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कृषि कानूनों पर मोदी सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के भरोसे
Fri, 26 Feb 2021 02:00 AM IST
Jeet Kumar
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 26 Feb 2021 02:00 AM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
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कृषि कानूनों पर जारी विवाद पर मोदी सरकार ने अब पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के रुख का इंतजार करने का फैसला किया है। विवाद के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति को 11 मार्च तक रिपोर्ट पेश करनी है।
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हालांकि तेज गति से कार्य के बावजूद समिति द्वारा अगले दो हफ्ते में रिपोर्ट तैयार करने की संभावना कम है। ऐसे में समिति शीर्ष अदालत से अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है।
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सरकार ने कृषि कानून विवाद पर अपनी ओर से नई पहल करने के बदले सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप चलने का निर्णय लिया है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के निपटारे के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। ऐसे में सरकार समिति की रिपोर्ट और इस पर शीर्ष अदालत के रुख का इंतजार कर रही है।
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समिति ने अब तक कृषि क्षेत्र से जुड़े 500 से अधिक संगठनों, गैरसरकारी संगठनों, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों, व्यापारियों के संगठनों और विशेषज्ञों से बातचीत की है। अब तक किसी ने इन कानूनों को वापस लेने की राय नहीं दी है। हालांकि कानून के कई प्रावधानों में सुधार के कई सुझाव आए हैं। ऐसे में सरकार को लगता है कि शीर्ष अदालत भी कानून वापसी की दलील को स्वीकार नहीं करेगी।
समिति तेजी से काम कर रही है। हालांकि रिपोर्ट पेश करने की मियाद पूरी होने से करीब दो हफ्ते पहले तक समिति आधा काम ही कर पाई है। समिति ने इंटरनेट के माध्यम से भी सुझाव मांगे हैं। राय लेने का सिलसिला अभी जारी है।
इसके बाद विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। माना जा है कि समिति रिपोर्ट देने के लिए शीर्ष अदालत से अतिरिक्त समय मांगेगी। ऐसे में यह मामला पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव तक टल सकता है।