{"_id":"5a69f2974f1c1b83268b676d","slug":"minister-giriraj-singh-said-definition-of-minorities-should-be-changed-muslims-are-not-minority","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बोले- अल्पसंख्यक की परिभाषा बदली जाए, मुस्लिम इस श्रेणी से बाहर हों","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बोले- अल्पसंख्यक की परिभाषा बदली जाए, मुस्लिम इस श्रेणी से बाहर हों
संजय मिश्र, नई दिल्ली
Updated Thu, 25 Jan 2018 08:45 PM IST
विज्ञापन
गिरिराज सिंह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्पसंख्यक आयोग खत्म करने की संघ की पुरानी मांग को नए क्लेवर में पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने अल्पसंख्यक की परिभाषा को दोबारा से परिभाषित किए जाने की आवश्यक्ता बताई है। गिरिराज सिंह ने कहा है कि संविधान में अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में मुस्लिमों की संख्या जब 4-5 प्रतिशत थी। तब उन्हें अल्पसंख्यक माना गया। जबकि उनकी आबादी बढ़कर कर अब करीब 20 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी अल्पसंख्यक कैसे मानी जाएगी। इसलिए अल्पसंख्यक की परिभाषा को बदलने की जरूरत है।
गिरिराज सिंह के अनुसार जनसंख्या के लिहाज से देखें तो महज जैन, सिख और पारसी ही वास्तव में इस देश में अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक की परिभाषा से बाहर लाना चाहिए। अल्पसंख्यक के नाम पर महज मुस्लिम ही लाभ उठा रहे हैं। गिरिराज का यहां तक मानना है कि जिन राजनीतिक दलों ने अपने यहां अल्पसंख्यक मोर्चा का गठन किया है, उसे खत्म कर देना चाहिए।
देवरस के जमाने से संघ की रही है अल्पसंख्यक आयोग खत्म करने की मांग
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अल्पसंख्यकों की परिभाषा पर पुनर्विचार करने की मांग कर मामले को बेशक दोबरा से गर्माने की कोशिश की है। मगर संघ के तृतीय सर संघ चालक बाला साहब देवरस के समय से ही भगवा परिवार की ओर से ऐसी मांग उठती रही है। देवरस के संघ प्रमुख रहते हुए संघ की ओर से इस बात के न सिर्फ प्रस्ताव पारित किए गए। बल्कि आंदोलन भी किए गए कि अल्पसंख्यक आयोग खत्म किया जाना चाहिए। संघ का मानना है कि देश में जब मानवाधिकार आयोग है तो अल्पसंख्यक आयोग की जरूरत ही नहीं है।
विज्ञापन
संघ यह भी मानता है कि संविधान के मूल में अल्पसंख्यक शब्द की चर्चा नहीं है। राजनीतिक लाभ के मकसद से इस शब्द को बाद में जोड़ा गया है। इसलिए संघ की ओर से पूरे संविधान को ही दोबारा से परिभाषित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। इस मांग को केंद्रीय मंत्री ने नए अंदाज में पेश किया है। चंद महीने पहले भी विश्व हिन्दू परिषद की ओर से अल्पसंख्यक आयोग को खत्म करने की मांग सरकार के सामने रखी गई है।
विज्ञापन
गिरिराज सिंह के अनुसार जनसंख्या के लिहाज से देखें तो महज जैन, सिख और पारसी ही वास्तव में इस देश में अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक की परिभाषा से बाहर लाना चाहिए। अल्पसंख्यक के नाम पर महज मुस्लिम ही लाभ उठा रहे हैं। गिरिराज का यहां तक मानना है कि जिन राजनीतिक दलों ने अपने यहां अल्पसंख्यक मोर्चा का गठन किया है, उसे खत्म कर देना चाहिए।
विज्ञापन
देवरस के जमाने से संघ की रही है अल्पसंख्यक आयोग खत्म करने की मांग
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अल्पसंख्यकों की परिभाषा पर पुनर्विचार करने की मांग कर मामले को बेशक दोबरा से गर्माने की कोशिश की है। मगर संघ के तृतीय सर संघ चालक बाला साहब देवरस के समय से ही भगवा परिवार की ओर से ऐसी मांग उठती रही है। देवरस के संघ प्रमुख रहते हुए संघ की ओर से इस बात के न सिर्फ प्रस्ताव पारित किए गए। बल्कि आंदोलन भी किए गए कि अल्पसंख्यक आयोग खत्म किया जाना चाहिए। संघ का मानना है कि देश में जब मानवाधिकार आयोग है तो अल्पसंख्यक आयोग की जरूरत ही नहीं है।
विज्ञापन
संघ यह भी मानता है कि संविधान के मूल में अल्पसंख्यक शब्द की चर्चा नहीं है। राजनीतिक लाभ के मकसद से इस शब्द को बाद में जोड़ा गया है। इसलिए संघ की ओर से पूरे संविधान को ही दोबारा से परिभाषित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। इस मांग को केंद्रीय मंत्री ने नए अंदाज में पेश किया है। चंद महीने पहले भी विश्व हिन्दू परिषद की ओर से अल्पसंख्यक आयोग को खत्म करने की मांग सरकार के सामने रखी गई है।