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Modi Cabinet: हल्के मंत्रीपद के बाद भी एनडीए में खटपट क्यों नहीं, सहयोगी दलों से क्या तय हुआ फॉर्मूला?
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Modi 3.0
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
लोकसभा चुनाव में भाजपा को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की थी कि मोदी एनडीए गठबंधन की सरकार कैसे चला पाएंगे? इंडिया गठबंधन के नेता भी मान रहे थे कि नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं को साथ में लेकर चलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आसान नहीं रहेगा। इन नेताओं का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी कुछ इसी तरह का संकेत दे रहा था। माना जा रहा था कि समर्थन के बदले ये सहयोगी दल मोदी पर जबरदस्त दबाव बनाएंगे और बड़े-बड़े अहम विभाग अपने हिस्से में करने में कामयाब रहेंगे। इंडिया गठबंधन तो इस संभावित टकराव में ही अपने लिए 'सत्ता की संभावनाएं' भी तलाशने लगा था।
लेकिन राजनीतिक पंडितों की ये कयासबाजी पूरी तरह फुस्स साबित हुई है। नरेंद्र मोदी ने विभागों के बंटवारे में सीसीएस की सबसे महत्त्वपूर्ण चार मंत्रालयों (गृह, रक्षा, वित्त और विदेश मंत्रालय) के साथ-साथ कृषि, सड़क परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास और शिक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग भी अपने ही पास रखे हैं। एनडीए के सहयोगी दलों को अपेक्षाकृत काफी कमजोर विभाग सौंपे गए हैं। लेकिन इसके बाद भी एनडीए में कहीं से कोई आपसी गतिरोध दिखाई नहीं दिया।
रोचक बात है कि टीडीपी की कथित बड़ी दावेदारी के बाद भी चंद्रबाबू नायडू नाराज नहीं हुए, उलटे मोदी के साथ उनके रिश्ते ज्यादा मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। मोदी नायडू के शपथ ग्रहण में जाकर इस रिश्ते को और मजबूत बनाने का संकेत भी दे रहे हैं। शिवसेना-एनसीपी गुट ने हल्का-फुल्का विरोध अवश्य जताया है, लेकिन उनके स्वर में भी 'बाद में बेहतर समायोजन' होने की संभावना ही जताई गई हैं।
अब प्रश्न यही किया जा रहा है कि मोदी ने यह 'करिश्मा' कैसे किया? जो राजनीतिक दल अपनी मांगों से लगातार केंद्र की सरकारों को परेशान करते रहे थे, वे इतने कमजोर मंत्रालय मिलने के बाद भी शांत क्यों हैं? क्या भाजपा ने उन्हें इस चुप्पी के बदले उनके राज्यों में कोई इनाम देने का वादा किया है?
झुनझुना थमाया, अब पार्टी तोड़ेगी भाजपा- आप
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि मंत्रालयों के बंटवारे में भाजपा ने सहयोगी दलों को 'झुनझुना' पकड़ा दिया है। भाजपा ने सभी महत्त्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं, लेकिन एनडीए के बाकी सहयोगी दलों को बेहद हल्के मंत्रालय दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यदि भाजपा लोकसभा का स्पीकर भी अपना बना लेगी, तो वह एनडीए और विपक्ष के दूसरे दलों को तोड़ने का काम करेगी।
संजय सिंह ने एनडीए के सहयोगी दलों को खुला ऑफर भी दे दिया कि तेलगुदेशम पार्टी को लोकसभा में अपना स्पीकर बनवाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि भाजपा उन्हें ऐसा अवसर नहीं देती है, तो उन्हें इंडिया गठबंधन में शामिल होकर उसकी सरकार बनवाने में सहयोग करना चाहिए।
लेकिन असली खेल आंकड़ों में है
लंबे समय तक संगठन का कामकाज देखते रहे मोदी ने सहयोगी दलों के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफलता पाई है। यह दिखाई दे रहा है। लेकिन इसका बड़ा कारण आंकड़ों में भी छिपा हुआ है। 240 सीटों को अकेले दम पर हासिल करने के कारण अन्य दल भाजपा को ब्लैकमेल करने की स्थिति में नहीं रह गए हैं। टीडीपी 16 और जदयू केवल 12 सीटों पर ही जीत पाए हैं। यदि ये दल भाजपा से किनारा करें भी तो एनडीए के अन्य सहयोगी दलों और स्वतंत्र सांसदों के बल पर सरकार बहुमत साबित कर सकती है।
दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण बात है कि इन दलों ने मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़कर सफलता पाई है। जदयू की 12 सीटों की जीत में जितनी भूमिका नीतीश कुमार की है, उससे कहीं ज्यादा मजबूत भूमिका मोदी की है। यह इस बात से भी सिद्ध होता है कि उसी बिहार में ज्यादा मजबूत जातीय समीकरण रखने के बाद भी लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद केवल चार सीटों पर जीत हासिल कर पाई है, जबकि बेहद छोटे समूह का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी लोजपा अपने हिस्से की सभी पांचों सीटों पर जीत गई है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में भाजपा भले ही केवल तीन सीटों पर जीत हासिल कर पाई है, लेकिन टीडीपी की 16 लोकसभा सीटों और उसे विधानसभा चुनावों में मिली बड़ी जीत में मोदी की भूमिका कम नहीं है। चंद्रबाबू नायडू भी यह बात बखूबी जानते हैं।
इससे इतर, यदि जदयू और टीडीपी बगावत करें भी तो बिहार के ही एनडीए के दूसरे सहयोगी लोजपा (रामविलास पासवान गुट) और हम पार्टी, आंध्र प्रदेश की जनसेना पार्टी मोदी से बगावत नहीं करेंगे। यही कारण है कि वर्तमान और भविष्य के सभी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एनडीए के सहयोगी दल मोदी के पीछे पूरी तरह 'एकजुट' हैं।
सहयोगी दलों ने क्या कहा?
मंत्रिमंडल में कमजोर मंत्रालय मिलने की शिकायतों को चिराग पासवान ने हवा में उड़ा दिया। उन्होंने कहा कि कोई विभाग, कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता। उनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में काम करना सौभाग्य का विषय है। रामदास अठावले ने कहा कि एनडीए में फूट डालने की विपक्ष की कोशिश कामयाब नहीं होगी। जीतनराम मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका सम्मान करना जानते हैं, इसलिए उनके साथ आकर हर नेता स्वयं को सम्मानित महसूस करता है।
भाजपा नेता क्या कहते हैं?
दिल्ली भाजपा में प्रदेश मंत्री (महिला मोर्चा) अनायता भाटी ने अमर उजाला से कहा कि यह विपक्ष की बौखलाहट है कि वह एनडीए में तनाव की जड़ें खोज कर अपने आपको संतुष्ट करना चाहता है। लेकिन उसका दुर्भाग्य है कि उसे कोई तनाव नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण है कि प्रधानमंत्री अपने निजी हित की राजनीति नहीं करते हैं। वे देश को और इसके 140 करोड़ नागरिकों के उत्थान के लिए दिन-रात काम करते हैं। यही कारण है कि एनडीए के सभी सहयोगी दल उनकी इस अच्छी सोच में अपनी भागीदारी निभाना चाहते हैं।
अनायता भाटी ने कहा कि एनडीए का हर सहयोगी दल और इस देश का हर नागरिक यह देख रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश पूरी दुनिया में आगे बढ़ रहा है। दुनिया के हर हिस्से में भारत के नागरिकों का सम्मान बढ़ा है। हर महिला, हर नागरिक का सम्मान बढ़ रहा है। मोदी बिहार-आंध्र प्रदेश को भी उतना ही आगे बढ़ाना चाहते हैं, जितना गुजरात या उत्तर प्रदेश को।
उनका मानना है कि यही कारण है कि सभी राजनीतिक दलों ने अपने निजी हितों को पीछे छोड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूती देने का निर्णय लिया है। यही कारण है कि एनडीए खेमे में कहीं कोई तनाव नहीं दिखाई पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि मोदी 3.0 की सरकार पूरे पांच साल निर्बाध गति से चलेगी और देश का विकास करेगी।