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भारत में चलती हैं सबसे ज्यादा भीड़ वाली ट्रेनें, दिल्ली-बिहार नंबर 1

Mon, 31 Jul 2017 12:35 PM IST
amarujala.com, Presented by: विपुल प्रकाश
amarujala.com, Presented by: विपुल प्रकाश Updated Mon, 31 Jul 2017 12:35 PM IST
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 Most crowded trains run in India, Delhi-Bihar No. 1
- फोटो : The Indian Express

दस साल पहले, लगभग 280 करोड़ लोगों ने 229 किमी प्रति वर्ष की औसत से लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए रेलवे का इस्तेमाल किया। पिछले साल लगभग 360 करोड़ गैर-उपनगरीय यात्रियों ने 273 किमी प्रति व्यक्ति के औसत से ट्रेवेल करने के लिए रेलवे का इस्तेमाल किया।

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टॉप 10 ट्रेनें जो यात्रियों को पसंद हैं
2008 से 2009 में डोमेस्टिक रूट पर चलने वाली 4 ट्रेनें थीं। मुंबई से यूपी को जोड़ने वाली दो ट्रेनें, दिल्ली से बिहार को लिए एक ट्रेन और मुंबई से छत्तीसगढ़ और झारखंड होते हुए कोलकाता जाने के लिए एक ट्रेन। 2016 से 2017 में इन रूट पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़कर 8 हो गई थी, जिनमें बिहार से दिल्ली जाने के लिए पांच ट्रेनें थीं जिसमे दो रिटर्न ट्रेन भी शामिल है। यूपी के साथ मुंबई को जोड़ने के लिए एक ट्रेन, मुंबई से कोलकाता के लिए एक और झारखंड से केरल से जाने के लिए एक ट्रेन।
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2008 से 2009 में टॉप 10 में दिल्ली-टू-बैंगलुरू और दिल्ली-टू-गोवा दो ट्रेनें शामिल हैं। 2016-17 तक, दोनों ही ट्रेनें टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो गयी। हालांकि दिल्ली से इन शहरों तक एयर कनेक्टिविटी बढ़ गयी है। जिसमें एक सॉफ्टवेयर हब है और दूसरा टूरिस्ट प्लेस है जो आकर्षण का केंद्र है।
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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए के मित्तल इस बात से सहमत हैं कि रेल नेटवर्क व्यापक रूप से आर्थिक और औद्योगिक गतिविधि के साथ पैसेंजर से लिंक है। यही कारण है कि बिहार को पंजाब से जोड़ने वाली गाड़ियां ज्यादा पॉपुलर हैं। मित्तल के मुताबिक, "इसी प्रकार, केरल और अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ पूर्वी भारतीय राज्यों को जोड़ने वाली ट्रेनें इन क्षेत्रों में लोकप्रिय है।

 Most crowded trains run in India, Delhi-Bihar No. 1

2013 में यूनेस्को के एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में आंतरिक प्रवासियों के सामाजिक समावेशन में देश के भीतर "विशिष्ट प्रवासन गलियारे हैं: बिहार से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बिहार से हरियाणा और पंजाब, उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र, ओडिशा गुजरात, ओडिशा से आंध्र प्रदेश और राजस्थान से गुजरात"।

इस मामले में एक सबसे अच्छा उदाहरण है बिहार संपर्क क्रांति का जो बिहार में दरभंगा से लखनऊ, गोरखपुर और पटना के माध्यम से दिल्ली तक जाती है, जो 10 साल में 9 वें स्थान से शीर्ष पर पहुंच गयी है। रिकॉर्ड बताते हैं कि 2008-09 में, 24-कोच ट्रेन में 5.74 लाख यात्रियों ने एक साल में यात्रा की थी। इसकी संख्या एक लाख और बढ़ गई है। जिससे प्रति दिन वेटिंग करने वाले पैसेंजर की संख्या औसत 357 से 564 लाख हो गई है। प्रतीक्षा सूचियों के मामले में यह ट्रेन पहली और दूसरी जगह पर कब्जा जमाये हुए है।

एम पी यूसुफ के रिसर्च के मुताबिक, 2013 में केरल में 75 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से आये और संभवतः यही कारण है कि झारखंड में धनबाद को जोड़ने वाली एक ट्रेन, केरल में अलापुझा से लेकर करीब 2,546 किमी की दूरी पर करीब 100 घंटे के साथ 57 घंटे की दूरी पर एक ट्रेन शामिल है।

रेलवे बोर्ड के प्रमुख मित्तल का कहना है कि "यह सेक्टर एक दशक पहले इतना महत्वपूर्ण नहीं था। हाल ही में इस मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए हावड़ा और एर्नाकुलम के बीच सभी अनारक्षित डिब्बों के साथ एक नयी ट्रेन अंत्योदय एक्सप्रेस शुरू हुआ।" एक दशक पहले, गोवा एक्सप्रेस, दिल्ली से गोवा को जोड़ने वाली एक साधारण सुपरफास्ट ट्रेन, 10 सबसे लोकप्रिय ट्रेनों में से एक थी। जिसमें एक वर्ष में 6.6 लाख यात्रियों ने 141 परसेंट ऑक्यूपेंसी रेट के साथ ट्रेवेल किया। लेकिन 2017 में यह टॉप 10 की सूची में नहीं है। यही हाल बेंगलुरू और दिल्ली के बीच चलने वाली कर्नाटक एक्सप्रेस का भी है।

रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एस एस खुराना कहते हैं कि "कुछ ट्रेनों की पहले से ही भारी मांग थी जो एयरलाइनों द्वारा समान रूप से सेवा प्रदान करते हैं। यह एक प्रमुख बदलाव है।" कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस जैसे अन्य ट्रेनों ने इस धारणा को मजबूत किया है कि बड़े पैमाने पर राज्यों के लोग यहां रहने के लिए आ रहे हैं और रेलवे इनके लिए प्राथमिक साधन है।

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