401 आईएएस की ये कैसी ट्रेनिंग, जिसके लिए दिलानी पड़ी नौ साल पुराने आदेश की याद, ऐसे अफसर हुए ट्रेनिंग से बाहर
साल 2007 में यह व्यवस्था बनाई गई थी कि मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम अटैंड करना सभी अधिकारियों के लिए जरूरी होगा। इसका मकसद अधिकारी को अगले स्तर पर काम करने में सक्षम बनाना है। इसी ट्रेनिंग के आधार पर जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड, सुपर टाइम स्केल और इंक्रीमेंट तय होता है...
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केंद्र सरकार को अपने सीनियर आईएएस अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। ये कोर्स भी अहम है। इसी आधार पर अधिकारियों के प्रमोशन, वेतनमान और करियर समेत दूसरे फायदे टिके हैं। मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम यानी 'एमसीटीपी' के तहत अगस्त में होने वाली 25 दिन की ट्रेनिंग के लिए विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों को नौ साल पुराने एक आदेश की याद दिलानी पड़ रही है। वह आदेश डीओपीटी के तत्कालीन सचिव पीके मिश्रा ने जारी किया था। उसमें लिखा था कि केंद्रीय मंत्रालय, विभाग या राज्य सरकारें आईएएस अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए रिलीव नहीं करती। इससे उनके करियर पर असर पड़ता है। इस बार 15वें राउंड की ट्रेनिंग का चौथा चरण है, जो अनिवार्य है। डीओपीटी ने उन अफसरों को ट्रेनिंग में शामिल नहीं किया है, जो 31 दिसंबर 2024 को रिटायर हो रहे हैं।
भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय के सचिव द्वारा उक्त आदेश जारी किए गए हैं। साल 2007 में यह व्यवस्था बनाई गई थी कि मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम अटैंड करना सभी अधिकारियों के लिए जरूरी होगा। इसका मकसद अधिकारी को अगले स्तर पर काम करने में सक्षम बनाना है। इसी ट्रेनिंग के आधार पर जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड, सुपर टाइम स्केल और इंक्रीमेंट तय होता है। कई बार यह देखा गया है कि कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी द्वारा संबंधित अधिकारी को ट्रेनिंग अटैंड करने के लिए रिलीव नहीं किया जाता। इसके पीछे प्रशासनिक जिम्मेदारी या कोई दूसरा कारण बता दिया जाता है। इस ट्रेनिंग के बिना अधिकारियों को करियर के दौरान मिलने वाले फायदों से वंचित रहना पड़ता है। इनमें आर्थिक और परमोशन से जुड़े, दोनों फायदे शामिल हैं।
मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम, दो अगस्त से लेकर 27 अगस्त तक मसूरी में शुरू हो रहा है। इसमें 1994 से लेकर 2006 के बीच सेवा में आए आईएएस को शामिल किया गया है। साल 2004 से 2006 बैच वाले आईएएस ट्रेनिंग के पहले चांस में रहेंगे। ऐसे अधिकारी जो 2004 में आईएएस बने थे, उनका दूसरा चांस रहेगा। साल 2003 बैच वालों का तीसरा चांस और 1994 से 2002 के बीच वाले आईएएस का चांस केस टू केस आधार पर तय होगा। चूंकि ट्रेनिंग के लिए देश और विदेश से फैकल्टी बुलानी पड़ती हैं, इसलिए सभी 401 अधिकारियों को दो जुलाई तक आवेदन करना है। अगर किसी आईएएस के सामने कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी कोई दिक्कत खड़ी कर रहा है तो वह डीओपीटी को सूचित कर सकता है। फेज-4 की यह ट्रेनिंग सभी अधिकारियों के लिए अनिवार्य है। डीओपीटी ने इस बार केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों और राज्यों के मुख्यसचिवों को जो पत्र भेजा है, उसके साथ एक फ़रवरी 2012 को लिखा पत्र अटैच किया गया है।