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Agni-5: 'मिशन दिव्यास्त्र, भारत की तकनीकी क्षमता का सबूत', रक्षा विशेषज्ञों ने किया बड़ा दावा
Tue, 12 Mar 2024 09:01 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 12 Mar 2024 09:01 AM IST
सार
देश में ही विकसित अग्नि-5 मिसाइल के साथ MIRV तकनीक से यह सुनिश्चित होगा कि एक ही मिसाइल में कई वारहेड तैनात किए जा सकते हैं। इस परीक्षण के बाद भारत भी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास MIRV तकनीक है।
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अग्नि 5
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत ने सोमवार को पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली न्यूक्लियर बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल के सफल परीक्षण के साथ ही पूरा पाकिस्तान और चीन भी अब भारतीय मिसाइलों के जद में आ गया है। इस पर इंडियन स्पेस एसोसिएशन के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट (रिटायर्ड) समेत कई विशेषज्ञों ने खुशी जाहिर की और इसे भारत के लिए गर्व की बात बताया।
जानिए क्या बोले विशेषज्ञ
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट (रिटायर्ड) ने कहा कि 'मिशन दिव्यास्त्र, भारत के लिए गर्व का पल है। देश में ही विकसित अग्नि-5 मिसाइल के साथ MIRV तकनीक से यह सुनिश्चित होगा कि एक ही मिसाइल में कई वारहेड तैनात किए जा सकते हैं। इस परीक्षण के बाद भारत भी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास MIRV तकनीक है। साथ ही इस मिसाइल में जो सेंसर्स और एवियोनिक्स लगे हैं, वो भी भारत में बने हैं और ये भारत की तकनीकी क्षमता का सबूत हैं। मैं इसके लिए डीआरडीओ के सभी वैज्ञानिकों को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।'
डीआरडीओ के पूर्व प्रवक्ता डॉ. रवि गुप्ता ने कहा कि यह देश के लिए यादगार दिन है, जब डीआरडीओ ने दिव्यास्त्र का सफल परीक्षण किया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है और इससे भारत के पास भी ऐसी क्षमता आ गई है, जो कम ही देशों के पास है। दिव्यास्त्र में वो सभी खासियत और सटीकता है, जो अग्नि-5 मिसाइल के पास है। अब अग्नि 5 मिसाइल पर एक से ज्यादा हथियारों से विभिन्न ठिकानों को टारगेट बनाया जा सकता है। इससे मिसाइल की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
चीन ने भी माना दिव्यास्त्र का लोहा
भारत के दिव्यास्त्र अग्नि 5 का लोहा चीन ने भी मान लिया। यह भी स्वीकार किया कि भारत अब मिसाइल टेक्नोलॉजी में परिपक्व हो गया है। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अग्नि-5 एमआईआरवी पर पीएम नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अपने संपादकीय में लिखा, मानना होगा कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। एक सैन्य विशेषज्ञ ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक परिपक्व हो गई है। भारत एक रॉकेट में कई उपग्रहों को लॉन्च करने में सक्षम है। यही भारत के लिए मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) विकसित करने की नींव बनी है। इस क्षमता को अनदेखा नहीं कर सकते। हालांकि उसने लिखा, भारत की सैन्य क्षमताओं में सुधार को लेकर चीन बहुत चिंतित नहीं है।
क्या है MIRV तकनीक
लंबी दूरी की मिसाइल अग्नि-5 को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। यह मिसाइल मल्टीपल इंडीपेंडेंटली टारगेटेबल रि-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक पर आधारित है। एमआईआरवी तकनीक एक ही मिसाइल से कई टारगेट को निशाना बना सकती है। साथ ही अग्नि मिसाइल परमाणु हथियारल ले जाने में भी सक्षम है। अभी तक एमआईआरवी तकनीक सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन के पास ही है और इस मिसाइल को जमीन से या समुद्र से और पनडुब्बी से भी लॉन्च किया जा सकता है। ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान और इस्राइल भी ऐसे मिसाइल सिस्टम को विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।
MIRV तकनीक की खास बात ये है कि इसकी मदद से कई हथियार ले जाए जा सकते हैं और अलग-अलग स्पीड और अलग-अलग दिशाओं में इन हथियारों से टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है। यह काफी मुश्किल तकनीक है और यही वजह है कि सिर्फ कुछ ही देशों के पास यह तकनीक मौजूद है। अमेरिका ने साल 1970 में ही एमआईआरवी तकनीक विकसित कर ली थी और अब भारत भी उस ग्रुप का हिस्सा बन गया है, जिन देशों के पास एमआईआरवी तकनीक है।
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जानिए क्या बोले विशेषज्ञ
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट (रिटायर्ड) ने कहा कि 'मिशन दिव्यास्त्र, भारत के लिए गर्व का पल है। देश में ही विकसित अग्नि-5 मिसाइल के साथ MIRV तकनीक से यह सुनिश्चित होगा कि एक ही मिसाइल में कई वारहेड तैनात किए जा सकते हैं। इस परीक्षण के बाद भारत भी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास MIRV तकनीक है। साथ ही इस मिसाइल में जो सेंसर्स और एवियोनिक्स लगे हैं, वो भी भारत में बने हैं और ये भारत की तकनीकी क्षमता का सबूत हैं। मैं इसके लिए डीआरडीओ के सभी वैज्ञानिकों को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।'
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#WATCH | On the Agni-5 MIRV launch, Indian Space Association chief Lt Gen Anil Bhatt (Retd) says, "It is a moment of pride that India launched Mission Divyastra. The first flight of the indigenously developed Agni-5 missile, along with the MIRV technology, will ensure that a… pic.twitter.com/6OAjGq8N0b
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) March 12, 2024
डीआरडीओ के पूर्व प्रवक्ता डॉ. रवि गुप्ता ने कहा कि यह देश के लिए यादगार दिन है, जब डीआरडीओ ने दिव्यास्त्र का सफल परीक्षण किया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है और इससे भारत के पास भी ऐसी क्षमता आ गई है, जो कम ही देशों के पास है। दिव्यास्त्र में वो सभी खासियत और सटीकता है, जो अग्नि-5 मिसाइल के पास है। अब अग्नि 5 मिसाइल पर एक से ज्यादा हथियारों से विभिन्न ठिकानों को टारगेट बनाया जा सकता है। इससे मिसाइल की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
चीन ने भी माना दिव्यास्त्र का लोहा
भारत के दिव्यास्त्र अग्नि 5 का लोहा चीन ने भी मान लिया। यह भी स्वीकार किया कि भारत अब मिसाइल टेक्नोलॉजी में परिपक्व हो गया है। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अग्नि-5 एमआईआरवी पर पीएम नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अपने संपादकीय में लिखा, मानना होगा कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। एक सैन्य विशेषज्ञ ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक परिपक्व हो गई है। भारत एक रॉकेट में कई उपग्रहों को लॉन्च करने में सक्षम है। यही भारत के लिए मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) विकसित करने की नींव बनी है। इस क्षमता को अनदेखा नहीं कर सकते। हालांकि उसने लिखा, भारत की सैन्य क्षमताओं में सुधार को लेकर चीन बहुत चिंतित नहीं है।
क्या है MIRV तकनीक
लंबी दूरी की मिसाइल अग्नि-5 को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। यह मिसाइल मल्टीपल इंडीपेंडेंटली टारगेटेबल रि-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक पर आधारित है। एमआईआरवी तकनीक एक ही मिसाइल से कई टारगेट को निशाना बना सकती है। साथ ही अग्नि मिसाइल परमाणु हथियारल ले जाने में भी सक्षम है। अभी तक एमआईआरवी तकनीक सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन के पास ही है और इस मिसाइल को जमीन से या समुद्र से और पनडुब्बी से भी लॉन्च किया जा सकता है। ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान और इस्राइल भी ऐसे मिसाइल सिस्टम को विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।
MIRV तकनीक की खास बात ये है कि इसकी मदद से कई हथियार ले जाए जा सकते हैं और अलग-अलग स्पीड और अलग-अलग दिशाओं में इन हथियारों से टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है। यह काफी मुश्किल तकनीक है और यही वजह है कि सिर्फ कुछ ही देशों के पास यह तकनीक मौजूद है। अमेरिका ने साल 1970 में ही एमआईआरवी तकनीक विकसित कर ली थी और अब भारत भी उस ग्रुप का हिस्सा बन गया है, जिन देशों के पास एमआईआरवी तकनीक है।