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डिजिटल इंडिया: सांसदों को पीड़ा दे रहे '720' घंटे, इसके बाद ही मिलता है सवाल का जवाब
Tue, 30 Mar 2021 03:54 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 30 Mar 2021 03:54 PM IST
सार
लोकसभा या राज्यसभा सांसद अपने इलाके से संबंधित अथवा किसी मंत्रालय से जुड़ी कोई सूचना प्राप्त करने के लिए पहले संबंधित मंत्री या मंत्रालय में पत्र भेजते हैं। पहले 15 दिन में उन्हें पावती मिलती है, इसके बाद अगले 15 दिनों में जवाब दिया जाता है...
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राज्यसभा
- फोटो : ANI (File)
विस्तार
देश में चारों तरफ डिजिटल इंडिया की धूम है। केंद्र एवं राज्य सरकारें लगातार नई मुहिम शुरू कर लोगों को डिजिटल इंडिया से जोड़ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमआईटीवाई) ने देश में जागरुकता बढ़ाने के लिए दो योजनाएं यानी राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन (एनडीएलएम) और डिजिटल साक्षरता अभियान (दिशा) क्रियान्वित की हैं। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। दूसरी तरफ सांसदों को डिजिटल युग में अगर कोई छोटी सी जानकारी लेनी हो, तो उन्हें 720 घंटे का लंबा इंतजार करने के लिए कहा जाता है।
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लोकसभा या राज्यसभा सांसद, अपने इलाके से संबंधित अथवा किसी मंत्रालय से जुड़ी कोई सूचना प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें केंद्र सरकार को लिखना पड़ता है। वे इसके लिए संबंधित मंत्री या मंत्रालय में पत्र भेजते हैं। पहले 15 दिन में उन्हें वह पावती मिलती है, जिसमें यह लिखा रहता है कि सांसद महोदय का पत्र प्राप्त हुआ है, जल्द ही जवाब भेजा जाएगा। इसके बाद अगले 15 दिन में जवाब दिया जाता है।
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यानी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को अपने किसी सवाल का जवाब या कोई दूसरी जानकारी लेने में एक महीना लग जाता है। पिछले दिनों संसद सत्र के दौरान लोकसभा सदस्य एडवोकेट एएम आरिफ ने पूछा था, क्या सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों और मंत्रालयों को संसद सदस्यों द्वारा भेजे गए सवालों के जवाब समय पर देना सुनिश्चित किया है। क्या इसके लिए कोई दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
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राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय एवं राज्य मंत्री पीएमओ, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार आयोग और लोक शिकायत विभाग ने केंद्रीय मंत्रियों और मंत्रालयों में प्राप्त हुए संसद सदस्यों के पत्रों को देखने के लिए केंद्रीय सचिवालय कार्यालय पद्धति नियम पुस्तिका (सीएसएमओपी) में यथा निहित प्रावधानों के अनुसरण के अनुसार पद्धतियां और दिशा निर्देश निर्धारित किए हैं।
विभाग ने सीएसएमओपी के प्रावधान के अनुसरण की आवश्यकता पर बल देते हुए समय-समय पर इसमें निहित अनुदेशों को दोहराया है। इसमें प्रावधान है कि 15 दिन के भीतर संसद सदस्यों से प्राप्त पत्रों की पावती भेजना और पावती भेजने के अगले 15 दिनों के भीतर उत्तर दिया जाना शामिल है।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धोत्रे के अनुसार, एनडीएलएम और दिशा के अंतर्गत 2014 से 2016 के दौरान संचयी लक्ष्य प्रति परिवार एक व्यक्ति को शामिल करते हुए 52.5 लाख व्यक्तियों को प्रशिक्षित करना था। इनके तहत 53.67 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है।
इसके अलावा एमआईटीवाई ने 2,351.38 करोड़ की कुल लागत पर फरवरी 2017 में छह करोड़ ग्रामीण परिवारों (प्रति परिवार एक व्यक्ति) को शामिल करते हुए ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता का प्रसार करने के लिए 'प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान' नामक योजना शुरू की है। इसके तहत समान भौगोलिक पहुंच सुनिश्चित करने के संबंध में, देशभर में 2,50,000 ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक को शामिल करने की परिकल्पना की गई है।
पीएमजी-दिशा के कार्यान्वयन के लिए 1088 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। चार फरवरी 2021 की स्थिति के अनुसार, पीएमजी-दिशा के तहत कुल 4.21 करोड़ उम्मीदवार नामांकित किए गए हैं। लगभग 3.44 करोड़ उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी गई है। इनमें से 2.51 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को अभिप्रमाणित किया गया है।