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Meghalaya: गेमिंग रेगुलेशन एक्ट-2021 पर संगमा सरकार का यूटर्न, चर्च का दवाब माना जा रहा अहम कारण

Thu, 13 Oct 2022 07:44 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 13 Oct 2022 07:44 PM IST
सार

मेघालय रेगुलेशन ऑफ गेमिंग एक्ट, 2021 राज्य में ऑनलाइन गेमिंग को वैध बनाने और विनियमित करने के लिए कर मंत्री जेम्स पीके संगमा के मार्गदर्शन में पेश किया गया था। इसमें पर्यटकों के लिए कसीनो पेश करने पर भी विचार किया गया था।

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Meghalaya govt scraps act promoting casinos and gaming parlours
मोबाइल गेमिंग - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

मेघालय में कसीनो और गेमिंग पार्लर के बढ़ रहे कल्चर और इसे लेकर चर्च के विरोध के बीच कोनराड संगमा सरकार ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने गुरुवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में कसीनो और अन्य जुआ पार्लरों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल पेश किए गए मेघालय गेमिंग रेगुलेशन एक्ट को खत्म किया जा रहा है। राज्य के कर मंत्री जेम्स पीके संगमा ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के हितों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि इस अधिनियम के तहत हितधारकों के साथ वार्ता के बाद ये सामने आया है कि इस अधिनियम को पूरी तरह से खत्म कर देना ही राज्य के हित में है। इसके बाद अब मेघालय विनियमन अधिनियम, 2021 को निरस्त किया जाएगा। 

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उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से इस अधिनियम के बारे में चर्चा और विचार विमर्श किया जा रहा था। समाज के कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक संस्थानों द्वारा इस अधिनियम के दायरे और इस गेमिंग कल्चर के लोगों के प्रभाव के बारे में चिंता जताई थी। कर मंत्री ने आगे कहा कि गेमिंग अधिनियम को लाने का उद्देश्य राजस्व, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देना था। 
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2021 में लाया गया था अधिनियम
गौरतलब है कि मेघालय रेगुलेशन ऑफ गेमिंग एक्ट, 2021 राज्य में ऑनलाइन गेमिंग को वैध बनाने और विनियमित करने के लिए कर मंत्री जेम्स पीके संगमा के मार्गदर्शन में पेश किया गया था। इसमें पर्यटकों के लिए कसीनो पेश करने पर भी विचार किया गया था।
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वहीं, इस अधिनियम के आने के बाद से ही चर्च के नेता इसके विरोध में आ गए थे। चर्च भी अधिनियम को रद्द करने के लिए सरकार के खिलाफ याचिका दायर कर रहा था। उनका दावा था कि यह अधिनियन अनैतिक है और समाज के लिए बड़ा खतरा है। मेघालय सरकार द्वारा इस अधिनियम पर लिए गए यूटर्न के पीछे चर्च का दबाव भी एक अहम कारण भी माना जा रहा है। बता दें कि 2011 की जनगणना के अनुसार, ईसाई यहां राज्य की आबादी का लगभग 74.59% (2.21 मिलियन) हैं।

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