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संरा शांति सैनिकों को गृहमंत्रालय की चेतावनी, यौन उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Mon, 05 Jun 2017 04:23 AM IST
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संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक बल के तौर पर तैनात जवानों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यौन उत्पीड़न के मामले में कोई माफी नहीं दी जाएगी। केंद्रीय बलों को इस गंभीर मुद्दे पर मंत्रालय द्वारा इस तरह की सख्त चेतावनी जारी करने का यह पहला मामला है।
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संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षकों द्वारा कथित तौर पर हैती में करीब 10 साल तक बाल यौन शोषण किए जाने का मामला सामने आया था। इसमें किसी भी आरोपी को जेल नहीं हुई। इसके बाद वैश्विक संस्था ने एक एडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय का निर्देश इसी एडवाइजरी के बाद आया है। इसमें यौन शोषण की किसी भी शिकायत पर बर्खास्तगी और कैद तक की चेतावनी दी गई है।
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अधिकारियों के मुताबिक, कहीं से भी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जहां संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक की ड्यूटी पर तैनात किसी भी भारतीय अर्धसैनिक बल के जवान या अधिकारी की यौन शोषण में भूमिका सामने आई हो। हालांकि एक एहतियाती उपाय के तहत मंत्रालय ने सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि संयुक्त राष्ट्र बैनर तले काम करने वाला हर भारतीय जवान वैश्विक संगठन द्वारा यौन उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ ‘नो एक्सक्यूज’ पॉकेट कार्ड रखे।
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यह पॉकेट कार्ड कहता है, हर वक्त हमें स्थानीय आबादी को सम्मान और गरिमा के साथ देखना चाहिए। यौन उत्पीड़न और शोषण अस्वीकार्य व्यवहार है। यह संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़े कर्मियों के लिए निषेध आचरण है।
शांति सेना में छह हजार भारतीय अर्द्धसैनिक बल तैनात
संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में 6,000 केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। इनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी के जवान लाइबेरिया, हैती और कांगो में अलग-अलग सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें एक साल के समयसीमा पर बदला जाता है।