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Mining Lease Row: हेमंत सोरेन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई, खनन लीज का मामला
Fri, 12 Aug 2022 09:14 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 12 Aug 2022 09:14 PM IST
सार
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस साल फरवरी में दावा किया था कि सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग किया और खुद को खनन पट्टा आवंटित किया।
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CM HEMANT SOREN
- फोटो : social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अलग-अलग याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा। राज्य के खनन मंत्री के रूप में खुद को खनन पट्टा देने का यह मामला न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस आर भट की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि यह एक प्रेरित जनहित याचिका (पीआईएल) है जिसे फेंक दिया जाना चाहिए।
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सोरेन पर खनन पट्टा लेने का आरोप
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका की एक प्रति और पक्षों द्वारा आदान-प्रदान की गई दलीलों को रिकॉर्ड में रखा जाए। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस साल फरवरी में दावा किया था कि सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग किया और खुद को खनन पट्टा आवंटित किया, यह एक ऐसा मुद्दा है जिसमें हितों के टकराव और भ्रष्टाचार दोनों शामिल हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। विवाद का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने मई में सोरेन को एक नोटिस भेजकर खनन पट्टे पर उनका पक्ष मांगा था।
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चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा था कि पट्टे का स्वामित्व जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए का उल्लंघन करता है, जो सरकारी अनुबंधों आदि के लिए अयोग्यता से संबंधित है। यह मामला अभी भी चुनाव आयोग के पास लंबित है। झारखंड हाई कोर्ट के समक्ष याचिका में खनन पट्टा देने में कथित अनियमितताओं और मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से कथित रूप से जुड़ी कुछ मुखौटा कंपनियों के लेनदेन की जांच की मांग की गई थी। अदालत ने तीन जून को कहा था कि उसकी राय है कि रिट याचिकाओं को विचारणीयता के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है और वह योग्यता के आधार पर मामलों की सुनवाई करेगा।
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सोरेन के वकीलों ने दी दलील
वहीं, हेमंत सोरेन की कानूनी टीम ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के समक्ष एक अयोग्यता याचिका में अपनी दलीलें पूरी कीं, जिसमें उन पर खुद को खनन पट्टे का विस्तार देने का आरोप लगाया गया है। सीएम के वकीलों ने दलील दी कि चुनाव कानून का प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होता है। हालांकि, सोरेन की दलीलों के जवाब में भाजपा (मामले में याचिकाकर्ता) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की एक श्रृंखला का हवाला दिया, जो हितों के टकराव का मामला है।
हेमंत सोरेन के वकील ने दलीलों के दौरान कहा कि मामले जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 ए के तहत शामिल नहीं हैं। उन्होंने लगभग दो घंटे तक बहस की। भाजपा के वकील कुमार हर्ष ने चुनाव आयोग की सुनवाई के बाद संवाददाताओं से कहा कि हमने बताया कि यह हितों के टकराव का मामला है और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं जो इसे कवर करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के लिखित बयान के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की है। हर्ष ने कहा कि हमें उम्मीद है कि फैसला जल्द ही सुनाया जाएगा।