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10वीं की परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकार ने नई शिक्षा नीति पर जनता से मांगी राय

Thu, 30 Jun 2016 12:36 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 30 Jun 2016 12:36 PM IST
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Modi government sought public opinion on the new education policy.
- फोटो : PTI

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट के तहत सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिशों पर जनता की राय मांगी है। मंत्रालय ने बुधवार देर शाम अपनी वेबसाइट और मोदी ऐप के माध्यम से सिफारिशों में से महत्वपूर्ण मुद्दों को सार्वजनिक करते हुए राय मांगनी शुरू की है।

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मंत्रालय ने सबसे पहले इस रिपोर्ट ड्रॉफ्ट में भारतीय शिक्षा के इतिहास से जनता को रूबरू करवाया है। इसी के साथ शिक्षा के क्षेत्र में दिक्कतों और बदलावों के साथ गुणवता पर भी जनता का ध्यान आकर्षित किया है।
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रिपोर्ट के शुरुआत में सबसे पहले शिक्षा के अधिकार में तीन से पांच आयु वर्ग के बच्चों को रखा है, जिसमें पूछा है कि वे कैसी शिक्षा चाहते हैं। इसमें सर्वे रिपोर्ट के साथ मौजूदा और वर्ष 2021 में शिक्षा का प्रारूप कैसा होना चाहिए को भी जगह दी गयी है।

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नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार, जनता से मांगी राय

Modi government sought public opinion on the new education policy.
मंत्रालय की ओर से पेश किए गए मसौदे में इस बात का जिक्र है कि छात्रों को फेल न करने की नीति के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा, क्योंकि इससे छात्रों का शैक्षणिक प्रदर्शन काफी प्रभावित हुआ है।

मसौदे में कहा गया है कि फेल न करने की नीति 5वीं कक्षा तक सीमित रहेगी और उच्च प्राथमिक स्तर पर बच्चों को फेल करने की व्यवस्था फिर से शुरू की जाएगी। 10वीं की परीक्षा में भी कई बदलाव के प्रावधान किए गए हैं। छात्रों के फेल होने की दर में कमी लाने के लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेजी में 10वीं कक्षा की परीक्षा दो चरणों में लेने का सुझाव दिया गया है।

इसमें पहला हिस्सा उच्च स्तर (पार्टी ए) का और दूसरा हिस्सा निम्न स्तर (पार्ट बी) का होगा। दस्तावेज में प्रावधान है कि 10वीं कक्षा के बाद जिन पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए विज्ञान, गणित या अंग्रेजी जैसे विषयों की जरूरत नहीं होगी, उनमें शामिल होने के इच्छुक छात्र पार्ट-बी स्तर की परीक्षा का विकल्प चुन सकेंगे।

सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिशों को किया ओपन

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नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में कहा गया है कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों के स्तर पर संस्कृत पढ़ाने की सुविधा ज्यादा आसानी से मुहैया कराई जाएंगी।

मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा पालिसी बनाने की जरूरत के बारे में भी विस्तार से जनता को समझाने की कोशिश की है, ताकि बदलाव के बाद उनके बच्चों को कैसी शिक्षा मिलेगी, उसके बारे में वे अपनी राय जाहिर कर सकें।

इस राय में जनता को नर्सरी दाखिले, दसवीं, 12वीं कक्षा की परीक्षा प्रारूप, पाठ्यक्रम, तकनीकी शिक्षा पर राय मांगी है। इसके अलावा परिजन या आम जनात शिक्षा में भारतीय संस्कृति को शामिल किया जाए या नहीं पर भी राय दे सकते हैं।
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