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MHA: जेल में बंद गरीब कैदियों को केंद्र की सौगात, जमानत दिलाने के लिए जारी किए 20 करोड़ रुपये
Wed, 21 Feb 2024 07:50 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 21 Feb 2024 07:50 PM IST
सार
जेल में बंद गरीब कैदियों को जमानत दिलाने के लिए वित्तीय सहायता देने के लिए गृह मंत्रालय ने 20 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
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गृह मंत्रालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जेल में बंद गरीब कैदियों को जमानत दिलाने के लिए वित्तीय सहायता देने के लिए गृह मंत्रालय ने 20 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। गौरतलब है कि इसका लाभ जेल में बंद उन कैदियों को मिलेगा, जो अपनी जमानत राशि का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को लिखे पत्र में कहा कि प्रत्येक राज्य को निर्बाध धन के प्रवाह के लिए एक खाता खोलना चाहिए, ताकि ये पैसे जरूरतमंद लोगों को दिए जा सकें।
गरीब कैदियों के जारी किए 20 करोड़ रुपये की राशि
गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि मंत्रालय ने सालाना 20 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है, जिसका इस्तेमाल राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की जेलों में बंद गरीब कैदियों को जमानत दिलाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इसके सफल कार्यान्वयन के लिए राज्यों को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया था।
गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिए थे निर्देश
गृह मंत्रालय के नोटिस में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी जिलों में सशक्त समितियां और प्रदेश मुख्यालय स्तर पर निगरानी समिति का गठन करने को कहा गया था। साथ ही राज्य या केंद्रशासित प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो प्रक्रिया या दिशा-निर्देशों के बारे में कोई स्पष्टीकरण मांगने के लिए गृह मंत्रालय या केंद्रीय नोडल एजेंसी (सीएनए) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के साथ जुड़ सकता है।
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गरीब कैदियों के जारी किए 20 करोड़ रुपये की राशि
गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि मंत्रालय ने सालाना 20 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है, जिसका इस्तेमाल राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की जेलों में बंद गरीब कैदियों को जमानत दिलाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इसके सफल कार्यान्वयन के लिए राज्यों को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया था।
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गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिए थे निर्देश
गृह मंत्रालय के नोटिस में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी जिलों में सशक्त समितियां और प्रदेश मुख्यालय स्तर पर निगरानी समिति का गठन करने को कहा गया था। साथ ही राज्य या केंद्रशासित प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो प्रक्रिया या दिशा-निर्देशों के बारे में कोई स्पष्टीकरण मांगने के लिए गृह मंत्रालय या केंद्रीय नोडल एजेंसी (सीएनए) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के साथ जुड़ सकता है।
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