Money Laundering: ईडी ने NCP नेता नवाब मलिक समेत चार लोगों के खिलाफ तय किए आरोप; 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
नवाब मलिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मांगी है और उनकी याचिका आदेश के लिए सुरक्षित रख ली गई है। 64 वर्षीय एनसीपी नेता को पिछले साल फरवरी में गिरफ्तार किया गया था।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की गतिविधियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक के खिलाफ सोमवार को यहां एक अदालत में तय आरोप पेश किया। विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने विशेष न्यायाधीश आरएन रोकाडे के समक्ष आरोपों का मसौदा दायर किया।
मलिक के अलावा तीन अन्य के खिलाफ आरोप तय
जेल में बंद मलिक के अलावा मामले में तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ तय आरोप दायर किए गए और मामले को 24 जुलाई को सुनवाई तक स्थगित कर दिया गया। ड्राफ्ट आरोप (Draft charges) आपराधिक मामले में मुकदमा शुरू करने की दिशा में एक कदम है। संबंधित अदालत को दोनों पक्षों को सुनना होगा और यह तय करना होगा कि प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर आरोपी पर जांच एजेंसी द्वारा लगाई गई कौन सी धाराएं लगाई जा सकती हैं। इसके बाद अदालत अभियुक्त को उन आरोपों को पढ़कर सुनाएगी, जिन पर मुकदमे के दौरान उसका सामना होगा और जब वह दोषी न होने की दलील देगा, तो मुकदमा शुरू हो सकता है।
मलिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट से मांगी है जमानत
मलिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मांगी है और उनकी याचिका आदेश के लिए सुरक्षित रख ली गई है। 64 वर्षीय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता को पिछले साल फरवरी में गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं और मुंबई के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। विशेष अदालत ने पहले मलिक को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि वह अपने परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी के माध्यम से दोषपूर्ण संपत्ति पर लगातार कब्जा कर रहे हैं।
मलिक पर ईडी ने लगाए ये आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि दाऊद की बहन दिवंगत हसीना पारकर गिरोह के प्रमुख सदस्यों में से एक थी और आतंकी फंड जुटाने के लिए प्रमुख संपत्तियों के अनधिकृत अधिग्रहण में शामिल थी। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, जांच से पता चला है कि नवाब मलिक ने पारकर और कथित दाऊद गिरोह के सदस्यों सलीम पटेल और सरदार खान के साथ मिलकर काम किया था और मुनीरा प्लंबर नाम की एक प्रमुख संपत्ति- उपनगरीय कुर्ला में गोवावाला कंपाउंड को हड़पने के लिए आपराधिक साजिश रची थी।
मनी लॉन्ड्रिंग रोधी एजेंसी ने दावा किया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत प्लंबर को गुमराह करके संपत्ति की पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) निष्पादित की गई और एक फर्जी पूरक पीओए बनाया गया। मलिक के खिलाफ ईडी का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत एक नामित वैश्विक आतंकवादी और 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोटों का मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी दाऊद के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है।