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मोरबी पुल हादसाः एसआईटी द्वारा जब्त दस्तावेज मोरबी नगरपालिका ने मांगे वापस, सरकार से की अपील

Tue, 24 Jan 2023 02:00 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरबी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरबी Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 24 Jan 2023 02:00 PM IST
सार

सरकार द्वारा भेजे गए कारण बताओ नोटिस में शहरी विकास विभाग ने कहा है कि पुल के संचालन का कॉन्टैक्ट 2017 में ही खत्म हो गया था।

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morbi bridge collapse case municipality seeks seized document from sit government show cause notice
मोरबी पुल हादसा - फोटो : Social Media

विस्तार

मोरबी नगर पालिका ने सरकार से अपील की है कि एसआईटी द्वारा जब्त दस्तावेज उन्हें वापस कर दिए जाएं। नगर पालिका ने कहा है कि सरकार के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें दस्तावेजों की जरूरत है, जो एसआईटी ने जब्त किए हुए हैं। बता दें कि गुजरात सरकार ने मोरबी नगर पालिका को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि हादसे के चलते मोरबी नगरपालिका को अपना कर्तव्य पूरा नहीं करने के चलते भंग क्यों नहीं कर देना चाहिए? नगर पालिका के एक अधिकारी ने बताया कि सभी दस्तावेज सरकार द्वारा नियुक्त एसआई के पास हैं और मोरबी नगर पालिका के पास एक भी दस्तावेज नहीं है। 

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गुजरात सरकार ने बीते हफ्ते ही मोरबी नगर पालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 25 जनवरी तक लिखित जवाब मांगा है। उल्लेखनीय है कि बीती 30 अक्टूबर 2022 को मोरबी की मच्छू नदी पर बना सस्पेंशन पुल टूट गया था, जिसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी। यह पुल ब्रिटिश काल में  बना था और नगर पालिका के साथ हुए समझौते के तहत ओरेवा ग्रुप इसकी मेंटिनेंस और संचालन कर रहा था। मोरबी नगर पालिका के 52 सदस्यों ने सोमवार को बैठक की और इस बैठक में प्रस्ताव पास कर सरकार से मांग की है कि उन्हें एसआईटी द्वारा जब्त दस्तावेज वापस किए जाएं ताकि वह सरकार के कारण बताओ नोटिस का जवाब दे सकें। 
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सरकार द्वारा भेजे गए कारण बताओ नोटिस में शहरी विकास विभाग ने कहा है कि पुल के संचालन का कॉन्टैक्ट 2017 में ही खत्म हो गया था। इसके बाद 2018-2020 के बीच ओरेवा ग्रुप ने मोरबी नगर पालिका को पुल की खराब हालत के बारे में कई पत्र लिखे और शंका भी जाहिर की थी कि पुल पर बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद नगर पालिका ने कोई कदम नहीं उठाया। 
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गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने मोरबी पुल हादसे मामले में गुजरात हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की है। पीआईएल में सरकार ने मोरबी नगर पालिका को भंग करने की बात कही है। इस मामले में पुलिस ने ओरेवा ग्रुप के 4 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो कंपनी के मैनेजर हैं और दो टिकट क्लर्क हैं। गुजरात की अदालत ने बीते हफ्ते ही ओरेवा ग्रुप के एमडी जयसुख पटेल के खिलाफ भी वारंट जारी किया है। जयसुख पटेल का नाम एफआईआर में भी बतौर आरोपी दर्ज है। जयसुख पटेल ने बीती 20 जनवरी को मोरबी की सेशन कोर्ट में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। 

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