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तैयारी: देश में 81 साल बाद दवा, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सीय उपकरणों के लिए बनेगा नया कानून

Thu, 09 Sep 2021 02:51 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 09 Sep 2021 02:51 AM IST
सार

  • मोदी सरकार ने नए कानून के लिए आठ सदस्यीय समिति का किया गठन
  • नए सिरे से चिकित्सीय उपकरणों को किया जाएगा शामिल, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा भी देगी सरकार

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modi government forms panel for framing new laws for medicines and related devices
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

देश में 81 साल बाद दवा, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सीय उपकरणों को लेकर नया कानून बनने जा रहा है। अभी तक साल 1940 में बने औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत इनका उत्पादन, आयात-निर्यात और बिक्री की जा रही थी। हालांकि समय-समय पर इस कानून में सरकारों ने संशोधन भी किए हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नया कानून बनाने का निर्णय लिया है।

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इसके लिए आठ सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल वीजी सोमानी की अध्यक्षता में यह समिति आगामी 30 नवंबर तक ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार करेगी। इस समिति में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के भी वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
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मंत्रालय के अनुसार कोरोना महामारी (खासतौर पर दूसरी लहर) के दौरान दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई थीं। चिकित्सीय उपकरणों को लेकर लगातार ऐसे मामले भी देखने को मिल रहे हैं जिसके चलते कुछ ही समय पहले मंत्रालय ने कुछ उपकरणों को मूल्य नियंत्रण के दायरे में भी लाया था, लेकिन अब सरकार नए सिरे से कानून बनाना चाहती है।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चिकित्सीय क्षेत्र में सरकार आत्मनिर्भरता पर काफी जोर दे रही है। अभी तक इसके लिए कोरिया, जापान, चीन सहित कई देशों पर निर्भरता है। इसके चलते बाजार में भी उपकरण काफी महंगे और खराब गुणवत्ता वाले हैं। नए कानून में इन सभी बिंदुओं पर भी ध्यान रखा जाएगा।


साथ ही ड्राफ्ट तैयार होने के बाद इसे सुझाव/आपत्ति के लिए सार्वजनिक भी किया जाएगा। ताकि निजी स्वास्थ्य क्षेत्र से प्रतिक्रियाएं भी मिल सकें। उन्होंने बताया कि अगले साल तक यह कानून तैयार होने के बाद संसद में पेश किया जा सकता है।

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