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Solar Energy: मेडिकल कॉलेज बन रहे ग्रीन एनर्जी लैब, सौर ऊर्जा के लिए उठाए जा रहे ठोस कदम; बचेंगे करोड़ों रुपये

Wed, 27 Aug 2025 07:35 AM IST
शुभम कुमार परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 27 Aug 2025 07:35 AM IST
सार

भारत के 710 मेडिकल कॉलेज अब डॉक्टर ही नहीं, हरित ऊर्जा के अग्रदूत भी बन रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ये संस्थान अपनी 30% बिजली सौर ऊर्जा से जुटाकर सालाना करीब 500 करोड़ रुपये की बचत कर सकते हैं। एयर कंडीशनिंग व लाइटिंग पर हो रहे भारी खर्च को सोलर ऊर्जा से कम करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।

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Medical colleges are becoming green energy labs concrete steps are being taken for solar energy
सौर उर्जा - फोटो : FreePik

विस्तार

भारत के मेडिकल कॉलेज अब सिर्फ डॉक्टर तैयार करने वाले संस्थान ही नहीं बल्कि हरित ऊर्जा के जरिए एक नई दिशा दिखाने वाले मॉडल भी बनते जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारत में सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 710 है जो सालाना बिजली के लिए 1.5 से दो करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, जबकि यह कॉलेज अपनी 30% बिजली की जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी कर सकते हैं।

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इससे मेडिकल कॉलेजों और उनके अस्पतालों को सालाना करीब 500 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा का कहना है कि देशभर में कई सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्ष उपकरणों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य न केवल कार्बन उत्सर्जन घटाना है, बल्कि लंबे समय में बिजली खर्च को कम करना और कैंपस को टिकाऊ बनाना भी है। अभी तक केंद्रीय अध्ययनों में यह स्पष्ट है कि अस्पतालों के बिजली खर्च का 50 से 60% हिस्सा एयर कंडीशनिंग और उनकी लाइटिंग पर खर्च होता है जिसके लिए सौर ऊर्जा संयंत्र बेहतर विकल्प हो सकता है।
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एनएमसी ने कहा- सभी कॉलेजों को मिल रही सब्सिडी
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों खासतौर पर सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार सब्सिडी दे रही हैं। यह जानकारी देते हुए नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने बताया कि भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित की जाए।

इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में रूफटॉप सोलर लगाने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से 20 से 40% तक सब्सिडी दी जा रही है। दिल्ली स्थित एनएमसी मुख्यालय भी सौर ऊर्जा से संचालित है। लांसेट काउंटडाउन (2022) के अनुसार, ग्लोबल हेल्थ सेक्टर दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का चार से पांच फीसदी जिम्मेदार है। 


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प्रदूषण और खर्च दोनों बचे, 100 से ज्यादा संस्थान बने हरित परिसर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि सौर ऊर्जा का सीधा लाभ यह है कि अस्पताल के आईसीयू, ओटी और लैब जैसी यूनिट्स में अब बिजली कटौती का असर नहीं पड़ता। डीजल जेनरेटर पर निर्भरता कम होने से प्रदूषण और खर्च, दोनों घटे हैं। अभी तक भारत में 100 से अधिक यूनिवर्सिटी और कॉलेज को हरित परिसर यानी उन्हें ग्रीन कैंपस सर्टिफिकेशन मिला है जिनमें मेडिकल कॉलेजों की हिस्सेदारी काफी कम है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- मान्यता के लिए ग्रीन रेटिंग हो सकती है लागू
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि हरित ऊर्जा अपनाना केवल तकनीकी कदम भर नहीं है। कई मेडिकल कॉलेज अब छात्रों के पाठ्यक्रम और कैंपस एक्टिविटी में पर्यावरण शिक्षा जोड़ रहे हैं। सरकार पहले ही अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और ग्रीन सर्टिफिकेशन जैसी योजनाएं लागू कर रही है। अब जरूरत है कि मेडिकल कॉलेज इन पहलों को बड़े पैमाने पर अपनाएं।

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