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यूएई की जेलों में सबसे ज्यादा भारतीय बंद, जानिए किन देशों में कितने हिंदुस्तानी नागरिक हैं कैद

Tue, 28 Aug 2018 06:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Aug 2018 06:15 AM IST
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Most indian nationals are imprisoned in uae know where indians are jailed abroad

पाकिस्तान ने हाल ही में प्रधानमंत्री बने इमरान खान के शपथग्रहण से पहले सद्भावना का भाव दिखाते हुए भारत के 26 मछुआरों को रिहा किया था। ये मछुआरे गलती से पाकिस्तान की सीमा में घुस गए थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। पड़ोसी देश पाकिस्तान की जेलों में भारत के जितने कैदी बंद हैं, उसके द्वारा रिहा किए गए 26 कैदी तो महज 6 फीसदी के करीब हैं, जबकि अभी भी पाकिस्तान की जेलों में भारत के 94 फीसदी यानी कुल 471 नागरिक बंद हैं। 

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लेकिन आपको बता दें कि पाकिस्तान इकलौता ऐसा देश नहीं है, जहां की जेलों में भारतीय नागरिक बंद हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की जेलों में सबसे ज्यादा भारतीय बंद हैं। आइए एक नजर डालते हैं उन देशों पर जहां की जेलों में कितने भारतीय बंद हैं और भारत की जेलों में कितने विदेशी नागरिक बंद हैं...
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टॉप-10 देश, जहां की जेल में भारतीय हैं बंद 

कुल 77 देशों में भारतीय नागरिक जेल की सजा काट रहे हैं। इनमें प्रमुख 10 देश कुछ इस प्रकार हैं... 

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) - 1,690 

सऊदी अरब - 1,575 

अमेरिका - 647 

नेपाल - 548 

कुवैत - 484 

पाकिस्तान - 471 

ब्रिटेन - 378 

मलयेशिया - 298 

चीन - 226

इटली - 225 

पिछले एक साल में विदेशी जेलों में बंद भारतीय कैदियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, 2017 तक विदेशी जेलों में कुल 6,048 कैदी बंद थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 7,737 हो गई है। 
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के करीब 83 रक्षाकर्मी इस वक्त पाकिस्तान की हिरासत में हैं। हालांकि पाकिस्तान इस बात को नहीं मानता है। लेकिन फिर भी भारत उन रक्षाकर्मियों की रिहाई और देश वापसी के लिए राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान से बातचीत कर रहा है। 

कैदियों की वापसी को लेकर भारत की 30 देशों के साथ संधि

भारत ने विदेशी जेलों में बंद भारतीय कैदियों की वापसी को लेकर 30 देशों के साथ द्विपक्षीय संधियों पर हस्ताक्षर किया है। इसके अलावा इंटर अमेरिकन कन्वेंशन को भी स्वीकार किया गया है, जिसके तहत कैदियों की अदला-बदली के लिए आवेदन प्राप्त किया जा सकता है और भेजा जा सकता है। 

रिपैटरिएशन ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 2003 के लागू होने के बाद देश वापसी के लिए 170 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 63 कैदियों को विदेशी जेलों से छुड़ाकर भारत लाया जा चुका है। 

मार्च 2015 से मार्च 2018 के बीच विदेशी जेलों से भारतीय कैदियों को छुड़ाने में सरकार के 2.72 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सबसे ज्यादा 1 करोड़ 57 लाख 93 हजार 808 रुपये, बहरीन में 50 लाख 69 हजार 143 रुपये, इरान में 17 लाख 83 हजार 751 रुपये, मिस्र में 10 लाख 31 हजार 698 रुपये और दक्षिण कोरिया में 6 लाख 89 हजार 950 रुपये खर्च हुए हैं।    

भारतीय जेलों में 6 हजार से ज्यादा विदेशी बंद 

अगर भारतीय जेलों में बंद विदेशी कैदियों की बात करें तो यहां की जेलों में कुल 6,148 विदेशी नागरिक किसी न किसी जुर्म में बंद हैं। यह भारत में कुल कैदियों की संख्या का 1.5 फीसदी है। इनमें से 2,353 कैदियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि 3,795 कैदियों का अभी ट्रायल चल रहा है। 

इन राज्यों की जेलों में सबसे ज्यादा विदेशी कैदी बंद 

देश में सबसे ज्यादा विदेशी कैदी पश्चिम बंगाल की जेलों में बंद हैं। यहां की जेलों में कुल 3,415 विदेशी कैदी हैं, जो पूरे देश की जेलों में बंद कुल कैदियों का 56 फीसदी है। इनमें से 2,149 कैदियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि 1,266 कैदियों का अभी ट्रायल चल रहा है।  

इस मामले में दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है। यहां की जेलों में कुल 575 विदेशी कैदी बंद हैं, जिनमें से 490 कैदियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि 85 कैदियों का अभी ट्रायल चल रहा है। 

तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है। यहां की जेलों में कुल 420 विदेशी कैदी बंद हैं, जिनमें से 274 कैदियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि 146 कैदियों का अभी ट्रायल चल रहा है। 

चौथे नंबर पर अंडमान एवं निकोबार है। यहां की जेलों में कुल 369 विदेशी कैदी बंद हैं, जिनमें से 9 कैदियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि 360 कैदियों का अभी ट्रायल चल रहा है। 

इस मामले में दिल्ली का स्थान पांचवें नंबर पर आता है। यहां की जेलों में कुल 342 विदेशी कैदी बंद हैं, जिनमें से 261 कैदियों को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि 81 कैदियों का अभी ट्रायल चल रहा है। 

हालांकि भारतीय जेलों में बंद कुल 39 कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है और डिटेंशन सेंटर्स में रखे गए हैं। ये सभी कैदी पाकिस्तान के हैं, लेकिन पाकिस्तान सरकार द्वारा उनकी नागरिकता की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। दरअसल, विदेशी कैदियों को उनके देश वापस भेजने के लिए वहां की नागरिकता साबित करना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। इसके बिना वो भारत छोड़कर नहीं जा सकते हैं।

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