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अब फसलों पर नहीं पड़ेगी मौसम की मार, सरकार ने नुकसान से बचाने के लिए बनाई योजना
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
Updated Wed, 31 Oct 2018 07:46 AM IST
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crops damage
- फोटो : Social Media
लगातार बदलते पर्यावरण के कारण फसलों को होने वाले नुकसान से परेशान किसानों के लिए राहत की बात है। कृषि मंत्रालय ने मौसम की मार से फसलों को बचाने और किसानों को राहत देने के लिए योजना बनाई है।
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योजना के तहत देश के सर्वाधिक प्रभावित 151 जिलों में अध्ययन कर फसलों को सूखा, अति वृष्टि, ओला वृष्टि, चक्रवात, भीषण गर्मी और शीतलहर से बचाने के उपाय निकाले गए हैं। साथ ही इसमें यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि बदलते पर्यावरण के कारण फसलों पर मौसम की मार न पड़े। मंत्रालय अब इन उपायों को पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है।
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मंत्रालय का अहम कदम
संसद की कृषि परामर्शदाता समिति 1 नवंबर को इसकी रूपरेखा पर अंतिम बैठक करने वाली है। वहां से हरी झंडी मिलते ही इसे लागू किया जाएगा। कृषि मंत्रालय ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के विभागों के संयुक्त प्रयासों से यह योजना तैयार की है। पर्यावरण में लगातार हो रहे बदलाव के मद्देनजर इसे अहम कदम माना जा रहा है।
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किसानों को दी जाएगी ट्रेनिंग
दरअसल, कृषि मंत्रालय ने 28 राज्यों और एक केंद्र शासित राज्य से चुने गए 151 जिलों में लगातार बदलते पर्यावरण की मार से फसलों को बचाने का कृषि विज्ञान केंद्रों और 11 कृषि तकनीक शोध संस्थानों द्वारा अध्ययन कराकर रूपरेखा तैयार की है।
इस अध्ययन में लुधियाना, जोधपुर, कानपुर, पटना, कोलकाता, बारापानी, पुणे, जबलपुर, हैदराबाद और बंगलूरू जैसे शहरों के आसपास स्थित ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है। कृषि मंत्रालय के एजेंडे के मुताबिक, देशभर में स्थित 121 कृषि विज्ञान केंद्रों पर किसानों को फसलों के बचाने के उपायों की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही उन्हें प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
फसलों को बचाने के चार मॉड्यूल
कृषि मंत्रालय ने अपने एजेंडे में फसलों को बचाने के लिए चार मॉड्यूल को शामिल किया है। इनमें पहला और सबसे प्रमुख प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन है, जिनमें आर्टिफिशियल ग्राउंड वाटर रिचार्ज, जीरो टिलेज और बाढ़ वाले क्षेत्रों में नालियों को बेहतर किए जाने जैसे उपाय शामिल हैं।
वहीं, दूसरा उत्पादन के दौरान तापमान के मुताबिक फसलों के बचाव के लिए कदम उठाना है। किसान इसके लिए कस्टम हायरिंग केंद्रों (किराये पर उपकरण देने वाले) से भी सहायता ले सकते हैं। वहीं, दो अन्य मॉड्यूल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लॉक स्तर पर समय से मौसम की जानकारी पहुंचाना भी शामिल है ताकि किसान उसके मुताबिक फसलों के बचान के लिए कदम उठा सकें।