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संसद के शीतकालीन सत्र में चढ़ा रहेगा सियासी पारा, आज सर्वदलीय बैठक

Thu, 14 Dec 2017 02:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली Updated Thu, 14 Dec 2017 02:55 AM IST
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meeting will be held in the winter session of Parliament, today's all-party meeting
संसद - फोटो : self
इस बार संसद का शीतकालीन सत्र भले 14 कार्यदिवस में समाप्त हो जाए लेकिन इसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। सरकार ने सत्र के सुचारु संचालन के लिए बृहस्पतिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।  सर्वदलीय बैठक से ठीक पहले कांग्रेस सभी विपक्षी दलों के साथ बैठक कर पूरे सत्र की रणनीति तय करेगा। यह सत्र 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक चलेगा जिसमें सिर्फ 14 कार्य दिवस है। सोमवार 18 दिसंबर को आने वाला गुजरात चुनाव का नतीजा भी तय करेगा की विपक्ष किस हद तक आक्रामक हो सकता है। 
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कांग्रेस अपने सियासी तरकश के राफेल विमान खरीद, किसानों की अनदेखी, गुजरात चुनाव प्रचार में पाकिस्तान को घसीटने जैसे कई मुद्दों के तीरों पर सान चढ़ा रहा है। यूपीए के एक सांसद के मुताबिक इस बार कांग्रेस को अन्य विपक्षी दलों का पूरा साथ मिलने का आश्वासन है। कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में विपक्षी दलों की बैठक में सरकार को घेरने संबंधी अंतिम फैसले लिए जाएंगे। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि इस सत्र में सरकार और विपक्ष मंदिर मुद्दे पर आपस में टकराएंगे।
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पढ़ें- संसद के सत्र को लेकर इस बार हुए बवाल की वजह जान लीजिए
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वहीं, सरकार के सामने कई अहम बिल को पास कराने की चुनौती है। सरकार की कोशिश होगी कि तीन तलाक से संबंधित बिल इसी सत्र में पेश कर उसे पारित कराया जाए। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी इसका संकेत दे चुके हैं। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि अति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़ा 123वां संशोधन बिल भी इसी सत्र में पेश होगा। 

दोनों सदनों में राफेल पर चर्चा की होगी कोशिश

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संसद
बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के डूबे हुए पैसों के सुचारु निवारण के लिए तैयार विधेयक फाइनेंसियल रिजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल सरकार की तरफ से पेश होने वाले बिलों में सबसे अहम है। इसके अलावा जीएसटी में हुए बदलाव को कानूनी जामा पहनाने के लिए संशोधन पेश किए जाएंगे। इनके साथ इन्सालवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन बिल और फॉरेस्ट संशोधन बिल भी सरकार के एजेंडे में हैं। एक सांसद के मुताबिक इन सभी बिलों पर विपक्ष के तेवर के आक्रामक रहने की गुंजाइश है।


कांग्रेस राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर दोनों सदनों में चर्चा की पुरजोर कोशिश करेगी। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस सरकार ने 37 राफेल विमान की खरीदारी काफी ऊंचे दामों पर कर रही है। यूपीए ने 526 करोड़ रुपए में एक विमान खरीदने का सौदा तय किया था। जबकि यह सरकार इसके लिए 1570 करोड़ रुपये देने पर राजी है। विपक्ष के अलावा एनडीए की सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) भी आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज में देर को लेकर भी सरकार पर दबाव बना सकती है।
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