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लोकसभा की कार्यवाही से मंत्री गायब: मांझी और करंदलाजे ने सरकार की कराई किरकिरी, बिरला बोले- यह स्वीकार नहीं

Fri, 03 Apr 2026 05:00 AM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Fri, 03 Apr 2026 05:00 AM IST
सार

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान उस वक्त असहज स्थिति बन गई जब एमएसएमई मंत्रालय से जुड़े मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। सवाल पूछे जाने पर जवाब देने वाला कोई नहीं मिला, जिससे स्पीकर हतप्रभ रह गए। उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संसदीय कार्य मंत्री को इसे गंभीरता से नोट करने को कहा। स्पीकर ने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

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Ministers Absent from Lok Sabha Manjhi and Karandlaje Cause Embarrassment for the Government News In Hindi
संसद की फाइल तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

लोकसभा में बृहस्पतिवार को प्रश्नकाल के दौरान एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी और राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सरकार की किरकिरी करा दी। दरअसल सवाल पूछने के क्रम में जब इनके मंत्रालय की बारी आई तो दोनों मंत्री सदन से नदारद थे। इस स्थिति से हतप्रभ स्पीकर ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति को किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। दरअसल प्रश्नकाल के दौरान जब इस मंत्रालय का नंबर आया तो टीएमसी सांसद ने परंपरा के अनुसार प्रश्न क्रमांक पढ़ा। स्पीकर ने तब जवाब देने के लिए मंत्री का नाम पुकारा। कोई आवाज नहीं आने पर उन्होंने दोबारा आवाज लगाई।

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फिर पूछा कि इनके मंत्रालय के राज्य मंत्री कौन हैं? पता चला कि करंदलाजे भी सदन में मौजूद नहीं है। फिर स्पीकर बुरी तरह से  भड़क गए। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि इसे नोट करें। यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसा कभी न हो। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी दौरान स्पीकर ने सदन के अंदर लगातार हो रही बातचीत पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सदन में सदस्यों की आधे-आधे घंटे तक बातचीत की परंपरा बनती जा रही है। जब सदन में कार्यवाही जारी हो, तब ऐसी स्थिति अस्वीकार्य है। भविष्य में जो सदस्य ऐसा करेंगे, आसन से उनका नाम लिया जाएगा।
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पप्पू यादव को भी लगी फटकार
प्रश्नकाल के दौरान स्पीकर ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी कड़ी फटकार लगाते हुए संसदीय परंपरा और आसन का सम्मान करने की नसीहत दी। दरअसल यादव इस दौरान आसन की ओर पीठ किए लंबे समय से खड़े थे। स्पीकर ने कहा कि आप इतने वरिष्ठ सदस्य हैं, क्या आपको भी संसदीय नियम, परंपरा की जानकारी नहीं है।


कभी दूरी तो कभी नजदीकी के नाम रहा बजट सत्र
बजट सत्र का दूसरा चरण सरकार और विपक्ष के बीच कभी दूरी तो कभी नजदीकी के नाम रहा। सबसे अधिक चर्चा विपक्ष के लोकसभा स्पीकर को हटाने संबंधी प्रस्ताव और अंतिम समय में सरकार द्वारा महिला आरक्षण के दाव को लेकर रही। सहमति के अभाव में सरकार को गैर सरकारी संगठनों पर नकेल डालने वाले विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक पर पीछे हटना पड़ा। हालांकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और दिवालियापन एवं दिवालिया संहिता संशोधन विधेयक पारित कराने में सफलता हाथ लगी। 

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इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के दूरी बढ़ने के संकेत
लोकसभा स्पीकर को हटाने संबंधी प्रस्ताव पर दो दिनों तक चली चर्चा के बाद सरकार और विपक्ष के बीच दूरी बढ़ने के संकेत मिले। विपक्ष का प्रस्ताव गिरने के अगले ही दिन सत्र के प्रथम चरण में विपक्ष के निलंबित 8 सांसदों का निलंबन खत्म करने पर सहमति बनी। पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न ऊर्जा और उर्वरक संकट पर भी तीखी तकरार की जमीन तैयार हुई, मगर पीएम मोदी के दोनों सदनों में संबोधन और सर्वदलीय बैठक के बाद स्थिति नियंत्रण में रही। स्पीकर के बाद विपक्ष के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। विपक्ष ने उन्हें हटाने के लिए संसदीय इतिहास में पहली बार महाभियोग का नोटिस दिया। जो बाद में गिर गया।

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