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मिराज-2000, सुखोई 30 और अवाक्स की तिकड़ी ने आतंकी कैंपों को चंद मिनटों में किया नेस्तनाबूद

Wed, 27 Feb 2019 02:17 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Wed, 27 Feb 2019 02:17 AM IST
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Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
वायु सेना - फोटो : अमर उजाला

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में चल रहे जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर हमला कर इसे नेस्तनाबूद कर दिया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई में वायुसेना ने 12 मिराज 2000 विमान, सुखोई 30 जेट, एक मिड एयर रिफ्यूलर और दो एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (चेतावनी व नियंत्रण प्रणाली या अवाक्स) का प्रयोग किया था। 

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उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना के सभी बेस को अधिकतम अलर्ट पर रखा गया था जिससे स्ट्राइक के जवाब में पाकिस्तान की किसी कार्रवाई का जवाब दिया जा सके। बता दें कि भारतीय वायुसेना ने 1971 के युद्ध के बाद से पहली बार एलओसी (नियंत्रण रेखा) पार की है। 
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सूत्रों ने कहा कि वायुसेना ने जैश के प्रशिक्षण शिविर को तबाह करने के लिए लेजर गाइडेड बमों का प्रयोग किया, एक-एक बम एक हजार किलो से ज्यादा वजनी था। यह कार्रवाई सुबह 3.45 बजे शुरू हुई और 4.05 बजे समाप्त हो गई थी। असल स्ट्राइक दो मिनट से भी कम समय तक चली थी। 

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शीर्ष कमांडर कर रहे थे निगरानी

Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala Graphics

पूरे ऑपरेशन की निगरानी दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालय से शीर्ष कमांडरों द्वारा की जा रही थी, जिसमें वायुसेना प्रमुख एसके धनोआ भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सेना प्रमुख बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा को पूरे ऑपरेशन के पल-पल की जानकारी दी जा रही थी। 

एक सूत्र ने कहा कि यह बहुत बड़ी कार्रवाई थी और पाकिस्तान इसे कभी भूल नहीं पाएगा। यह कार्रवाई सौ फीसद सफल रही। इस स्ट्राइक से पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश गया है कि पड़ोसी देश में संचालित आतंकी संगठनों से निपटने के लिए भारत अपनी वायुसेना का प्रयोग करने में कतई नहीं हिचकिचाएगा। 

सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन का हिस्सा रहे अधिकतर जेट विमान काफी नीचे उड़े ताकि पाकिस्तानी रडार की पकड़ में न आ सकें वहीं अवाक्स ने मिराज 2000 को रेडियल सुरक्षा दी। मिड एयर रिफ्यूलर एक आईएल-78 विमान था जिसने एलओसी पार नहीं की। उन्होंने बताया कि सभी विमान बिना किसी नुकसान के अपने-अपने बेस पर लौट आए। उन्होंने बताया कि एयर स्ट्राइक के लिए मिराज 2000 फाइटर जेट का प्रयोग उनकी मारक क्षमता व अचूक निशाने की खूबी के चलते किया गया। 

भारतीय वायुसेना ने हमले के लिए बालाकोट को ही क्यों चुना?

Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala Graphics
पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। इसी बीच आज सुबह भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर आतंकी कैंप को ध्वस्त कर दिया है। इस दौरान भारतीय सेना ने बालाकोट में बन भी गिराए हैं। इस बात की पुष्टि खुद पाकिस्तानी सेना ने की है। 

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट कर कहा, "भारतीय वायुसेना ने मुजफ्फराबाद सेक्टर में घुसपैठ की है। पाकिस्तानी वायु सेना की तरफ से समय पर प्रभावी कार्रवाई की गई, जिसके बाद वो भागने लगे। उन्होंने भागते हुए बालाकोट के पास कुछ बम भी गिराए। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है।" तो ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय वायुसेना ने आखिर बालाकोट को ही क्यों चुना है? 

पाकिस्तान और भारत में इस हमले के बाद से ही काफी चर्चा हो रही है। पाकिस्तान के पत्रकार कह रहे हैं कि भारत ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हमला नहीं किया है। बल्कि बालाकोट में किया है।

एक पाकिस्तानी पत्रकार मुशर्रफ जैदी ने ट्वीट कर कहा है, "बालाकोट आजाद कश्मीर में नहीं है। अगर भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में बम गिराए हैं तो ये नियंत्रण रेखा और आजाद कश्मीर के भी पार है। बालाकोट खैबर पख्तुनख्वा में है। भारत ने केवल नियंत्रण रेखा ही पार नहीं की है बल्कि यह पाकिस्तान पर हमला है।"

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पूछा है कि यह बालाकोट पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर वाला है या खैबर पख्तुनख्वा वाला है। 
 

कहां है बालाकोट?

पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा प्रांत के मनशेरा जिले में बालाकोट स्थित है। यह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 160 किलोमीटर की दूरी पर है।  बता दें जब 2005 में कश्मीर में भूकंप आया था तो बालाकोट पूरी तरह से तहस-नहस हो गया था। इस शहर को दोबारा से पटरी पर लाने के लिए काफी काम हुआ। इस शहर को फिर से पहले जैसा बनाने में सऊदी अरब ने भी काफी मदद की थी।

ये भूकंप 7.6 की तीव्रता का था। इसमें बालकोट के 12 यूनियन काउंसिल दब गए थे और जिनमें कम से कम 40 हजार लोगों के घर थे। यह स्थान पर्वतीय और बेहद खूबसूरत इलाका है।

कुनहर नदी के तट पर स्थित बालाकोट खूबसूरती के अलावा विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए जाना जाता है। बालाकोट पाकिस्तान में पर्यटन के लिए काफी लोकप्रिय है।

आठ जगहों पर हुआ हमला

ये वही बालाकोट है जहां पुलवामा के गुनहगार जैश के ठिकाने और उसके कमांडर सिर छिपाते हैं। भारत की वायुसेना ने खुफिया जानकारी के आधार पर इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया है।

वायुसेना के मिराज ने जिस लक्ष्य को नष्ट किया उनमें से एक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का क्षेत्र भी शामिल है। इसके अलावा जो इलाके वायुसेना के इस हमले की जद में आए हैं वो हैं- 

लीपा, पछीबन चाम, काहूता, कोतरली, शारदी, केल, दुधनियाल, अठमुका, जूरा, लैंजोट, निकियाल, खुरेटा, मंथौर।

वायुसेना के सूत्रों के हवाले से कहा है, '26 फरवरी के तड़के भारतीय लड़ाकू विमान मिराज 2000 के एक समूह ने एसओसी पार कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकाने पर बमबारी की और उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। आतंकी ठिकाने पर 1000 किलो के बम गिराए गए। इस अभियान में 12 मिराज विमानों ने हिस्सा लिया।'

इस अभियान के लिए वायुसेना ने लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया। जिन एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमानो का इस्तेमाल इस अभियान में किया गया उन्हें पिछले तीन दिनों से हिंडन एयरबेस पर अलर्ट पर रखा गया है।  

पाकिस्तान के एफ16 विमानों ने भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 पर जवाबी कार्रवाई देने की कोशिश की लेकिन भारतीय फॉर्मेशन के के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए। इस अभियान को वेस्टर्न एयर कमांड ने अंजाम दिया। 



 

भारत के इन 7 कदमों से पाकिस्तान पड़ा पस्त...फिर सर्जिकल स्ट्राइक 2 ने निकाला दम

Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
पुलवामा में हमला आज से 12 दिन पहले 14 फरवरी 2019 को हुआ था। तब से भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 7 बड़े कदम उठाए। तब से अब तक क्या क्या कार्रवाई हुई, जानिए। 

1- मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस 


पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। इस हमले को लेकर देशभर में गुस्सा था। केंद्र सरकार भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी में दिख रही थी। सरकार ने सबसे पहले पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएनएफ) को लेकर बड़ा फैसला लिया। पुलवामा हमले के अगले दिन 15 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान का एमएफएन का दर्जा वापस ले लिया। हालांकि, पाकिस्तान इसे लेकर ना-नुकुर करता रहा और आखिर तक यही कहता रहा कि अभी तक भारत की तरफ से उसे आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान, भारत का सर्वाधिक तरजीह वाला राष्ट्र नहीं रह गया है। 

2- भारतीय उच्चायुक्त को बुलाया

पुलवामा हमले के अगले दिन 15 फरवरी को भारत ने इस्लामाबाद में तैनात भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को चर्चा के लिए नई दिल्ली बुलाया। इसे भारत का सख्त कदम माना गया। इसी दिन विदेश सचिव विजय गोखले ने पाक उच्चायुक्त सोहेल महमूद को बुलाकर हमले को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया और जैश पर कार्रवाई करने को भी कहा। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर पनप रहे जैश जैसे आतंकी संगठनों पर सख्त कार्रवाई करे। 

3- सीमाशुल्क 200 फीसदी बढ़ाया  

भारत ने 17 फरवरी को एक और बड़ा फैसला लिया। भारत ने पाकिस्तान से आयात होने वाले सामान पर इंपोर्ट ड्यूटी 200 फीसदी बढ़ा दी। भारत ने पाकिस्तान से आयातित सभी सामानों पर सीमाशुल्क 200 फीसदी कर दिया। इस फैसले का पाकिस्तान पर बड़ा असर होगा, उसके यहां से भारत आयात होने वाला सामान महंगा हो जाएगा और जाहिर है इससे उसके माल की खपत और मांग कम होगी। माल महंगा होगा तो इसका सीधा असर सामान की बिक्री पर पड़ेगा। 

4-पाकिस्तान जाने वाला पानी रोका

भारत ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोकने का एलान किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 21 फरवरी को इसका एलान किया। उन्होंने कहा कि प्रमुख नदियों से पाकिस्तान को सप्लाई होने वाला पानी रोका जाएगा। ये पानी पंजाब और कश्मीर को दिया जाएगा। गडकरी ने कहा है कि इन तीनों नदियों पर बने प्रॉजेक्ट्स की मदद से पाक को दिए जा रहे पानी को अब पंजाब और जम्मू-कश्मीर की नदियों में प्रवाहित किया जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान का कहना है कि उसकी ओर आने वाला पानी रोकना संभव नहीं है। बता दें कि व्यास, सतलुज और रावी नदी का पानी भारत से होकर ही पाकिस्तान जाता है।  

5-पाकिस्तान को टमाटरों की सप्लाई रोकी 

भारत ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान को भेजे जाने वाले टमाटरों को सप्लाई बंद करने का फैसला किया। भारत से बड़े पैमाने पर पाकिस्तान को टमाटर भेजे जाते हैं। टमाटर के लिए पाकिस्तान पूरी तरह से भारत पर ही निर्भर है। अब उसे दूसरे देशों से टमाटर आयात करना होगा जिसके लिए ज्यादा पैसे भी चुकाने होंगे। भारत में कई प्रमुख उत्पादकों ने पाकिस्तान को टमाटर न बेचने का फैसला लिया है। इसके चलते वहां टमाटर के दाम 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। टमाटर न बेचने के भारत के फैसले से पाकिस्तान में लोग बुरी तरह बौखला उठे हैं। इसे लेकर वहां के मीडिया में तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कहीं रिपोर्टर अपशब्द बोल रहे हैं तो कहीं कव्वाली गायी जा रही है।   

6-बड़े देशों के बीच लामबंदी 

पुलवामा हमले के बाद भारत ने आक्रामक मगर सधे कदम उठाए। भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन. द. कोरिया जैसे कई बड़े देशों के सामने पुलवामा हमले और पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया। इन देशों ने एक सुर में पुलवामा हमले की निंदा की। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने भारत का खुलकर साथ दिया। उन्होंने कहा कि हमले के जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। वहीं, इस्राइल ने भी भारत की हर संभव मदद की पेशकश की। चीन ने भी हमले की निंदा की लेकिन मसूद अजहर को आतंकी मानने से इनकार कर दिया। फ्रांस ने भी खुलकर भारत का साथ देते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ युद्ध में वह भारत के साथ है। 

7- ट्रंप ने किया समर्थन 

आतंक के खिलाफ भारत की मुहिम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने खुलकर साथ दिया। ट्रंप ने 22 फरवरी को एक चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में कहा था कि कश्मीर में बहुत खतरनाक है। भारत के आत्मरक्षा के अधिकार के बारे में सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा था कि भारत किसी मजबूत कदम पर विचार कर रहा है। मेरा मतलब है कि भारत ने हमले में 50 लोगों को खोया है। इसलिए, मैं भी इस बात को समझ सकता हूं। बताया जाता है कि जैश के आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई को लेकर भारत ने अमेरिका को विश्वास में लिया था। मौजूदा समय में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार बन गया है। 




 

भारतीय वायुसेना के कहर से थर्राया पाकिस्तान, 10 दिन तक ऐसे हुई हमले की पूरी तैयारी

Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
पुलवामा हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने अपना दमखम दिखाते हुए पाक अधिकृत कश्मीर में बम बरसाकर कई आतंकी ठिकाने तहस-नहस कर दिए हैं। भारत के 12 मिराज विमानों ने कुल 1000 किलो से ज्यादा बम गिराकर पुलवामा के गुनहगार जैश-ए-मोहम्मद समेत कई संगठनों के ठिकानों को तबाह कर दिया। 

कैसे बना हमले का प्लान?

लेकिन ये सब अचानक नहीं हुआ। पुलवामा हमले के अगले ही दिन वायुसेना ने कह दिया था कि वो जवाबी कार्रवाई की अगुवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। 
 
  • 15 फरवरी, सुबह 9.30 बजे- भारतीय वायु सेना अध्यक्ष बीएस धनोआ ने पुलवामा के जवाब में हवाई हमले का विकल्प सामने रखा। जिसे सरकार ने हरी झंडी दिखाई। 
  • 16 से 20 फरवरी- भारतीय वायु सेना और थल सेना ने मिलकर हेरोन ड्रोन के जरिए एलओसी पर हवाई सर्वेक्षण किया
  • 20 से 22 फरवरी- वायु सेना और खुफिया एजेंसियों ने हमले के संभावित ठिकानों का नक्शा तैयार किया
  • 21 फरवरी- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को हवाई हमले के लक्ष्यों की जानकारी दी गई
  • 22 फरवरी- वायु सेना का एक स्क्वाड्रन टाइगर्स और सात स्क्वाड्रन बैटल एक्सेज को सक्रिय किया गया
  • 22 फरवरी- दो मिराज स्क्वाड्रन ने 12 विमानों को मिशन के लिए चुना
  • 24 फरवरी- मध्य भारत में परीक्षण किया गया
  • 26 फरवरी- तड़के साढ़े तीन बजे भारतीय वायु सेना के मारक मिराज विमानों ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर 12 आतंकी ठिकानों को तबाह किया

 

भारतीय वायुसेना की ताकत हैं ये लड़ाकू विमान

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भारतीय वायुसेना
पुलवामा में 40 जवानों की शहादत का बदला 12 मिराज विमानों ने लिया है। आज सुबह भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर आतंकी कैंपों को ध्वस्त कर दिया है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वायुसेना के विमान ने आतंकी कैंप पर एक हजार किलोग्राम के बम गिराए। जिसमें आतंकी कैंप पूरी तरह से तबाह हो गए।

मिराज के अलावा भारतीय वायुसेना के पास और भी कई लड़ाकू विमान हैं। चलिए जानते हैं भारतीय वायुसेना की ताकत-

एव्रो विमान

इस लड़ाकू विमान में ट्विन इंजन टर्बोप्रॉप है। इस ब्रिटिश लड़ाकू विमान को सैन्य परिवहन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें 48 पैराट्रूपर्स तक की क्षमता है। ये 6 टन तक का वजन लाद सकता है। इसकी गति 452 किमी प्रति घंटा है।

चेतक

लड़ाकू हेलिकॉप्टर चीता में सिंगल इंजन टरबोशाफ्ट है, यह फ्रांस की कंपनी द्वारा बनाया गया है। इसमें तीन लोग बैठ सकते हैं। इसके साथ इस खास विमान में 100 किलोग्राम तक स्लिंग लोड की क्षमता है। इसकी अधिकतम गति 121 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह 4 मिनट में 1 किलोमीटर तक चढ़ सकता है।

एमआई-17 वी5

एमआई-17 वी5 एक शक्तिशाली लड़ाकू हेलिकॉप्टर है। यह आधुनिक एवियोनिक्स और ग्लास कॉकपिट इंस्ट्रूमेंटेशन से लैस है। भारत इसका इस्तेमाल सेना के डिप्लॉयमेंट, पैट्रोलिंग, सर्चिंग-रेस्क्यू और मिलिट्री ट्रांसपोर्ट के लिए करता है। इसका प्रयोग यात्री या माल ढोने, मेडिकल इमरजेंसी, राहत और बचाव अभियान में भी किया जाता है।

एमआई-26

एमआई-26 एक रूसी लड़ाकू हेलिकॉप्टर है। एमआई-26 में ट्विन इंजन टरबोशाफ्ट है। इस मिलिट्री लिफ्ट हेलिकॉप्टर में 70 सैनिकों और 20 हजार किलोग्राम पेलोड की क्षमता है। इसकी अधिकतम गति 295 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

एमआई-25/एमआई-35

हमला करने वाले इस ट्विन इंजन टरबोशाफ्ट हेलिकॉप्टर में 8 लोगों के बैठने की क्षमता है। इसमें 12.7 एमएम रोटरी गन भी लगी हुई है। इसमें एंटी टैंक मिसाइल सहित 1500 किलोग्राम का भार सहने की क्षमता है। इसकी अधिकतम गति 310 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

डोर्नियर

ट्विन इंजन टरबोप्रोप वाला ये विमान लॉजिस्टिक एयर सपोर्ट स्टाफ ट्रांसपोर्ट भी है। इसे जर्मनी की कंपनी द्वारा बनाया गया है। जिसमें 19 लोग बैठ सकते हैं। इसमें 2057 किलोग्राम का वजन सहने की क्षमता है। इसकी अधिकतम गति 428 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

आईएल-76

आईएल-76 चार इंजन की हेवी ड्यूटी वाला रूसी विमान है। इसकी अधिकतम गति 850 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसमें ट्विन 23 एमएम की तोप भी लगी है। इसमें 225 सैनिकों की टुकड़ी सवार हो सकती है। इसमें 40 टन वजन सहने की क्षमता है।

सी-17

सी-17 भारतीय वायुसेना का पहला भारी सैन्य साजो सामान ले जाने में सक्षम रणनीतिक परिवहन विमान है। यह विमान सिंगल होप में 4200-9000 किलोमीटर की दूरी तक 70 टन का माल लेकर उड़ान भर सकता है। 

तेजस

भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल तेजस वायुसेना के सबसे हल्के लड़ाकू विमानों में से एक है। ये विमान 1850 किमी की रफ्तार से उड़ सकता है और ये समंदर के ऊपर, राजस्थान के रेगिस्तान में कश्मीर और उत्तर-पूर्व के पर्वतीय इलाकों में भारत के सामने आने वाली हर चुनौती का माकूल जवाब देने की ताकत से लैस है। 

जगुआर

ट्विन इंजन, सिंगल सीटर वाला ये विमान एंग्लो-फ्रेंच मूल का है। जिसकी अधिकतम गति 1350 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसमें 30 एमएम की दो गन लगी हैं। यह दो आर-350 मिसाइल रखने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही इस विमान में अलग से 4750 किलोग्राम का सामान भी रखा जा सकता है। जैसे बम और इंधन आदि।

मिग-21 बाइसन

सिंगल इंजन, सिंगल सीटर वाला ये लड़ाकू विमान रूसी मूल का है। जिसे भारतीय वायुसेना के अहम विमानों में से एक माना जाता है। इसकी अधिकतम गति 2230 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसमें चार आर-60 मिसाइल के साथ 23एमएम की दो बैरल तोप रखने की क्षमता है।

मिग-27

सिंगल इंजन, सिंगल सीटर वाला ये लड़ाकू विमान रूसी मूल का है। इसकी अधिकतम गति 1700 किमी प्रतिघंटा है। इसमें 23एमएम की 6 बैरल तोप लगी हैं। इसके साथ ही इसमें 4000 किलोग्राम तक का सामान भी रखा जा सकता है।

मिग-29

ट्विन इंजन और सिंगल सीटर वाला ये लड़ाकू विमान रूसी मूल का है। इसकी अधिकतम गति 2445 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह 20 एमएम की तोप, चार आर-60  और दो आर-27 आर की मीडियम रेंज रडार मिसाइल की क्षमता रखता है।

मिराज-2000

मिराज-2000 में उन्नत एवियोनिक्स, आरडीवाई रडार और नए सेंसर और कंट्रोल सिस्टम का उपयोग करके कई निशानों को एक साथ साधना, हवा से जमीन और हवा से हवा में भी मार करने में माहिर है। यह पारंपरिक और लेजर गाइडेड बम को भी गिराने में सक्षम है। इस फ्रेंच विमान की अधिकतम गति 2495 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसमें दो 30 एमएम की तोप लगी हैं। इसमें दो मत्रा सुपर 530डी की मीडियम रेंज वाली और दो आर-550 मैजिक II की मिसाइल लगी हैं।

सुखोई-30 एमकेआई

ट्विन इंजन और ट्विन सीटर वाला ये विमान रूसी मूल का है। जिसमें 8000 किलोग्राम जीएसएफ गन लगी है। इसमें 8000 किलोग्राम अस्त्र-शस्त्र रखने की भी क्षमता है। इसमें एयर टू एयर मिसाइल की भी क्षमता है। जिनमें एक्टिव, सेमी-एक्टिव रडार और इन्फ्रा रेंज होमिंग क्लोज रेंज की मिसाइल शामिल हैं। इसकी अधिकतम गति 2500 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

राफेल

राफेल सिर्फ एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जाने में सक्षम है, वहीं इसकी मारक क्षमता करीब 3700 किलोमीटर है और यह 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। राफेल लड़ाकू विमानों की सबसे खास बात यह है कि इसमें नए दौर की दृश्य से ओझल होने में सक्षम 'मिटिअर' मिसाइल और इजराइली प्रणाली भी है।

सी-130 जे

इस लड़ाकू विमान को लैंड करने के लिए ज्यादा रनवे की जरूरत नहीं पड़ती। ये खराब मौसम में भी उड़ान भर सकता है और लैंड भी कर सकता है। इसमें 70 सैनिक सवार हो सकते हैं। इसमें 20 टन तक का सामरिक सामान रखा जा सकता है। यह भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा मालवाहक भी माना जाता है।

क्या होता है गैर सैन्य एहतियाती कार्रवाई का मतलब

Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
इंडियन आर्मी - फोटो : SELF
गैर सैन्य अचानक की गई कार्रवाई का मतलब यह है कि ऐसा हमला जो पाक की सेना या जनता पर नहीं बल्कि वहां स्थित आतंकी ठिकानों पर हुआ हो, जैसा कि आज सुबह भारतीय वायुसेना ने किया। जबकि सैन्य लक्ष्य पर हमला युद्ध के रूप में माना जाएगा।

भारत ने यह स्पष्ट किया कि यह गैर सैन्य कार्रवाई थी। यह कार्रवाई किसी तरह का बदला लेने के लिए नहीं की गई बल्कि आत्मरक्षा के लिए की गई।

 

सर्जिकल स्ट्राइक 2: क्या-क्या होता था बालाकोट आतंकी कैंप में, यहां जानिए सबकुछ

Mirage 2000, Sukhoi-30s and AWACS were part of IAF's operation in Balakot
  • जैश ए मोहम्मद के बालाकोट स्थित आतंकी कैंप पर भारतीय वायुसेना के सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तान और जैश को हैरान कर दिया। इतनी जल्द पलटवार की उम्मीद इन्हें नहीं थी। 
  • पुलवामा हमले के ठीक 12 दिन बाद ही भारत ने 40 जवानों की शहादत का बदला ले लिया। आपको बताते हैं इस आतंकी कैंप की पूरी कहानी। 
  • सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बालाकोट स्थित जैश के मोहम्मद का आतंकी कैंप पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य में कुनहर नदी के किनारे बनाया गया था। इसे आतंकियों की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, ट्रेनिंग का काम पाक सेना के रिटायर्ड फौजी होते थे। 
  • न तो पाकिस्तान की एजेंसियों को और न ही जैश को ऐसे किसी हमले का अंदाजा था। पुलवामा हमले के बाद आतंकी कैंपों को बालाकोट के 5 स्टार कैंपों में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। 350 आतंकी नींद में ही ढेर हो गए। 
  • बालाकोट कैंप का मुखिया युसूफ अजहर की सीबीआई को आईसी-814 हाइजैकिंग मामले में तलाश है। उसके खिलाफ साल 2000 में रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका है। वह जैश ए मोहम्मद के मुखिया मसूद अजह का साला है। 
  • बालाकोट कैंप जैश और दूसरे आतंकी संगठनों के लिए महत्वपूर्ण आतंकी कैंप रहा है और यहां से कई आतंकियों को ट्रेनिंग देकर आगे भेजा गया है। इस कैंप में 500 से 700 लोगों को रखा जा सकता है। यहां स्वीमिंग पूल, रसोइए की भी सुविधा है। 
  • यह कैंप बालाकोट शहर से करीब 20 किमी. दूर है और इसका इस्तेमाल आतंकियों को सख्त ट्रेनिंग देने में किया जाता है। ट्रेनिंग देने का काम पाकिस्तान सेना के रिटायर्ड अधिकारी करते हैं। मसूद अजहर और दूसरे आतंकी सरगना यहां अकसर भारत विरोधी उकसाने वाले भाषण दिया करते हैं।
  • बालाकोट शहर लाइन ऑफ कंट्रोल के पास एबोटाबाद से 80 किमी. दूर है। एबोटाबाद में ही अमेरिकी सेना ने अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान की नजरों से बचते हुए ढेर किया था।
  • इस कैंप का इस्तेमाल मसूद अजहर के रिश्तेदारों और काडर को अत्याधुनिक हथियारों के साथ ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है।
  • सूत्र बताते हैं कि जैश के आने से पहले इस कैंप का इस्तेमाल हिजबुल मुजाहिदीन किया करता था। 
  • बालाकोट कैंप में आतंकियों को दौर ए खास ट्रेनिंग दी जाती थी जहां आतंकी आधुनिक हथियारों, विस्फोटकों के साथ सुरक्षाबलों के काफिले पर हमले के तरीके सीखते थे। 
  • इसके अलावा इन्हें आईईडी बनाना, सुसाइड बम तैयार करना, विपरीत हालात में टिके रहने जैसी ट्रेनिंग दी जाती थी। 
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