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मोदी कैबिनेट: पीएमओ ने गुप्त तरीके से लिखी कैबिनेट विस्तार की 'पटकथा', जाने वालों को नहीं लगी भनक

Wed, 07 Jul 2021 10:59 PM IST
संजीव कुमार झा जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 07 Jul 2021 10:59 PM IST
सार

पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की कोरोना की दूसरी जंग के दौरान 'अधिकार-प्राप्त समूह' के साथ पटरी नहीं बैठी। रविशंकर प्रसाद को आईटी पॉलिसी और ट्विटर विवाद ले बैठा। सूचना प्रसारण मंत्रालय, कोरोनाकाल के दौरान वैश्विक स्तर पर मोदी सरकार को आलोचना से नहीं बचा सका।  

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Modi cabinet expansion 2021: PMO secretly wrote screenplay of cabinet expansion
डॉ. हर्षवर्धन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

प्रधानमंत्री कार्यालय में दो माह पहले गुप्त तरीके से कैबिनेट विस्तार की पटकथा लिखनी शुरु हुई थी। खास बात ये रही कि इस पटकथा की भनक 'आने वाले' यानी जो मोदी सरकार 2.0 में पहली बार मंत्री बने हैं या किसी राज्य मंत्री की पदोन्नति हुई है, को लग चुकी थी। जिन मंत्रियों का पत्ता कटा है, उन्हें कैबिनेट विस्तार से एक घंटे पहले तक इस बात का एहसास नहीं था। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के इस्तीफे की खबर शपथ ग्रहण समारोह शुरु होने से साठ मिनट पहले ही आई थी। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की कोरोना की दूसरी जंग के दौरान 'अधिकार-प्राप्त समूह' के साथ पटरी नहीं बैठी। रविशंकर प्रसाद को आईटी पॉलिसी और ट्विटर विवाद ले बैठा। सूचना प्रसारण मंत्रालय, कोरोनाकाल के दौरान वैश्विक स्तर पर मोदी सरकार को आलोचना से नहीं बचा सका।  

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बता दें कि मोदी सरकार 2.0 के शपथ ग्रहण के बाद से ही पीएमओ द्वारा ही केंद्रीय मंत्रियों के कामकाज पर नजर रखी जा रही थी। इसके लिए प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पीके मिश्रा की अध्यक्षता में एक टीम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस टीम में अतिरिक्त सचिव के अलावा पीएम के सलाहकार और रिसर्च एवं स्ट्रेट्जी विभाग के हेड भी शामिल थे। केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस टीम ने सभी मंत्रालयों को कई तरह की विकास योजनाओं का खाका तैयार कर उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन योजनाओं की नियमित तौर पर समीक्षा की गई। मंत्रियों को चेतावनी भी दी गई। कोरोना की दूसरी लहर के बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को कई पत्र लिखे थे। इनमें आरोप लगाया गया कि कोरोना से निपटने के लिए मोदी सरकार ने एक नहीं बल्कि 11 'अधिकार-प्राप्त समूह' बनाए थे। क्या पीएमओ ने 'अधिकार-प्राप्त समूह' की बात नहीं मानी या इन समूहों ने सरकार को सही सलाह नहीं दी। राहुल गांधी ने कहा, देश यह सब जानना चाहता है। 
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सूत्रों का कहना है कि इस मसले पर संबंधित विभागों के मंत्री कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। हालांकि रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर इस मुद्दे पर प्रेसवार्ता कर विपक्ष पर राजनीतिक हमला करते रहे। इन मंत्रियों के पास आलोचना को छोड़, उसका अन्य कोई उपाय नहीं था। इन विभागों के कई बिल अटके हुए थे। आईटी एक्ट में संशोधन करने वाला अहम बिल संसदीय समिति के पास है। दूसरी लहर में लोगों का जो बुरा हाल हुआ, उसके बाद लगने लगा था कि डॉ. हर्षवर्धन या नीति आयोग में से किसी की कुर्सी जा सकती है। पिछले दिनों नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत को एक्सटेंशन दिया गया तो यह तय हो गया था कि अब स्वास्थ्य विभाग में किसी पर गाज गिरेगी। कोरोना की पहली लहर के दौरान मोदी सरकार को श्रमिकों के पलायन को लेकर आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था।
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सूत्र बताते हैं कि इस बाबत श्रम मंत्री संतोष गंगवार को पीएमओ द्वारा चेताया गया था। यहां तक कि मंत्रालय के पास संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पूरा रिकॉर्ड नहीं था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सख्त टिप्पणी की थी। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या को लेकर मंत्रालय और सरकार की खिंचाई की गई। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल नई शिक्षा नीति को समझाने में सफल नहीं हो सके। पीएम मोदी, इनसे खुश नहीं थे। उत्तराखंड में सीएम पद की दौड़ में पोखरियाल का नाम जब मीडिया में उछला, तो पीएम और ज्यादा नाराज हो गए। 

कैबिनेट विस्तार में जो लोग पहली बार मंत्री बने हैं, उनके पास मंगलवार को ही पीएमओ से फोन पहुंच गए थे। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उन राज्य मंत्रियों को बुधवार को दिल्ली में रहने के लिए कहा गया, जिनकी पदोन्नति की जानी थी। सार्वजनिक तौर पर मंत्री पद से हटने वालों में पहला नाम थावर चंद गहलौत का था। वजह, उनका नाम एक दिन पहले ही राज्यपालों की सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद किसी भी केंद्रीय मंत्री को यह भनक नहीं लगी कि कैबिनेट विस्तार में उनका पत्ता कट सकता है। बुधवार को सबसे बड़ा झटका स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को लगा।


यह खबर बाहर आते ही कई दूसरे मंत्री परेशान हो गए। हालांकि वे दिल्ली में मौजूद थे, लेकिन उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच चुकी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार दोपहर जब सभी नए पुराने मंत्रियों को अपने आवास पर बुलाया तो भी 12 मंत्रियों में से तीन लोगों को ही यह बात मालूम चली थी कि उनका नाम कैबिनेट विस्तार में नहीं है। संजय धोत्रे, रत्तन लाल कटारिया और प्रताप चंद सारंगी को मालूम था कि वे हटने जा रहे हैं। बैठक से बाहर आने के बाद मंत्रियों द्वारा अपने इस्तीफे राष्ट्रपति को भेजे जाने लगे। यानी उसके बाद कई मंत्रियों को कहा गया कि वे इस्तीफ़ा भेज दें। सभी मंत्रियों ने शाम साढ़े पाँच बजे तक अपने इस्तीफ़े राष्ट्रपति को भेज दिए थे।

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