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आकाशगंगा में पहली बार मिला 'माइक्रोब्लेजर': ब्लैक होल से निकल रहे प्रकाश की रफ्तार के करीब जेट, जानें कैसे खोज

Sat, 26 Sep 2026 10:46 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला नेटवर्क, लंदन।
अमर उजाला नेटवर्क, लंदन। Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 26 Sep 2026 10:46 PM IST
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‘Microblazar’ Discovered in the Milky Way for the First Time: Jet Moving at Nearly the Speed of Light
ब्लैक होल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

हमारी आकाशगंगा में खगोलविदों ने पहली बार एक ऐसे माइक्रोब्लेजर की पहचान की है, जिसे ब्लैक होल संचालित कर रहा है। यह ब्लैक होल अपने साथी विशाल तारे से पदार्थ खींच रहा है और उसके ध्रुवों से प्लाज्मा के दो बेहद शक्तिशाली जेट अंतरिक्ष में फेंक रहा है। इन जेट की गति प्रकाश की गति के बेहद करीब है। यह प्रणाली पृथ्वी से करीब 12,000 प्रकाशवर्ष दूर है और लंबे समय तक गैस तथा धूल की मोटी परत के पीछे छिपी रही।

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स्पेस डेली की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रणाली का नाम आईआरएएस 18293−0941 है। स्पेन के यूनिवर्सिटी ऑफ जाएन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने यूरोपीय वीएलबीआई नेटवर्क और दक्षिण अफ्रीका की मीरकैट रेडियो वेधशाला सहित कई रेडियो दूरबीनों की मदद से इसके जेट की पहचान और दिशा की पुष्टि की। शोध को एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है।
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आखिर माइक्रोब्लेजर होता क्या है?
नाम भले ही रहस्यमय लगे, लेकिन इसे समझना मुश्किल नहीं है। अंतरिक्ष में कुछ बेहद सक्रिय विशालकाय ब्लैक होल अपने आसपास के पदार्थ को तेजी से खींचते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान उनके ध्रुवों से पदार्थ के शक्तिशाली जेट निकलते हैं। जब ऐसे जेट लगभग सीधे पृथ्वी की दिशा में दिखाई देते हैं, तो उनसे जुड़ी प्रणाली को ब्लेजर कहा जाता है।ब्लेजर आम तौर पर किसी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद अति विशाल ब्लैक होल से जुड़े होते हैं, जिनका द्रव्यमान सूर्य से करोड़ों या अरबों गुना अधिक हो सकता है।माइक्रोब्लेजर इसी प्रक्रिया का छोटा रूप है। इसमें केंद्रीय वस्तु कोई अति विशाल ब्लैक होल नहीं, बल्कि तारकीय द्रव्यमान वाला ब्लैक होल होता है। उसका द्रव्यमान सूर्य से कुछ गुना से लेकर कुछ सौ गुना तक हो सकता है।
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11.4 दिन में सामने आया बड़ा सुराग
वैज्ञानिकों को इस प्रणाली का पहला संकेत तब मिला, जब उन्होंने इसके साथी तारे की चमक में नियमित उतार-चढ़ाव देखा। इस बदलाव से पता चला कि तारा और ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हैं और एक चक्कर पूरा करने में करीब 11.4 दिन लगते हैं।दिलचस्प बात यह थी कि वैज्ञानिक इस प्रणाली को लगभग सामने से देख रहे थे। बाद में रेडियो तरंगों में किए गए अवलोकनों से एक जेट दिखाई दिया। दूसरा जेट सीधे हमसे दूर जा रहा था, इसलिए वह उसी तरह दिखाई नहीं दिया।

वर्षों से आंखों के सामने था, फिर भी नहीं दिखा
इस खोज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह प्रणाली नई पैदा नहीं हुई है। इसे दशकों पहले दर्ज किया जा चुका था, लेकिन वैज्ञानिक इसके असली स्वरूप को पहचान नहीं पाए थे।कारण था,इसके सामने मौजूद गैस और धूल की बेहद मोटी परत। दृश्य प्रकाश में यह क्षेत्र लगभग अदृश्य हो जाता है। वैज्ञानिक जोसेप मार्ती के मुताबिक यह वस्तु लंबे समय तक सबकी नजरों के सामने होते हुए भी छिपी रही।रेडियो तरंगों ने यहां वैज्ञानिकों की मदद की। वे अंतरिक्ष में मौजूद धूल और गैस को पार कर ऐसी चीजों की जानकारी दे सकती हैं, जिन्हें सामान्य दूरबीनों से देखना बेहद मुश्किल होता है।

जेट ने बनाया 100 प्रकाशवर्ष का बुलबुला
इस खोज का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा तब सामने आया, जब वैज्ञानिकों ने मीरकैट रेडियो वेधशाला से इस क्षेत्र का अध्ययन किया।उन्हें करीब 100 प्रकाशवर्ष चौड़ा एक विशाल बुलबुला दिखाई दिया। माना जाता है कि ब्लैक होल से निकलने वाला जेट आसपास मौजूद अंतरतारकीय गैस और धूल से टकरा रहा है। इस टक्कर से पदार्थ गर्म हो रहा है और कणों को अत्यधिक ऊर्जा मिल रही है।बुलबुले के एक किनारे पर वैज्ञानिकों को एक गर्म क्षेत्र यानी हॉटस्पॉट भी मिला। यहां जेट और आसपास के पदार्थ की टक्कर इतनी शक्तिशाली है कि हाइड्रोजन गैस चमकने लगती है।

धरती के सबसे शक्तिशाली कण से भी ज्यादा ऊर्जा
इस खोज का सबसे रोमांचक पहलू जेट से निकलने वाली ऊर्जा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह जेट सूर्य द्वारा विकिरित ऊर्जा से करीब 500,000 गुना अधिक ऊर्जा ले जा रहा है।यही प्रक्रिया अत्यधिक ऊर्जा वाले कणों को गति देने में सक्षम है। इस प्रणाली से जुड़े क्षेत्र से ऐसी गामा किरणों का भी पता चला है, जिनके प्रत्येक फोटॉन में पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली कण त्वरक लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में तेज किए गए कणों से करीब 10 गुना अधिक ऊर्जा बताई गई है।वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को बेहद सरल तरीके से समझाया है,जेट कणों को गति देता है और आसपास का गैस-बादल उस ऊर्जा को चमक के रूप में दिखाता है। त्वरक वह मशीन होती है जिसमें बहुत छोटे कणों, जैसे प्रोटॉन या इलेक्ट्रॉन, को अत्यधिक तेज गति दी जाती है।


ब्लैक होल को समझने की नई प्रयोगशाला
वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अपेक्षाकृत हमारी आकाशगंगा के भीतर मौजूद एक ऐसा प्राकृतिक प्रयोग उपलब्ध कराती है, जहां ब्लैक होल और उसके जेट का अध्ययन करीब से किया जा सकता है।दूर की आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद विशाल ब्लैक होल से निकलने वाले जेट का अध्ययन करना मुश्किल होता है। इसके मुकाबले आईआरएएस 18293−0941 हमारी आकाशगंगा में है और इसलिए इसके आसपास की प्रक्रिया का अधिक विस्तार से अध्ययन किया जा सकता है।इससे वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर सकेंगे कि ब्लैक होल अपने आसपास के अंतरिक्ष में ऊर्जा कैसे पहुंचाते हैं और किस तरह अत्यधिक ऊर्जावान कणों का निर्माण होता है।यानी 12,000 प्रकाशवर्ष दूर छिपा यह छोटा-सा ब्लैक होल सिर्फ एक नई खगोलीय वस्तु की खोज नहीं है। यह वैज्ञानिकों के लिए यह समझने का एक नया रास्ता है कि ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक कण त्वरक आखिर काम कैसे करते हैं।

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