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Manipur: मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए MHA ने अपनाया कड़ा रुख, सुरक्षा बलों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश

Sat, 16 Nov 2024 03:57 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sat, 16 Nov 2024 03:57 PM IST
सार

असम की सीमा से लगे जिरीबाम में सीआरपीएफ की चौकी पर अत्याधुनिक हथियारों से लैस वर्दी पहने संदिग्धों ने हमला किया था। हमला के जवाब में फायरिंग में कम से कम 11 कुकी संदिग्ध मारे गए थे।

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MHA directed to Security forces, take necessary steps to restore peace in Manipur
मणिपुर में सेना (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने सभी सुरक्षा बलों को शांति बहाली के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि राज्य में हिंसक गतिविधियों में शामिल होने या हिंसा करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। गृह मंत्रालय ने राज्य की गतिविधियों को नाजुक बताते हुए ठोस कदम उठाने के लिए कहा गया। 
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मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से स्थिति गंभीर बनी हुई है। पिछले सोमवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 11 संदिग्ध उग्रवादी मारे गए। इन उग्रवादियों ने काले कपड़ने पहने हुए थे और अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। उन्होंने जिरिबाम जिले के एक थाने और एक सीआरपीएफ शिविर पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इसके एक दिन बाद उग्रवादियों ने जिरीबाम जिले के छह नागरिकों का अपहरण किया, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। 
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इसके लेकर गृह मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से मणिपुर की स्थिति पिछले कुछ दिनों से नाजुक है। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हो रहे संघर्ष में लगातार दोनों समुदायों के सशस्त्र उपद्रवी शामिल हो रहे हैं। इससे लोगों को भी जान को खतरा हो रहा है। साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। 
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गृह मंत्रालय ने कहा कि हिंसक और बंटवारे वाली गतिविधियों में शामिल होने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जबकि कई अहम मामलों की जांच एनआईए को सौंपी गई है। इसके साथ ही मंत्रालय ने लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों पर विश्वास न करने और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों का सहयोग करने के लिए कहा है। 

छह थाना क्षेत्रों में अफस्पा लागू
केंद्र सरकार ने मणिपुर के छह थाना क्षेत्रों में फिर से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा) लागू कर दिया है। इस अधिनियम के तहत किसी क्षेत्र को 'अशांत' घोषित किया जाता है, जिससे सुरक्षा बलों को वहां प्रभावी रूप से कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है। इन क्षेत्रों में जिरिबाम भी शामिल है, जहां हाल ही में हिंसा हुई थी। इसमें इंफाल पश्चिम जिले के सेकमई और लमसांग; इंफाल पूर्व जिले का लमसाई, जिरीबाम जिले का जिरिबाम; कांगपोकपी जिले का लेइमाखोंग; बिष्णुपुर जिले का मोइरंग क्षेत्र शामिल हैं। 

मणिपुर सरकार ने 19 थाना क्षेत्रों को अफस्पा से बाहर रखा था
मणिपुर सरकार ने एक अक्तूबर को राज्य के अधिकांश हिस्सों में अफस्पा लागू कर दिया था। हालांकि, उस समय 19 थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया था, जिनमें ये छह थाना क्षेत्र भी शामिल थे। इसके बाद गृह मंत्रालय ने नई अधिसूचना में इन छह थाना क्षेत्रों को भी शामिल किया है। जिन 19 थाना क्षेत्रों को अफस्पा से बाहर  रखा गया था, उनमें इंफाल, लंफाल, सिटी, सिंजामेई, सेकमई, लमसांग, पटसोई, वांगोई, पोरोमपट, हेइंगंग, लमलाई, इरिलबुंग, लेइमाखोंग, थौबल, बिष्णुपुर, नामबोल, मोइरांग, ककचिंग और जिरीबाम शामिल थे। 


मई 2023 में शुरु हुई थी हिंसा, मारे जा चुके 200 से ज्यादा लोग
राज्य में मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों बेघर हो चुके हैं। हिंसा इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती समुदाय और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समुदाय के बीच शुरू हुई थी। जिरीबाम जिला शुरू में इस संघर्ष से प्रभावित नहीं था। लेकिन जून 2024 में एक किसान का शव मिलने के बाद इस जिले में भी हिंसक झड़पें शुरू हुईं। 

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