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Indian Army: निम्न चिकित्सा श्रेणी के अधिकारियों के लिए बड़ी राहत, ट्रिब्यूनल ने दी प्रमोशन को हरी झंडी
Wed, 21 Sep 2022 09:04 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 21 Sep 2022 09:04 PM IST
सार
इनकी उत्कृष्ट सेवा के रिकॉर्ड के आधार पर मार्च 2021 में चयन बोर्ड ने इन अधिकारियों को पदोन्नति के लिए फिट पाया था, लेकिन विशेष समीक्षा मेडिकल बोर्ड ने इसे नहीं माना।
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Armed forces trubunal
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय सेना के निम्न चिकित्सा श्रेणी के अधिकारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने बुधवार को सेना के विशेष मेडिकल बोर्ड की कार्यवाही को रद्द कर दिया, जिसने इन्हें सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) की सलाह पर पदोन्नति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की मुख्य पीठ ने कर्नल और लेफ्टिनेंट कर्नल के रैंक के सेना अधिकारियों द्वारा ब्रिगेडियर और कर्नल के पद पर पदोन्नति की मांग करने वाली 17 याचिकाओं सामूहिक याचिका पर फैसला सुनाया। ये याचिकाकर्ता निम्न चिकित्सा श्रेणी में हैं जिन्हें 9000 फीट से ऊपर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जाता है। इसी कारण इन्हें पदोन्नति योग्य नहीं माना गया था।
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एसआरएमबी ने अधिकारियों की पदोन्नति रोकी
इनकी उत्कृष्ट सेवा के रिकॉर्ड के आधार पर मार्च 2021 में आयोजित एक विधिवत गठित चयन बोर्ड ने इन अधिकारियों को पदोन्नति के लिए फिट पाया था, लेकिन विशेष समीक्षा मेडिकल बोर्ड (SRMB) ने जून 2021 में मनमाने ढंग से घोषित किया कि वे पदोन्नति के लिए अयोग्य हैं। एसआरएमबी का फैसला मुख्य रूप से तत्कालीन डीएमए द्वारा लिखे गए एक नोट पर आधारित था, जिसमें सेना को मौजूदा नीति के तहत उनकी पदोन्नति योग्य चिकित्सा श्रेणी के बावजूद निम्न चिकित्सा श्रेणी के अधिकारियों को बढ़ावा नहीं देने की सलाह दी गई थी। इन अधिकारियों को पदोन्नति के लिए अयोग्य घोषित करते समय एसआरएमबी ने कोई कारण नहीं बताया।
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नए एसआरएमबी का पुनर्गठन करने की मांग
साल 2021 तक समान पदोन्नति योग्य चिकित्सा श्रेणी के अधिकारियों को शायद ही कभी पदोन्नति से वंचित किया जाता था अगर उन्हें पहले से ही संबंधित चयन बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया गया हो। आज दिए गए फैसले से ट्रिब्यूनल ने एसआरएमबी कार्यवाही को अलग कर दिया, जिसके तहत इन 17 अधिकारियों को पदोन्नति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। ट्रिब्यूनल ने सेना को निर्देश दिया कि वे नीति के आधार पर अपने मामलों पर पुनर्विचार करने के लिए एक नए एसआरएमबी का पुनर्गठन करें, जो 2020 तक लागू था।
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ट्रिब्यूनल ने आगे निर्देश दिया कि पदोन्नति के लिए इन अधिकारियों पर पुनर्विचार करते समय एसआरएमबी को पदोन्नति के लिए वर्ष 2020 तक पालन की जाने वाली नीति माननी होगी। कर्नल सिंह ने कहा कि ट्रिब्यूनल का फैसला अधिकारियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है।