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विवाद: केंद्र ने कहा- ट्विटर का बयान झूठा, अपनी मूर्खता छिपाने के लिए भारत को बदनाम करने की कोशिश

Fri, 28 May 2021 02:32 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 28 May 2021 02:32 AM IST
सार

नए आईटी नियमों के पालन को लेकर सोशल मीडिया व सरकार के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। वॉट्सएप ने जहां हाईकोर्ट की शरण ली है वहीं, ट्विटर ने भी अपने दफ्तर पर छापों को लेकर चिंता जताई है। 
 

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MEITY said: Twitters statement is an attempt to dictate its terms to the worlds largest democracy  
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

केंद्र सरकार ने अभिव्यक्ति की आजादी को खतरा वाले आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, ट्विटर का यह दुर्भाग्यपूर्ण बयान पूरी तरह से निराधार, झूठा है और अपनी मूर्खता छिपाने के लिए भारत को बदनाम करने की कोशिश है। सरकार ने बरसते हुए कहा, ट्विटर फिजूल बात न करे और देश के कानूनों का पालन करे। कानून और नीतियां बनाना भारत का संप्रभु विशेषाधिकार है और ट्विटर सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है और भारत की कानूनी नीति की रूपरेखा क्या होनी चाहिए, यह हमें न बताए। दरअसल, ट्विटर ने टूलकिट विवाद और सोशल मीडिया के नए दिशा-निर्देश पर कहा था, नए नियमों से अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा हो सकता है। हम नियमों को लागू करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह पारदर्शिता के सिद्धांतों के साथ होगा। हम पूरे मामले में भारत सरकार के साथ अपनी बातचीत जारी रखेंगे।

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा, ट्विटर ने जो दावे किए हैं, हम उनका जोरदार खंडन करते हैं। भारत में सदियों से अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों की गौरवशाली परंपरा रही है। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना केवल ट्विटर जैसी निजी, लाभकारी और विदेशी संस्थाओं का विशेषाधिकार नहीं है। यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और उसकी मजबूत संस्थाओं की प्रतिबद्धता है। मंत्रालय ने कहा, ट्विटर का बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर हुक्म चलाने की कोशिश है। अपनी हरकतों और जानबूझकर अवज्ञा करने वाली ट्विटर भारत की कानून व्यवस्था को कमतर आंक रही है। अब ट्विटर उन दिशा-निर्देशों को नहीं मान रही है। बोलने की आजादी को लेकर ट्विटर पर पारदर्शी नीतियां नहीं हैं। कई लोगों के अकाउंट निलंबित कर दिए जाते हैं, तो कई की पोस्ट हटा दी जाती हैं।
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सबसे बड़ा सवाल: इतनी प्रतिबद्ध तो फिर खुद क्यों नहीं बनाई व्यवस्था
मंत्रालय ने कहा है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ट्विटर इतनी प्रतिबद्ध है तो फिर उसने भारत में इस तरह की व्यवस्था क्यों नहीं बनाई। भारत में ट्विटर के प्रतिनिधि भी अक्सर दावा करते हैं कि उनके पास कोई अधिकार नहीं हैं। उनको और भारत के नागरिकों को अमेरिका स्थित ट्विटर के मुख्यालय से ही संपर्क करना पड़ता है। ट्विटर के भारत में बड़ी संख्या में यूजर हैं। वह भारत में अपने संचालन से अच्छा खासा राजस्व कमाती है। मगर, जब भी भारत में शिकायतों को सुनने के लिए कोई अफसर की तैनाती या फिर कोई प्रक्रिया बनाए जाने की बात आती है तो वह भड़क जाती है। जबकि शिकायत अफसर या नोडल अफसर की तैनाती से यूजर्स को राहत मिलती, जिन्हें भड़काऊ या आक्रामक ट्वीट का सामना करना पड़ता है।
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 सोशल मीडिया प्रतिनिधियों, नागरिक समाज से बात कर बनाए नियम
सरकार ने कहा, ये नियम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद ही अंतिम रूप से तय किए गए थे। इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार मंत्रालय ने मसौदे को सार्वजनिक तौर पर सबके सामने रखा और इस पर लोगों से राय भी मांगी गई। मंत्रालय को आम लोगों, नागरिक समाज, औद्योगिक संघों और संगठनों से बड़ी संख्या में सुझाव भी मिले। ऐसी टिप्पणियां भी मिलीं, जिनमें इन सुझावों को लोगों ने खारिज भी किया। सुप्रीम कोर्ट समेत कई अदालतों की ओर से सरकार को इस बारे में कदम उठाने के लिए निर्देश भी मिले। कई बार इस मसले पर संसदीय बहस भी हुई और इनसे हमें उपयुक्त कदम उठाने के लिए सिफारिशें भी मिलीं।

आलोचनाओं और निजता का करते हैं सम्मान
सरकार ने कहा, बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी भारतीय संविधान के तहत मौलिक अधिकार है। सरकार लोगों के सवाल करने के अधिकार और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर आलोचनाओं का सम्मान करती है। साथ ही सरकार निजता के अधिकार का भी सम्मान करती है।

भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कर्मियों की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं
वहीं, टूलकिट मामले में ट्विटर के दफ्तर पर दिल्ली पुलिस के जाने को लेकर स्टाफ की सुरक्षा खतरे में बताने पर भी सरकार ने आडे़ हाथ लिया है। सरकार ने भरोसा दिलाते हुए कहा, ट्विटर सहित सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधि भारत में हमेशा सुरक्षित हैं और रहेंगे और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा और सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है।

चार मामलों का हवाला देकर ट्विटर की प्रतिबद्धता की खोली पोल
1.बीते दिनों ट्विटर ने उस वक्त केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की लोकेशन को चीन के हिस्से में दर्शा दिया था, जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के मसले पर बातचीत हो रही थी। इस ओर कई बार ध्यान दिलाने के बावजूद भी ट्विटर ने कार्रवाई नहीं की। काफी बाद उसने सुधार किया, जबकि यह देश की संवेदनशीलता और अखंडता का अपमान था। 
2. अमेरिका में कैपिटल हिल्स की हिंसा में ट्विटर ने यूजर्स के खिलाफ खुद संज्ञान लिया, जबकि दिल्ली में लालकिला हिंसा को लेकर की गई टिप्पणियों और सामग्री को हटाने में आनाकानी करता रहा।
3. ट्विटर में भारत और भारतीयों के प्रति जवाबदेही का अभाव है। कोरोना के टीके को लेकर उसके प्लेटफॉर्म पर कितनी अफवाह उड़ाई गईं, मगर उसने कोई कार्रवाई नहीं की। क्या यही प्रतिबद्धता है?
4. ट्विटर भारत और विदेशों में बसे भारतीयों के प्रति भेदभाव की नीति अपनाता है। हाल ही में कोरोना के नए स्वरूप बी 1.617 को भारतीय वैरिएंट नाम दे दिया, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश के मुताबिक यह गलत है। उसने फर्जी कहानियां गढ़ने पर कोई रोक नहीं लगाई।
 

ट्विटर ने अपने बयान में यह कहा था

ट्विटर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में बने नियमों में से जिसे हम लागू कर सकते हैं, उसे लागू करने की कोशिश करेंगे। लेकिन, हम अभिव्यक्ति की आजादी और पुलिस की धमकाऊ प्रवृत्ति को लेकर चिंतित हैं। हम नियमों को लागू करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ये पूरी तरह पारदर्शिता के नियमों के साथ होगा। हम भारत के लोगों के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी सेवाएं भारत में कम्युनिकेशन के लिए प्रभावी जरिया साबित हुई हैं। महामारी के समय ये संबल का जरिया भी बनी है। हम भारत में अपने कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं को लेकर भी परेशान हैं। हम पूरे मामले में भारत सरकार के साथ अपनी बातचीत को जारी रखेंगे। हमारा मानना है कि इस मामले में दोनों ओर से सहयोगात्मक रवैया जरूरी है। 


सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने डिजिटल मीडिया से नियम 18 के तहत मांगी जानकारी
इस बीच, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) के डिजिटल मीडिया विभाग ने  डिजिटल मीडिया के प्रकाशकों को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के नियम 18 के तहत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा है। लगभग 60 डिजिटल मीडिया प्रकाशकों और उनके संघों ने मंत्रालय को सूचित किया है कि उन्होंने नियम के तहत स्व-नियामक निकायों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।प्रकाशकों को इस नोटिस के जारी होने के 15 दिनों के भीतर लागू प्रारूप में मंत्रालय को सूचना देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि नए नियमों व गाइडलाइन के पालन के लिए उनके द्वारा अब तक क्या कदम उठाए गए। 


सरकार ने तीन माह का समय दिया था
बता दें कि केंद्र सरकार ने 25 फरवरी को सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी की और नियमों को सख्त किया था। इसके बाद सरकार ने फेसबुक, ट्विटर, जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को इन्हें लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया था। इसके बाद 25 मई से केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन अमल में आ गई है।
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