{"_id":"5bba7928867a550d145190f3","slug":"medical-council-of-india-ended-due-to-its-arbitrariness-anupriya-patel","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनी मनमानी के कारण खत्म हुई मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया: अनुप्रिया पटेल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अपनी मनमानी के कारण खत्म हुई मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया: अनुप्रिया पटेल
पूनम मेहता, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Oct 2018 02:52 AM IST
विज्ञापन
अनुप्रिया पटेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली मोदी सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के गरीबों को मुफ्त बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। अमर उजाला ने आयुष्मान भारत, मेडिकल सीटों व डॉक्टरों की कमी, निजी कॉलेजों की मनमानी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को भंग करने जैसे मुद्दों पर केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल से बातचीत की...
विज्ञापन
एमसीआई को क्यों भंग किया गया?
एमसीआई की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। एमसीआई की मनमर्जी के कारण सरकार को इसे भंग करना पड़ा। उन्होंने मनमानी की हद पार कर दी थी। गरीब का बच्चा ऊंची फीस देकर निजी कॉलेज में नहीं पढ़ सकता। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भी कम कर दीं। गरीब आदमी के हित से खिलवाड़ कर रहे थे, खामियाजा तो भुगतना ही था। जस्टिस लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट में भी पाया गया कि एमसीआई के पदाधिकारी मनमानी कर रहे हैं। देश डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है और एमसीआई मेडिकल कॉलेजों को बंद करा रही थी। स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा था। मोदी सरकार बड़े फैसलों के लिए जानी जाती है। हमने इस मामले में वही किया।
विज्ञापन
अब क्या वैकल्पिक व्यवस्था है?
एनएमसी बिल आ गया है। बोर्ड ऑफ गवर्नर बनाया है। सात लोगों की समिति बनाई है। बोर्ड की पहली बैठक हो गई है। अभी एक साल के लिए बोर्ड ही काम करेगा। तब तक नई मेडिकल काउंसिल बनकर तैयार हो जाएगी।
विज्ञापन
चार साल बाद भी चिकित्सा क्षेत्र में अच्छे दिन क्यों नहीं आए?
डॉक्टरों की कमी से निपटने के उपाय हो रहे हैं। हम हर तीन जिलों में एक जिला अस्पताल को अपग्रेड करके मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बना रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाया गया है। जल्द ही आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों का समुचित इलाज हो सकेगा।
क्या खास है आयुष्मान भारत योजना में?
इसके तहत सभी तरह की बीमारियां कवर होंगी। लाभार्थियों को गोल्ड कार्ड मिलेगा, जिससे उनका उपचार होगा। यह पूरी तरह कैशलेस स्कीम है। अभी तक मंहगे उपचार की वजह से लोग इसका लाभ नहीं ले पा रहे थे। अब ऐसा नहीं होगा।
इसमें बेईमानी को कैसे रोकेंगे?
इसके लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य संस्था बनाई गई है। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कई उपाय किए गए हैं। केंद्र की यह योजना गेम चेंजर साबित होगी।
कुछ और भी नया कर रहे हैं?
15 साल के अंतराल के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लेकर आए हैं। हमने स्वास्थ्य को प्राथमिकताओं में रखा है। क्लीनिकल स्टेबलिशमेंट एक्ट लाया गया है। जिस दिन राज्य इसे लागू कर देंगे अपने आप अनुशासन आ जाएगा।
नए एम्स बन रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी कैसे पूरी होगी?
छह नए एम्स में सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारियों को ले रहे हैं। सत्तर साल की उम्र वाले प्रोफेसर विशेषज्ञों को मौका देंगे। इसके अलावा विजिटिंग फैकेल्टी है।
क्या आपको नहीं लगता कि यूपी के हालात बहुत खराब हैं?
हम स्थानीय अस्पतालों को अपग्रेड कर रहे हैं। रिसर्च का काम भी चल रहा है। हर तीन जिलों में एक जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में बदला जाएगा। कम से कम 100 बेड का अस्पताल बनाएंगे। पहले चरण में 58 अस्पताल हैं। दूसरे चरण में 24 नए मेडिकल कॉलेजों की सूची है। छह नए एम्स में 100 एमबीबीएस और 60 पीजी सीटस रहेंगे। लगभग आठ हजार सीटें बढ़ गई हैं।
निजी कॉलेजों की मनमानी कैसे रोकी जाएगी?
नीट आ चुका है। फीस को काबू करने के लिए समति भी बना दी है। हमें लगता है कि काम को ठीक से अंजाम तक पहुंचाने के लिए पांच साल और चाहिए।
टीबी का लक्ष्य कैसे प्राप्त करेंगे?
टीबी मुक्त भारत का सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने देखा है। पूरी दुनिया ने अपना लक्ष्य 2030 रखा है। हमने लक्ष्य 2024 कर दिया है। पूरी दुनिया में टीबी घटने की दर 1.5 प्रतिशत है, जबकि भारत में 3.3 प्रतिशत है।