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सावधान: मधुमेह, वजन घटाने की दवाओं से पेट में लकवे का जोखिम, ओजेम्पिक और वेगोवी का दुष्प्रभाव ज्यादा

Tue, 28 May 2024 06:07 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 28 May 2024 06:07 AM IST
सार

शोधकर्ताओं के मुताबिक, मधुमेह और वजन कम करने में इस्तेमाल की जाने वाली दवा ओजेम्पिक और वेगोवी से पेट में लकवे के जोखिम को बढ़ावा मिल सकता है, जिसे गैस्ट्रोपैरेसिस भी कहा जाता है। इस स्थिति में पेट की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और भोजन की पाचन प्रक्रिया बाधित होने लगती है।

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most common diabetes and weight loose drugs pose risk of stomach paralysis
दवा (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

मधुमेह और वजन घटाने वाली दवाओं की वजह से मरीज को पेट में लकवा भी हो सकता है। यह जानकारी एक चिकित्सा अध्ययन में सामने आई है, जिसमें ओजेम्पिक और वेगोवी जैसी लोकप्रिय मधुमेह और वजन घटाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट पर चर्चा की है।

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन दवाओं से पेट में लकवे के जोखिम को बढ़ावा मिल सकता है, जिसे गैस्ट्रोपैरेसिस भी कहा जाता है। इस स्थिति में पेट की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और भोजन की पाचन प्रक्रिया बाधित होने लगती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, वजन कम करने वाली वेगोवी दवा को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से मंजूरी प्राप्त है, जबकि ओजेम्पिक पहले से अनुमोदित दवा है। इसका इस्तेमाल टाइप 2 मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। हालांकि, ओजेम्पिक को कभी-कभी वजन घटाने के लिए निर्धारित किया जाता है। ये दोनों ही प्रोटीन सेमाग्लूटाइड युक्त इंजेक्शन हैं, जो हार्मोन ग्लूकागन-जैसे पेप्टाइड-1 (जीएलपी-1) के समान हैं। ये दवाएं मतली, उल्टी और दस्त जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) दुष्प्रभाव पैदा करने के लिए जानी जाती हैं। इस अध्ययन में पेट से संबंधित दुष्प्रभाव पक्षाघात (गैस्ट्रोपैरेसिस) के अलावा इलियस और तीव्र अग्नाशयशोथ का भी पता चला है। कैनसस विश्वविद्यालय के इस अध्ययन को पिछले सप्ताह अमेरिका में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किया गया।
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1.85 लाख मरीजों पर अध्ययन में खुलासा
अध्ययन में एक दिसंबर, 2021 से 30 नवंबर, 2022 के बीच 1.85 लाख मरीजों को शामिल किया और उनमें दवाओं के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। इस दौरान करीब आधा फीसदी मरीजों में गैस्ट्रोपैरेसिस देखा गया, जिसके आधार पर शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इन दवाओं के साइड इफेक्ट में से गैस्ट्रोपैरेसिस है, जिसका जोखिम करीब 66 फीसदी तक है। अध्ययन के लेखकों ने यह भी पाया कि जीएलपी-1 एनालॉग-निर्धारित रोगियों में से 0.04 फीसदी ने दवा-प्रेरित अग्नाशयशोथ विकसित किया और अनुमान लगाया कि इस स्थिति का अनुभव करने का जोखिम 350 फीसदी से अधिक बढ़ गया है।
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18 फीसदी मरीज प्रभावित
शोधकर्ताओं के मुताबिक, नौ प्रतिशत रोगियों में मतली और उल्टी की काफी अधिक घटना देखी गई, जबकि उनमें से 7.5 फीसदी में गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) के मामले भी मिले। शोधकर्ताओं का कहना है कि दवाओं की वजह से करीब 18 फीसदी मरीजों में कम से कम एक लक्षण मिला है जो गैस्ट्रोपैरेसिस का संकेत देता है।

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