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मतदाता सूची से नाम हटाने के नोटिस पर ईसी का बड़ा फैसला: घर पहुंचेंगे बीएलओ, दावे-आपत्तियों के लिए बढ़ी समयसीमा

Sat, 26 Sep 2026 09:07 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 26 Sep 2026 09:07 PM IST
सार

 मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी विवाद के बीच शनिवार को पहली बार तीनों चुनाव आयुक्तों की अहम बैठक हुई। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए।

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EC's new initiative regarding notices for name removal from the electoral roll: BLOs to visit homes
चुनाव आयोग की शनिवार को अहम बैठक हुई। - फोटो : एक्स

विस्तार

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सामने आई समस्याओं को लेकर निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कई अहम कदमों की घोषणा की। आयोग ने नाम हटाने के नोटिस का सामना कर रहे लोगों के लिए दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाने के साथ घर पर दस्तावेज जुटाने और मदद के लिए विशेष सहायता केंद्र व शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं।

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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्वाचन आयुक्त डॉ. एसएस संधू और विवेक जोशी भी मौजूद रहे। आयोग ने बताया कि अब बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) उन लोगों के घर जाएंगे, जिनका मामला मतदाता सूची से जुड़ा नहीं है या जिनके विवरण में तार्किक विसंगतियां हैं। बीएलओ दस्तावेज जुटाकर उन्हें आयोग के एकीकृत पोर्टल ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे।
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निर्वाचन कार्यालय में जाना जरूरी नहीं
आयोग ने कहा कि अब निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए जाना जरूरी नहीं होगा। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई होगी। ऐसी सुनवाई भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की कोशिश की जाएगी। मतदाता की ओर से अधिकृत परिवार का सदस्य भी उसकी तरफ से सुनवाई में शामिल हो सकेगा। आयोग ने कहा कि ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा को भी मजबूत किया जा रहा है।
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जरूरत के मुताबिक सहायता केंद्र और विशेष शिविर
निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र बनाने और विशेष शिविर लगाने का निर्देश दिया है। इनकी सुविधा रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी। आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई बदलाव किए गए हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों को आगे किसी अतिरिक्त सुविधा की जरूरत महसूस होती है तो उसे भी लागू किया जाएगा।

दिल्ली में 30 अक्तूबर तक दाखिल कर सकेंगे दावे-आपत्तियां
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाकर 30 अक्तूबर कर दी गई है। इनके साथ नोटिस के निपटारे की समयसीमा भी बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। महाराष्ट्र में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्तूबर तक बढ़ाई गई है। इनके निपटारे की अवधि 10 नवंबर तक कर दी गई है।

एसआईआर पूरा कर चुके 20 राज्यों में भी नाम जुड़वाने का मौका
निर्वाचन आयोग ने कहा कि जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर पूरा हो चुका है, उनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। एसआईआर के दौरान या उसके बाद जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं रह गया है, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग के मुताबिक युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे लोगों की मदद करने और उनके नाम जोड़ने के लिए तत्काल विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।

गोवा में घर-घर जाकर फॉर्म जुटाएंगे बीएलओ
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ स्तर के अधिकारियों को मतदाता सूची से छूटे लोगों के घर-घर जाकर उनके फॉर्म जुटाने का निर्देश दिया है। आयोग के अनुसार, राज्य में 97 में से 81 मतदाता पहले ही नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर चुके हैं।

'एसआईआर पर सर्वसम्मति से हुआ था फैसला' 
तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) समेत सभी अहम फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। तीनों अधिकारियों ने निर्वाचन सदन में बैठक करते हुए एसआईआर, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े सवालों पर नोट जारी कर कहा कि घोषित फैसलों को पूरे आयोग की  सर्वसम्मति थी। 

तीनों आयुक्तों की तस्वीर के साथ जारी यह नोट 23 सितंबर की उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें बताया गया था कि संधू और जोशी ने एसआईआर से जुड़े कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। इस वजह से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर बड़े पैमाने पर राजनीतिक और कानूनी विवाद भी खड़ा हो गया था।  चुनाव आयोग के इतिहास में पहली बार आयोग के महानिदेशक आशीष गोयल ने बैठक की औपचारिक जानकारी दी। इस बैठक में नौ बड़े फैसले किए गए।


एसआईआर पर थी सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
बयान में कहा गया है, एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ दिए गए घोषणा-पत्र को शीर्ष अदालत ने भी 27 मई, 2026 के अपने आदेश में सही ठहराया है। एसआईआर के अलावा बाकी समय के लिए नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

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