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Sengol Row: अधीनम प्रमुख ने सेंगोल पर हालिया रिपोर्ट को बताया गलत, कहा- तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया

Sun, 11 Jun 2023 06:27 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, त्रिची (तमिलनाडु)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, त्रिची (तमिलनाडु) Published by: गुलाम अहमद Updated Sun, 11 Jun 2023 06:27 AM IST
सार

शैव मठ थिरुवावादुथुरई अधीनम के प्रमुख ने कहा कि देश की स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर सेंगोल को पंडित जवाहर लाल नेहरू को देने से पहले भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपा गया था।

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Mischievous and distortion of facts says Thiruvavaduthurai Adheenam head on Sengol row
पीएम को सेंगोल सौंपते अधीनम प्रमुख (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

शैव मठ थिरुवावादुथुरई अधीनम के प्रमुख ने सेंगोल को लेकर हाल में मीडिया में आई खबर को गलत बताया है। अधीनम के प्रमुख गुरु महासन्निधानम् ने मीडिया में आई खबर शरारतपूर्ण और तथ्यों तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर सेंगोल को पंडित जवाहर लाल नेहरू को देने से पहले भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि सेंगोल को संसद में स्थापित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिल संस्कृति को सम्मान दिया है।

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मीडिया के एक वर्ग में हाल में थिरुवावादुथुरई अधीनम के 24वें महंत अंबालवना देसिका परमाचार्य स्वमिगल के हवाले से खबर प्रकाशित की गई थी। इसमें कहा गया था कि अगस्त 1947 में नेहरू को देने के लिए माउंटबेटन को कभी सेंगोल नहीं दिया गया था। माउंटबेटन की तरफ से नेहरू को सेंगोल सौंपे जाने की न कोई तस्वीर है और न ही कोई स्पष्ट सूचना है। इसमें यह भी कहा गया था कि सेंगोल सीधे नेहरू को ही दिया गया था।
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मीडिया में आई रिपोर्ट पर अधीनम में सोशल मीडिया पर बयान जारी कर उसे गलत बताया है। महासन्निधानम ने मीडिया में महंत के बयान को गलत संदर्भ में पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि अगर हम मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री कार्यालय जाते हैं, तो फोटोग्राफरों को उनके कार्यालय के अंदर जाने की अनुमति नहीं होती। कुछ मीडिया रिपोर्ट में गलत तरीके से यह प्रकाशित किया गया है कि तस्वीर वहां नहीं है, जो दुर्भाग्य से दुख है। ऐसी बातें प्रकाशित न करें।

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