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भीड़ हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर गृह मंत्रालय को जारी किया नोटिस
Fri, 26 Jul 2019 12:49 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 26 Jul 2019 12:49 PM IST
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उच्चतम न्यायालय ने आज भीड़ हिंसा को लेकर दिए 2018 के फैसले को लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। याचिका में फैसले को ठीक तरह से लागू करने की मांग की गई थी। जिसपर अदालत ने गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।
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Supreme Court issues notice to Ministry of Home Affairs (MHA), on hearing a PIL seeking proper implementation of the 2018 judgement with respect to mob lynching cases. pic.twitter.com/FkiJ3UBYv5
— ANI (@ANI) July 26, 2019विज्ञापन
न्यायालय ने पिछले साल भीड़ हिंसा रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। अपने फैसले में अदालत ने कहा था कि कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। लोकतंत्र में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती।
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राज्य सरकारों को जिम्मेदारी देते हुए न्यायालय ने कहा था कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखें। अदालत ने संसद से भीड़ हिंसा के खिलाफ नया और सख्त कानून बनाने को कहा था।
भीड़ हिंसा की घटनाओं पर सख्ती दिखाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था, 'मॉबोक्रेसी' को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसे एक नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है।' अदालत ने राज्य सरकारों को सख्त आदेश दिया था कि वो संविधान के मुताबिक काम करें। न्यायालय ने कहा कि राज्य इन बढ़ती घटनाओं के खिलाफ बहरे नहीं हो सकते। इससे कड़ाई से निपटना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
- सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में कहा था कि राज्यों को शांति बनाए रखने की जरूरत है। अदालत ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के सिलसिले में प्रिवेंटिव (निवारक), रेमिडियल (उपचारात्मक) और प्यूनिटिव (दंडनीय) दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा था कि संसद को इसके लिए कानून बनाना चाहिए। जिसमें भीड़ द्वारा हत्या के लिए सजा का प्रावधान हो।
- शीर्ष अदालत ने सरकार से कहा था कि भीड़ हिंसा को एक अलग अपराध की श्रेणी में रखा जाए। वहीं अदालत ने केंद्र सरकार से इसको लेकर नया कानून बनाने के संबंध में जानकारी मांगी थी।