Morbi Bridge Collapse: क्या है सस्पेंशन ब्रिज, कितना भार सह सकता है और कहां हुई चूक? जानिए सभी सवालों के जवाब
सस्पेंशन ब्रिज क्या होता है? यह कैसे काम करता है? पारंपरिक पुलों से यह किस तरह से अलग है? इस पर कितना बोझ डाल सकते हैं और मोरबी घटना में चूक कहां हुई? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब...
विस्तार
मोरबी पुल हादसे में अब तक हुईं 134 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के तीसरे दिन भी बचाव अभियान जारी है और अभी मृतकों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है।
इस हादसे का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पुल हिलता हुआ दिखाई दे रहा है। इस फुटेज ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह सस्पेंशन ब्रिज क्या होता है? यह कैसे काम करता है? पारंपरिक पुलों से यह किस तरह से अलग है? इस पर कितना बोझ डाल सकते हैं और मोरबी घटना में चूक कहां हुई? आइए जानते हैं...
सस्पेंशन या हैंगिंग ब्रिज क्या है?
आम तौर पर सस्पेंशन या हैंगिंग ब्रिज को पानी के ऊपर बनाया जाता है। दरअसल, पानी में सपोर्ट पिलर को बनाना आसान नहीं होता, ये पिलर पानी में ट्रैफिक को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में पारंपरिक पुलों की तुलना में सस्पेंशन या हैंगिंग ब्रिज पूरी तरह से अलग होता है। यह ओवरहेड केबल से बना होता है, जो रोडवे को सपोर्ट करते हैं। इसे स्पैन कहा जाता है। स्पैन जितना लंबा होगा, पुल उतना ही लटकेगा।
पारंपरिक पुलों की तुलना में क्या सस्पेंशन ब्रिज सुरक्षित नहीं हैं?
ऐसा नहीं है। पारंपरिक पुल जितने मजबूत होते हैं, उतने ही सस्पेंशन ब्रिज भी। इन पुलों में सबकुछ ओवरहेड केबल पर निर्भर करता है। पारंपरिक पुल बनाने में जितना समय और लागत लगती है, उससे बहुत कम में सस्पेंशन ब्रिज तैयार हो जाते हैं। इसलिए ये ब्रिज एक बेहतर विकल्प हैं।
अगर ये पुल सुरक्षित हैं, तो मोरबी हादसा कैसे हुआ?
इसके लिए हमें हर चीज की भार क्षमता को समझना होगा। पुल हो या कुछ और, उसकी अपनी क्षमता होती है। जहां तक मोरबी हादसे की बात है तो उसके तीन से चार कारण हो सकते हैं। हादसे का सबसे महत्वूपूर्ण बिंदु भार है, जब बहुत से लोग एक जगह पर इकट्ठा होते हैं तो यह स्पैन पर दबाव डालते हैं। दूसरा कारण दोलन या कंपन है। आसान शब्दों में कहें तो जब कोई पुल को हिलाता या उस पर कूदता है तब केबलों पर दबाव बढ़ता जाता है, जिससे वे टूट सकते हैं। हादसे का तीसरा कारण हो सकता है कि भले ही पुल मजबूत स्टील के केबलों से बना हो, लेकिन उसकी एक क्षमता होती है। मोरबी पुल हादसे में पुल पर क्षमता से अधिक भार था।
तो सस्पेंशन ब्रिज की भार क्षमता का निर्धारण कैसे होता है?
यह पूरी तरह से स्पैन की लंबाई पर निर्भर करता है, जिनका इस्तेमाल रोडवे के लिए किया जाता है। सस्पेंशन केबल की लोड क्षमता को एक हद तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसकी पूरी तरह से मरम्मत किए जाने के बाद। आसान शब्दों में कहें तो क्षमता बढ़ाने के लिए पुल के डिजाइन में बदलाव करने की आवश्यकता होती है।