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उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बुलियन और सिक्कों को दायरे से बाहर रख जारी किए मसौदा नियम

Tue, 29 Jan 2019 05:44 AM IST
Gaurav Pandey पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 29 Jan 2019 05:44 AM IST
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Ministry of Consumer Affairs issued draft rules keeping bullion and coins out of the purview
सांकेतिक तस्वीर

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग करने के लिए नियमों का मसौदा जारी किया है। इसमें दो ग्राम से ऊपर के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की अनिवार्यता को लागू करने को कहा गया है। बुलियन और सिक्कों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। साथ ही 14, 18 और 22 कैरेट सोने के आभूषणों की गुणवत्ता का निर्धारण किया गया है, जबकि इतर गुणवत्ता होने यानी 15, 16, 17 या 19 कैरेट पर आभूषण मान्य नहीं होगा।

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केंद्रीय मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे में कहा गया है कि चिकित्सा, दंत चिकित्सा और उद्योग क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली चीजों को अनिवार्य हॉलमार्किंग से छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा सोने के पतले धागे, निर्माणाधीन आभूषणों, निर्यात किए जाने वाले सोने, बुलियन और सिक्कों को भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है। 
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मसौदा नियमों का अनुपालन नहीं करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अधिनियमों के तहत उल्लंघनकर्ता पर लगाया जाएगा। अभी तक देश में स्वर्ण आभूषणों में सोने की गुणवत्ता को लेकर कोई कसावट नहीं है। ऐसे में अनजान ग्राहकों को कई मौकों पर 22 कैरेट की बजाय 21 या अन्य अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों से कम कैरेट का सोना बेच दिया जाता है। जबकि दाम उनसे अच्छी गुणवत्ता वाले सोने यानी कैरेट के वसूले जाते हैं। 

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ग्राहकों के लिए अहम साबित होगा मसौदा

ऐसे में गुणवत्ता को लेकर मंत्रालय द्वारा मसौदे में प्रस्तावित नियम ग्राहकों को लिए अहम होगा। इसके तहत गुणवत्ता के तीन स्तर होंगे 14, 18 और 22 कैरेट। इससे इतर गुणवत्ता मान्य नहीं होगी। मसौदा नियमों में कहा गया है कि बीआईएस इस व्यवस्था को लागू कराने वाला प्राधिकार होगा और इसके लिए हॉलमार्किंग केंद्र स्थापित करने संबंधी प्रमाणन भी उसके द्वारा दिया जाएगा। 

साथ ही स्पष्ट किया गया है कि मंत्रालय या राज्य द्वारा संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी ही व्यवस्था को लागू कराने के लिए जिम्मेदार होंगे। मंत्रालय ने मसौदा नियमों पर विभिन्न हिस्सेदारों से राय मांगी है। सभी के सुझाव मिलने के बाद नियमों को लागू कराने की तैयारी की जाएगी। हाल ही में केंद्रीय मंत्रालय ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को अनिवार्य हॉलमार्किंग का प्रस्ताव भेजा था। साथ ही केंद्रीय मंत्रालयों समेत सभी हिस्सेदारों के साथ फरवरी मध्य में बैठक बुलाई है। देश में मौजूदा समय में 750 हॉलमार्किंग केंद्र हैं। इनकी संख्या को बढ़ाने पर भी मंत्रालय चर्चा कर रहा है।

मौजूदा संशोधित नियमों के तहत पंजीकरण कराने पर स्वर्णकारों को एक प्रमाणपत्र अगले पांच साल तक के लिए मुहैया कराने का प्रावधान है जिसके लिए 2000 रुपये की फीस चुकानी होती है। इसके अलावा हरेक पंजीकृत स्वर्णकार को सभी हॉलमार्किंग आभूषण का रिकॉर्ड रखना होगा। हॉलमार्किंग के सही न होने की स्थिति में उन्हें पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा। 

यह होगा शुल्क

मौजूदा नियमों में हॉलमार्किंग केंद्र खोलने के लिए स्वर्णकारों को 10000 रुपये का शुल्क देना होगा। यह केंद्र हरेक आभूषण पर 35 रुपये का शुल्क लेता है। अगर किसी स्वर्णकार का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा तो उसे साढ़े सात हजार फीस भरनी होती है। गोल्ड रिफाइनरी को भी लाइसेंस लेना होता है, जिसका शुल्क एक हजार रुपये है।

गौरतलब है कि मंत्रालय का मानना है कि सोने का बाजार देश में बहुत बड़ा है और आम तौर पर उपभोक्ता के पास सोने की सही परख का कोई साधन नहीं होता। ऐसे में अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था मील का पत्थर साबित होगी।

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