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दुष्कर्मी ने रचाई पीड़िता से शादी, केरल उच्च न्यायालय ने मामले को किया खत्म
Thu, 30 May 2019 02:27 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 30 May 2019 02:27 AM IST
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केरल उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के मामले को खत्म करने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई की। इस मामले में न्यायालय के बाहर ही दोनों पक्षों में समझौता हो गया था। समझौते के तहत याचिकाकर्ता ने दुष्कर्म पीड़िता से शादी कर ली थी। याचिकाकर्ता ने अब इस मामले को खत्म करने की मांग की है।
याचिकाकर्ता शख्स, पथनमथीट्टा न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट -1 की अदालत में दायर एक मामले में आरोपी था। उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत अपराध करने का आरोप था।
दुष्कर्म के मामले को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने अपने हालिया फैसले में कहा कि इस मामले की परिस्थितियों से पता चलता है कि महिला ने याचिकाकर्ता से शादी करने के वादे पर आपसी सहमति से संबंध बनाए थे।
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न्यायालय ने आगे कहा कि इस तथ्यात्मक परिदृश्य में, याचिकाकर्ता के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध करने के लिए मुकदमा चलाना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अभियोजन जारी रखने से दंपति को शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी और यह उनके सुखी वैवाहिक जीवन में कलह पैदा करेगा। न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को खत्म किया।
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याचिकाकर्ता शख्स, पथनमथीट्टा न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट -1 की अदालत में दायर एक मामले में आरोपी था। उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत अपराध करने का आरोप था।
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दुष्कर्म के मामले को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने अपने हालिया फैसले में कहा कि इस मामले की परिस्थितियों से पता चलता है कि महिला ने याचिकाकर्ता से शादी करने के वादे पर आपसी सहमति से संबंध बनाए थे।
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न्यायालय ने आगे कहा कि इस तथ्यात्मक परिदृश्य में, याचिकाकर्ता के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध करने के लिए मुकदमा चलाना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अभियोजन जारी रखने से दंपति को शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी और यह उनके सुखी वैवाहिक जीवन में कलह पैदा करेगा। न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को खत्म किया।