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Mehangai Par Halla Bol: राहुल गांधी ने एक रैली से दिए कई सवालों के जवाब, कितना मिलेगा जनता का साथ?

Sun, 04 Sep 2022 11:34 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 04 Sep 2022 11:34 PM IST
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सार
Mehangai Par Halla Bol: रामलीला मैदान में राहुल गांधी के बोलने के तेवर जिस तरह आक्रामक थे, उसने कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं को भी ऊर्जा से भरने का काम किया है जो पार्टी की हालत खराब मानकर सुस्त पड़े हुए थे। इस रैली के साथ राहुल गांधी ने 2024 की लड़ाई का प्रारंभ कर दिया है जिसे ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के माध्यम से और ज्यादा मजबूत किया जाएगा।
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Mehangai Per Hallabol Rahul Gandhi answered many questions from a rally, hows Congress get public support
Mehangai Per Hallabol Rally - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mehangai Par Halla Bol: कांग्रेस ने लगभग तीन साल के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की। देश भर से आए एक लाख से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने इस मंच से उन कई गंभीर प्रश्नों के जवाब दिए जो पार्टी के अंदर से लेकर बाहर तक उन पर लगाए जा रहे थे। उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा तो जनता की बात न उठाने के लिए मीडिया को भी घेरा। रामलीला मैदान में राहुल गांधी के बोलने के तेवर जिस तरह आक्रामक थे, उसने कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं को भी ऊर्जा से भरने का काम किया है जो पार्टी की हालत खराब मानकर सुस्त पड़े हुए थे। इस रैली के साथ राहुल गांधी ने 2024 की लड़ाई का प्रारंभ कर दिया है जिसे ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के माध्यम से और ज्यादा मजबूत किया जाएगा। इन मुद्दों पर कांग्रेस जनता का साथ पाने में कितना सफल हो पाएगी, यह देखने वाली बात होगी।  



राहुल गांधी ने महंगाई के मुद्दे पर पुरजोर तरीके से केंद्र सरकार को घेरने का काम किया है। यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि वह समझ रहे हैं कि ईडी की कार्रवाई के बहाने उनके मनोबल को तोड़ने की कोशिश ही की जा रही है। लेकिन जिस मजबूत तरीके से उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर आक्रमण किया है, वह उनकी अपने लक्ष्य की ओर अटल रहने का संकेत भी देता है। इसके पहले कांग्रेस ने कांग्रेस ने गांधी परिवार पर ईडी की कार्रवाई के खिलाफ 05 अगस्त को विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन उस बार भाजपा ने इसे एक परिवार को बचाने की कोशिश करार दिया था, लेकिन महंगाई के मुद्दे का हर वर्ग से जुड़े होने के कारण इस विषय ने ज्यादा व्यापक मुद्दा उठाने का काम किया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि इस मुद्दे को सही से उठाया गया तो कांग्रेस को मजबूती मिल सकती है।   

कार्यकर्ताओं का उत्साह बदलाव का संकेत

वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र कुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की रैलियों में कार्यकर्ताओं या जनता की तरफ से इस तरह का उत्साह लंबे समय से नहीं दिखाई पड़ रहा था। विशेषकर 2014 के आम चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में एक तरह की मायूसी देखी जा रही थी। नेताओं के मंच से भाषण में भी वह जोश नहीं दिखाई दे रहा था जो कार्यकर्ताओं को जोश से भर पाता या जनता को अपने पक्ष में मोड़ सकता। लेकिन रामलीला मैदान की रैली में ये दोनों बातें खूब दिखाई पड़ीं। शायद यह एक बदलाव का संकेत है कि यदि पार्टी सही रणनीति से जनता के बीच उतरे तो उसे लोगों का साथ मिल सकता है।

रामलीला मैदान की महंगाई पर हल्ला बोल रैली को कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान दीपेंद्र हुड्डा, सचिन पायलट और राहुल गांधी के भाषण के समय कार्यकर्ताओं की ओर से सबसे ज्यादा तेज आवाज में नारेबाजी कर उनका स्वागत किया गया। यह इस बात का संकेत था कि बुजुर्ग हो रहे पार्टी नेताओं के बीच युवा नेताओं की पार्टी कार्यकर्ताओं पर पकड़ मजबूत हो रही है। उनके नेतृत्व में पार्टी लड़ भी सकती है और जीत भी हासिल कर सकती है।

जनता समझे किसका दें साथ

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि इस रैली से राहुल गांधी ने उस महंगाई के मुद्दे को जोरशोर से उठाया है जिससे आज देश का हर आदमी परेशान है। राहुल गांधी ने यह करके एक बार फिर संदेश दे दिया है कि आम आदमी के मुद्दों को लेकर आज भी केवल कांग्रेस ही लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि इसके पहले कोरोना के आपातकाल में भी केवल कांग्रेस ही लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ती दिखाई पड़ी थी। अब जनता को सोचना चाहिए कि उसे किसका साथ देना है।
 

Mehangai Per Hallabol Rally
Mehangai Per Hallabol Rally - फोटो : अमर उजाला

जनता तय करे उसे कैसा लोकतंत्र चाहिए

कांग्रेस नेता अलका लांबा ने भी अमर उजाला से कहा कि अब यह जनता को अपनी प्राथमिकताएं तय करने का समय है। उसे यह तय करना पड़ेगा कि वह किसके साथ खड़ी है। एक तरफ केंद्र की वह सरकार है जो दूध-दही तक पर जीएसटी लगाने को तैयार है दूसरी ओर वह कांग्रेस है जिसने उसे शिक्षा, रोजगार और सूचना पाने का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार सभी संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने का काम कर रही है, वहीं कांग्रेस ने सूचना पाने को लोगों का अधिकार बनाकर लोकतंत्र को मजबूत किया। अब उन्हें तय करना चाहिए कि उन्हें कैसा लोकतंत्र चाहिए।

विवादित नेताओं का भी साथ

राहुल गांधी पर पार्टी के अंदर से ही कई वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए थे। लेकिन रामलीला मैदान पर पार्टी के मंच पर भूपेंदर हुड्डा और अशोक चह्वाण जैसे वे तमाम नेता मौजूद थे, जिनके कांग्रेस में बने रहने को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं लगातार चल रही थीं। इन नेताओं ने मंच पर रहकर यही संदेश देने की कोशिश की है कि यदि उनकी बातों को सुना जाए और उस पर कार्रवाई की जाए तो पार्टी में उनके बने रहने पर कोई संशय नहीं है।

हुड्डा ने दिया सुलह का संकेत?

दीपेंद्र हुड्डा के संबोधन के समय कार्यकर्ताओं का उत्साह से भरा स्वागत पार्टी में उनके भविष्य को लेकर मजबूत दावेदारी कर रहा था। भूपेंद्र हुड्डा के भारी संख्या में समर्थक अपने नेता के नाम की फोटो-टी शर्ट पहनकर जोरशोर से उनके पक्ष में दावेदारी कर रहे थे। शायद इस तरह से भूपेंदर हुड्डा ने उन सवालों के जवाब देने की कोशिश की, जिसे उनकी गुलाम नबी आजाद के मुलाकात के बाद से उठाया जा रहा था। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने मंच से कहा कि इन कार्यकर्ताओं की वह बात नोटिस कर ली गई है जिसे वे अपने जोरदार नारों से पहुंचाना चाहते हैं। यह दोनों पक्षों में एक बेहतर समन्वय की ओर बढ़ने का संकेत हो सकता है जिसकी पार्टी को हरियाणा में सबसे ज्यादा जरूरत है।

राजस्थान में गुटबाजी कमजोर होगी?

यदि पार्टी के इस मंच पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों एक ही मंच से साथ आकर कांग्रेस को मजबूत करने का काम करते हैं तो इससे राजस्थान में पार्टी के एकजुट होने का संकेत जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी ने सही रणनीति के साथ आपसी मतभेद को दूर कर चुनाव में जाने का काम किया तो उसे राजस्थान में लगातार दूसरी बार भी सफलता मिल सकती है। यदि राहुल गांधी यह करने में सफल हो जाते हैं तो यह उनकी राजनीतिक समझ का बड़ा प्रमाण साबित होगा।

देश के हर हिस्से से आए कार्यकर्ता

कांग्रेस की इस रैली में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और केरल तक हर राज्य के कार्यकर्ता आए थे। रैली के स्थल के कारण स्वाभाविक तौर पर सबसे ज्यादा संख्या दिल्ली के कार्यकर्ताओं की थी, लेकिन बाहर से आने वालों में उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा संख्या में कार्यकर्ता आए थे। यूपी के पूर्वांचल के लगभग हर जिले से कांग्रेस की बसें दिल्ली तक पहुंचीं जो इस बात का संकेत दे रही थीं कि देश के सबसे बड़े राज्य में पार्टी की जमीन पर पकड़ अभी कमजोर नहीं पड़ी है। यदि मुद्दों के साथ कांग्रेस नेता इस भीड़ को वोट में बदल सकें तो ये पार्टी को मजबूत करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण हो सकता है।

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