{"_id":"6543083df36d80757d0cea15","slug":"monsoon-pattern-changing-due-to-climate-change-changes-in-clouds-and-their-movement-detected-before-monsoon-2023-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Study: जलवायु परिवर्तन के चलते बदल रहा मानसून का पैटर्न, शोध में बादलों और इनकी गति परिवर्तन का पता चला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Study: जलवायु परिवर्तन के चलते बदल रहा मानसून का पैटर्न, शोध में बादलों और इनकी गति परिवर्तन का पता चला
Thu, 02 Nov 2023 07:53 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 02 Nov 2023 07:53 AM IST
सार
शोधकर्ताओं ने 2016 से 2020 तक मार्च से मई के महीने के दौरान महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बादलों की गति और हवा के पैटर्न में बदलाव देखा। वहीं इस इलाके में मानसून से पहले बादलों और इनके प्रसार की दिशा में बदलाव का पता चला है, जो मानसूनी वर्षा पैटर्न में बड़े बदलाव का इशारा है।
विज्ञापन
मानसून (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जलवायु परिवर्तन के कारण ही मानसून के पैटर्न में बदलाव आया और परिसंचरण कमजोर हुआ है। यही वजह है कि भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम लू, चक्रवात और भारी वर्षा सहित चरम मौसम की घटनाओं से ग्रस्त रहा है।
विज्ञापन
शोधकर्ताओं ने 2016 से 2020 तक मार्च से मई के महीने के दौरान महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बादलों की गति और हवा के पैटर्न में बदलाव देखा। वहीं इस इलाके में मानसून से पहले बादलों और इनके प्रसार की दिशा में बदलाव का पता चला है, जो मानसूनी वर्षा पैटर्न में बड़े बदलाव का इशारा है।
विज्ञापन
मानसून में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब एक लंबे शुष्क मौसम के बाद अचानक भारी बारिश का दौर आता है। तापमान में एक डिग्री की वृद्धि से बारिश की मात्रा सात प्रतिशत तक बढ़ती है, लेकिन अब मानसून के दिनों में यह क्षेत्र विशेष के आसपास 10 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
विज्ञापन
बारिश को लेकर सबसे अधिक बदलाव दिखे
वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से मानसून का मिजाज बदला है। खास तौर पर बारिश के वितरण को लेकर व्यापक बदलाव दिख रहे हैं। पिछले कुछ सालों से मानसून के हाल को देखते हुए सामान्य मानसून की परिभाषा बदलने की जरूरत महसूस हो रही है। देश की 40 प्रतिशत से ज्यादा बुआई मानसून की बारिश पर निर्भर है। बारिश की अवधि में होने वाले बदलावों के हिसाब से फसली सत्र को आगे-पीछे खिसकाया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून में बदलाव समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले बदलावों की वजह से होता है।
लगातार खतरनाक होता जा रहा है उत्तर हिमालय का क्षेत्र
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ने मानसून को अधिक अनियमित और अस्थिर बना दिया है, जिससे भारत के उत्तर हिमालय में लगातार भूस्खलन और बाढ़ आ रही है। एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर वाईपी सुंदरियाल के अनुसार हिमालय जलवायु परिवर्तन के लिए हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है। पिछले साल यह उत्तराखंड था, इस साल हिमाचल था, जिसने ग्लोबल वार्मिंग का खामियाजा भुगता।
हिमालय एक अवरोधक के रूप में कार्य करता है, जो अरब सागर के साथ बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं का सामना करता है। बढ़ते तापमान के साथ सतह और समुद्र स्तर दोनों पर, नमी की मात्रा में काफी वृद्धि हुई है। यही कारण इसे मूसलाधार बारिश के लिए संभावित क्षेत्र बनाता है। इसने हिमाचल और उत्तराखंड को खतरे के क्षेत्र में डाल दिया है।