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Hindi News ›   India News ›   meteorological department will issue forecast for winters in next month for December January and February

मौसम विभाग अगले महीने करेगा सर्दी का पूर्वानुमान, इस महीने के अंत में पहाड़ों पर बर्फबारी संभव

Sun, 04 Oct 2020 10:38 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 04 Oct 2020 10:38 AM IST
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meteorological department will issue forecast for winters in next month for December January and February
rain, winter - फोटो : अमर उजाला

धरती के एक बड़े हिस्से में मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी हैं, देश में हवाओं का रुख बदल रहा है। कम दबाव वाले क्षेत्रों में अब उच्च दबाव की हवाओं की रफ्तार में तेजी देखने को मिल रही है। देश में ऐसे कई हिस्से हैं, जहां रात को तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। जहां तापमान हल्का गिरने लगा है, वो जगह हैं पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान।

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भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि पूरे अक्तूबर ऐसा मौसम होने वाला है, जब आसमान साफ होने से दिन में गर्मी रहेगी और रात में ठंड का अहसास बढ़ जाएगा। इसके अलावा विभाग का कहना है कि इस महीेने के अंत या नवंबर की शुरुआत में पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी देखी जा सकती है। मौसम विभाग ने कहा कि वो अगले महीने तक दिसंबर, जनवरी और फरवरी के लिए सर्दियों का पूर्वानुमान घोषित करेगा। 
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वहीं पहाड़ों से आने वाली उत्तरी हवाओं से शीत लहर के चलते दिन में भी तापमान कम होने लगेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की ओर से पश्चिमी विक्षोभों के आने की संख्या बढ़ जाएगी। मौसम से जुड़ी निजी एजेंसी स्कईमेट के अनुसार, इस समय ला नीना की स्थिति बन सकती है।
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स्काईमेट का कहना है कि इसके चलते सर्दी का मौसम लंबा हो सकता है और ठंड भी कड़ाके की पड़ सकती है। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर दुनियाभर में देखा जा रहा है। वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस है।


उन्होंने बताया कि अगले दो हफ्तों में यह तापमान 16-17 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाएगा। इसके बाद से हर हफ्ते एक या दो ़़डिग्री तापमान कम होता जाएगा। इसके अलावा मौसम विज्ञानी डॉ डीएस पई ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से एक्सट्रीम इवेंट्स बढ़ गए हैं, इसका मतलब यह है कि एक ही क्षेत्र में मानसून और गर्मी का अलग-अलग असर देखने को मिला।

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