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मीडिया वन चैनल पर प्रतिबंध: केंद्र के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, कोई अंतरिम राहत नहीं
Thu, 10 Feb 2022 08:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 10 Feb 2022 08:55 PM IST
सार
इस मामले में सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अमन लेखी और चैनल की तरफ से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने पक्ष रखा।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को चैनल मीडिया वन का संचालन करने वाली कंपनी माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई की। हाल ही में केंद्र सरकार ने इस चैनल के प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था, जिस पर केरल हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश वाली बेंच ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया।
चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान चैनल को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इस मामले में सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अमन लेखी और चैनल की तरफ से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने पक्ष रखा है।
क्या है मामला, चैनल की क्या शिकायत?
चैनल के संपादक प्रमोद रमण और अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ यूनियन द्वारा दायर की गई अपील में कहा गया है कि केंद्र ने मीडिया वन के प्रसारण को रोकने का अचानक और कंपनी या उसके कर्मचारियों को सुने बिना आदेश जारी किया और इसलिए, 320 से अधिक पत्रकार और गैर पत्रकार रोजगार से वंचित हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के फैसले को बरकरार रखने वाले एकल न्यायाधीश का आठ फरवरी का आदेश ‘‘अवैध और टिकने योग्य नहीं हैं।’’
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क्या था एकल न्यायाधीश की बेंच का फैसला?
एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा था कि गृह मंत्रालय द्वारा ‘मीडिया वन’ को सुरक्षा मंजूरी से इनकार करना उचित’ था। कंपनी के कर्मचारियों और केयूडब्ल्यूजे ने अपनी-अपनी अपील में आरोप लगाया कि एकल न्यायाधीश ने इस आदेश में ‘गलती’ की कि अनुमति के नवीनीकरण के लिए भी सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य है। उन्होंने एकल न्यायाधीश का आठ फरवरी का फैसला रद्द करने का अनुरोध किया है।
यह पहली बार नहीं है जब चैनल को अपने संचालन पर इस तरह की पाबंदी का सामना करना पड़ा हो। ‘मीडिया वन’ के साथ एक अन्य मलयालम समाचार चैनल ‘एशियानेट’ के प्रसारण पर 2020 में दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के उनके कवरेज के लिए 48 घंटे की रोक लगा दी गई थी।
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चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान चैनल को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इस मामले में सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अमन लेखी और चैनल की तरफ से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने पक्ष रखा है।
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क्या है मामला, चैनल की क्या शिकायत?
चैनल के संपादक प्रमोद रमण और अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ यूनियन द्वारा दायर की गई अपील में कहा गया है कि केंद्र ने मीडिया वन के प्रसारण को रोकने का अचानक और कंपनी या उसके कर्मचारियों को सुने बिना आदेश जारी किया और इसलिए, 320 से अधिक पत्रकार और गैर पत्रकार रोजगार से वंचित हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के फैसले को बरकरार रखने वाले एकल न्यायाधीश का आठ फरवरी का आदेश ‘‘अवैध और टिकने योग्य नहीं हैं।’’
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क्या था एकल न्यायाधीश की बेंच का फैसला?
एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा था कि गृह मंत्रालय द्वारा ‘मीडिया वन’ को सुरक्षा मंजूरी से इनकार करना उचित’ था। कंपनी के कर्मचारियों और केयूडब्ल्यूजे ने अपनी-अपनी अपील में आरोप लगाया कि एकल न्यायाधीश ने इस आदेश में ‘गलती’ की कि अनुमति के नवीनीकरण के लिए भी सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य है। उन्होंने एकल न्यायाधीश का आठ फरवरी का फैसला रद्द करने का अनुरोध किया है।
यह पहली बार नहीं है जब चैनल को अपने संचालन पर इस तरह की पाबंदी का सामना करना पड़ा हो। ‘मीडिया वन’ के साथ एक अन्य मलयालम समाचार चैनल ‘एशियानेट’ के प्रसारण पर 2020 में दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के उनके कवरेज के लिए 48 घंटे की रोक लगा दी गई थी।