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विधायकों का कामकाज जानने में छूट रहे पसीने

Tue, 17 Jan 2017 07:28 PM IST
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Jan 2017 07:28 PM IST
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MLA funds does not pay for the public
सरकारें किसी की भी रही हो लेकिन चुनावी राज्यों की विधानसभाएं पारदर्शिता की कवायद अब तक पिछड़ी साबित हुई हैं। पांच राज्यों  के विधायक क्या काम कर रहे हैं, इनकी जानकारी हासिल करने में आम जनता को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। विधायकों की उपस्थिति से लेकर उनके विधायक निधि का खर्च का इनमें से किसी भी राज्य में सार्वजनिक नहीं है। आरटीआई से भी इनकी जानकारी आसानी से नहीं मिलती है।
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आरटीआई पर काम करने वाली संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) ने चुनावी राज्यों  उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभा पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट को उन दर्जन बिन्दुओं के आधार पर तैयार किया गया है जिनकी जानकारी लोकसभा और राज्यसभा की वेबसाइट्स पर आसानी से मिल जाते हैं। इसके इतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने भी एक आदेश दिया था कि आरटीआई की धारा 4 (1) (बी) के तहत इनकी जानकारी हर हाल में वेबसाइट्स पर सार्वजनिक करनी चाहिए।
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सीएचआरआई के सदस्य वेंकटेश नायक ने बताया पांच राज्यों के किसी भी विधानसभा की वेबसाइट्स पर विधायकों की संपत्ति का ब्यौरा नहीं है। वहीं आरटीआई के जरिए सांसदों की नवीनतम संपत्ति जानकारी बेहद आसानी से मिल सकती है और संसद की वेबसाइट्स पर इन आरटीआई के जवाब को कोई भी व्यक्ति आसानी से देख सकता है। इसके अलावा विधायक निधि का खर्च, विधानसभा में उपस्थिति और गठित विधायक समिति की रिपोर्ट, विधानसभा के पटल पर रखे दस्तावेजों का ब्यौरा और आरटीआई की धारा 4 (1) (बी) के तहत दी जाने सभी 17 बिन्दुओं की जानकारी इन पांच चुनावी राज्यों के विधानसभा की वेबसाइट्स से पूरी तरह से नदारद है। इसके अलावा आरटीआई आवेदनों का ब्यौरा और जनसूचना अधिकारी का नाम, पता की जानकारी गोवा विधानसभा को छोड़कर  उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर विधानसभा की वेबसाइट पर नहीं दी गई है। 
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500 रुपए में मिलेगी एक बिन्दु की जानकारी

MLA funds does not pay for the public
अगर कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश के विधायकों के कामकाज के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता है तो उसे अपनी जेब हल्की करनी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरटीआई आवेदन का शुल्क 500 रुपए है। यही नहीं आवेदन में सिर्फ एक बिन्दु पर ही जानकारी मांगी जा सकती है। दूसरे बिन्दु पर जानकारी मांगी तो आवेदन निरस्त किया जा सकता है। जबकि बाकी राज्यों में सिर्फ दस रुपए ही शुल्क है। 

इन 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट की थी तैयार 
सीएचआरआई ने विधायकों के नाम, कितने दिन विधानसभा सत्र रहा, विधायकों की उपस्थिति, रिपोर्ट का ब्यौरा, विधायक समिति की सूची, विधायक समिति की रिपोर्ट, प्रस्तुत बिल का ब्यौरा, पटल पर कितने दस्तावेज प्रस्तुत हुए, विधायक निधि का खर्च, सवाल व जवाब की पूरी जानकारी, जनसूचना अधिकारी का ब्यौरा, आरटीआई की धारा 4 (1) (बी) के तहत दी जाने वाली सूचना और विधायकों की संपत्ति की नवीनतम जानकारी जैसे एक दर्जन बिन्दुओं पर रिपोर्ट तैयार की है।
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