इसमें महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बाल देखभाल गृह शामिल नहीं हैं।
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अधिकारियों ने रविवार को इस बाबत जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2015 में मंत्रालय और चैरिटी के बीच एक वैचारिक गतिरोध उत्पन्न हो गया था। जिन मुद्दों को लेकर गतिरोध उत्पन्न हुआ था, उनमें चैरिटी द्वारा बच्चों को अलग हो चुके या तलाक ले चुके अभिभावकों को गोद देने से इनकार करना शामिल था। इसके बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने बच्चों को सरकार के सेंट्रल एडोपशन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) प्रणाली के तहत गोद देना बंद करने का निर्णय किया।
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हालांकि, गत वर्ष अक्तूबर में तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने उन्हें आग्रह किया कि वे सरकार की गोद लेने की सेवाओं की व्यवस्था में लौट आएं। अधिकारियों ने बताया कि एक बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने मिशन आफ चैरिटी से कहा कि वे या तो बाल देखभाल संस्थाओं की मान्यता लें, या उन्हें बंद कर दें।
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इसके बाद पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र को छोड़कर, देशभर के 79 बाल देखभाल संस्थाओं ने मान्यता के लिए आवेदन दिया। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में करीब 12 संस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि मंजूरी संबद्ध राज्य सरकारों द्वारा दी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि ये मिशन आफ चैरिटी की बाल देखभाल संस्थाओं में छह वर्ष से अधिक आयु के 1000 से अधिक बच्चे हैं और उनमें से अधिकतर को विशेष देखभाल की जरूरत है।