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SP-BSP के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए भाजपा का मास्टर स्ट्रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 03 May 2016 09:47 AM IST
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अपने संसदीय क्षेत्र में ई-रिक्शा और ई-बोट बांटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल की सियासत में हलचल मचा दी है। मोदी की चाल से उनके विरोधियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगी हैं।
चुनावी साल में निषादों और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सौगातों का मरहम लगाकर मोदी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। साफ कर दिया है कि उनकी नजर सपा और बसपा के परंपरागत वोट बैंक पर है। काशी में मोदी की ई-ड्राइव (ई-रिक्शा व ई-बोट) को भाजपा पीएम का मास्टर स्ट्रोक बता रही है।
भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि अगले साल सूबे में होने वाले विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण एक बड़ा कारक होगा। खासकर पूर्वांचल में पिछड़ों की अच्छी खासी तादाद है। यदि इन्हें पार्टी साधने में कामयाब हो जाती है तो सीटों की संख्या में इजाफा हो सकता है।
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चुनावी साल में निषादों और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सौगातों का मरहम लगाकर मोदी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। साफ कर दिया है कि उनकी नजर सपा और बसपा के परंपरागत वोट बैंक पर है। काशी में मोदी की ई-ड्राइव (ई-रिक्शा व ई-बोट) को भाजपा पीएम का मास्टर स्ट्रोक बता रही है।
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भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि अगले साल सूबे में होने वाले विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण एक बड़ा कारक होगा। खासकर पूर्वांचल में पिछड़ों की अच्छी खासी तादाद है। यदि इन्हें पार्टी साधने में कामयाब हो जाती है तो सीटों की संख्या में इजाफा हो सकता है।
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सरकार को गांव और गरीब का हितैषी दिखाने की कोशिश
बहरहाल, अब तक विरोधी मोदी की सरकार को सूट-बूट की सरकार बताने से नहीं थक रहे थे मगर आम बजट में किसानों को विशेष तवज्जो देकर मोदी ने विरोधियों की बोलती पहले ही बंद कर दी थी। अब निषादों को आर्थिक तरक्की का नया मंत्र देकर मोदी एक बार फिर अपने विरोधियों पर बीस पड़े हैं।
बलिया में फ्री गैस कनेक्शन और काशी में ई-नाव और ई-रिक्शा बांटकर मोदी ने जता दिया है कि उनकी सरकार को सूट-बूट वाली सरकार बताना गलत है। सही मायने में उनकी ही सरकार गांव और गरीबों की हितैषी है और उनके विकास के बारे में संजीदगी से सोचती है।
पूर्वांचल की राजनीति में अच्छी दखल रखने वाली सपा और बसपा कमजोर वर्ग को अपना वोट बैंक मानती है मगर पीएम मोदी ने जिस ढंग से रिक्शावानों, नाविकों को पुचकारा उससे विरोधी दलों में खलबली स्वाभाविक है। इससे दो फायदा हुआ।
एक तो सूट-बूट की सरकार की इमेज को तोड़ने में काफी हद कामयाब होते दिखे वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में जब वह मैदान में होंगे तो उनके रिपोर्ट कार्ड में इस बात का जिक्र होगा कि उनकी सरकार ने गरीबों के उत्थान के लिए काफी कुछ किया है।