जल्द ही दुनिया देखेगी कश्मीर की जन्नत, मोदी सरकार बना रही है ये खास योजना
- ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2020 जम्मू-कश्मीर के विकास का खाका खींचेगी
- अप्रैल में दोबारा से कश्मीर जाएंगे केंद्रीय मंत्री
- उद्योग व निवेश से सीधे तौर पर स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ेंगे
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इस नीति के तहत कई प्रोजेक्ट ऐसे होंगे, जिनमें कश्मीरी कामगार नहीं, बल्कि हिस्सेदार के तौर पर शामिल रहेंगे। बैंक से फटाफट लोन मिलेगा, कश्मीरी युवाओं को स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग दी जाएगी। कुछ लोगों ने कश्मीरियों के मन में यह भ्रांति फैला दी कि बाहर से लोग यहां आकर जबरन बस जाएंगे और वे उनकी जमीन पर कब्जा कर लेंगे।
केंद्र सरकार में गृह राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी और नित्यानंद राय का कहना है कि ये गलत है। ऐसी कोई बात नहीं है। अप्रैल में केंद्र सरकार के अनेक मंत्री कश्मीर के सभी दस जिलों का दौरा करेंगे। साथ ही वहां पर आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2020, जम्मू-कश्मीर के विकास का खाका खींच देगी।
गुरुवार को गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी और नित्यानंद राय ने एक खास बातचीत में यह खुलासा किया है। इन दोनों मंत्रियों का कहना था कि केंद्र सरकार, कश्मीर के लोगों की राय लेकर उनके हितों के लिए नीति बना रही है। नई औद्योगिक नीति का ऐलान बहुत जल्द कर दिया जाएगा।
इस बाबत तेजी से कार्य चल रहा है। ये नीति ऐसी होगी, जिसकी मदद से जम्मू-कश्मीर के लोगों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसानी से लोन मुहैया कराया जाएगा। केवल लोन ही नहीं, बल्कि संबंधित काम-धंधे की ट्रेनिंग भी सरकार देगी। युवाओं के लिए कोई एक दो प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि दर्जनों योजनाएं बनाई जा रही हैं।
मोबाइल फोन तकनीक, फुटवीयर और खाद्य पदार्थ, ऐसे कई धंधे हैं, जिन्हें लेकर वहां के लोगों को ट्रेंड बनाया जाएगा। मंडी का स्तर ऐसा रहेगा कि स्थानीय लोग बिना किसी बिचौलिये के सीधे अपना माल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को बेच सकें। गृह राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी ने कहा, सुरक्षा बलों में स्थानीय युवाओं को भर्ती करने के लिए सेवा नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं।
पिछले दिनों केंद्र सरकार के 36 मंत्री जम्मू पहुंचे थे। कश्मीर में भी दो जगह पर गए थे। चूंकि यहां बर्फबारी थी, इसलिए सभी मंत्री कश्मीर नहीं पहुंच सके। अप्रैल में दोबारा से केंद्रीय मंत्री कश्मीर जाएंगे। हर जिले में अलग-अलग मंत्री पहुंचेंगे। उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं से अवगत कराने के अलावा उनसे पूछा जाएगा कि वे किस तरह का विकास देखना चाहते हैं। खेल के क्षेत्र में वहां संभावनाएं तलाशेंगे।
केंद्र सरकार चाहती है कि अधिकांश गांवों में, जहां पर जगह उपलब्ध है, वहां कोई न कोई स्टेडियम 'इंडोर या आउटडोर' बना दिया जाए। केंद्रीय मंत्री, सिविल सोसायटी और स्थानीय लोगों से मिलकर विश्वास बहाली की डोर को मजबूती प्रदान करेंगे।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी
जी. किशन रेड्डी के अनुसार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को कामयाब बनाने के लिए हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। यह समिट ऐसी होगी, जिसे दुनिया देखेगी। इसके बाद कश्मीर में उद्योग धंधों का दौर शुरू होगा। उद्योग व निवेश से सीधे तौर पर स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा।
सरकार का प्रयास है कि कश्मीर में निर्यात को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाए। जिस तरह दूसरे पहाड़ी राज्यों के लिए औद्योगिक नीति बनती है, उससे दो कदम आगे बढ़कर सरकार कश्मीर के लिए नई औद्योगिक नीति की घोषणा करेगी। यहां लगने वाले उद्योगों को केंद्र सरकार से जो छूट मिलेगी, उसे सीधे रोजगार सृजन से जोड़ा जाएगा।
कुछ इस तरह की योजना शुरू हो सकती है कि जो भी निवेशक यहां जितना अधिक निवेश करेगा और उसमें स्थानीय युवाओं को रोजगार देगा तो उसे उतनी ही ज्यादा छूट मिलेगी। सभी मंत्रालयों को कश्मीर के लिए अपने विभाग के मुताबिक नीति बनाने के लिए कहा गया है।
उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2020 को सफल बनाने के लिए बड़े कॉर्पोरेट घरानों से संपर्क किया जा रहा है। बतौर रेड्डी, पचास से ज्यादा अधिकारियों को सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए व्यापारिक घरानों के साथ बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार ने इस दिशा में बेंगलुरु और कोलकाता में रोड शो आयोजित किए हैं। इनमें काफी सफलता मिल रही है। जम्मू और कश्मीर व्यापार संवर्धन संगठन ने सरकार को जानकारी दी है कि अकेले कोलकाता के रोड शो में 140 से अधिक उद्योगपतियों ने कश्मीर में निवेश करने के लिए अपनी सहमति दी है।
जम्मू-कश्मीर में तेज आर्थिक विकास की जमीन तैयार करने और उद्योगों को आकर्षित करने के लिए लैंड बैंक बनाया जा रहा है। इसका मकसद है कि निवेशकों को उचित दर पर जमीन उपलब्ध करवाई जा सके।
प्रदेश में करीब बीस हजार कनाल भूमि को इसके लिए चिह्नित किया गया है। सभी जिला उपायुक्त इस योजना पर काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार का प्रयास है कि निवेशक सम्मेलन के जरिए कम से कम एक लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटा लिया जाए।