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टूलकिट : ग्रेटा की टिप्पणी का भारत-स्वीडन के रिश्तों पर असर नहीं, दोनों देशों के पीएम की चर्चा में नहीं उठा मुद्दा

Fri, 05 Mar 2021 09:40 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 05 Mar 2021 09:40 PM IST
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MEA says Greta Thunberg remarks on Kisan Andolan is no bilateral issue for India and Sweden
ग्रेटा थनबर्ग - फोटो : twitter.com/GretaThunberg

स्वीडन की जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा भारत के किसान आंदोलन को लेकर की गई टिप्पणियों व टूलकिट जारी करने के कारण दोनों देशों के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा। शुक्रवार को भारत व स्वीडन के प्रधानमंत्री ने डिजिटल बैठक की, जिसमें यह मुद्दा नहीं उठा। 

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विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि ग्रेटा थनबर्ग की किसानों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर हाल ही में की गई टिप्पणी दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने विशेष मीडिया वार्ता में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के बीच डिजिटल माध्यम से आयोजित शिखर वार्ता में क्या ग्रेटा थनबर्ग की टिप्पणी का मुद्दा उठा? स्वरूप ने जवाब में कहा- 'नहीं। यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है।
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पिछले माह साझा किया था टूलकिट
गौरतलब है कि पिछले महीने ग्रेटा थनबर्ग ने अपने ट्वीट में कहा था कि हम भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इसके बाद उन्होंने इसमें मदद करने वालों के लिए एक टूलकिट साझा किया था। 

रिहाना व कई विदेशी हस्तियों ने किए थे ट्वीट
टूल किट जारी होने के बाद पॉप स्टार रिहाना एवं कई विदेशी हस्तियों ने किसानों के प्रदर्शनों के समर्थन में ट्वीट किए थे। टूलकिट मामला एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया और दिल्ली पुलिस ने बाद में भारत की छवि को कथित तौर पर खराब करने का प्रयास करने को लेकर कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। 

विदेश मंत्रालय ने यह दिया था बयान

टूलकिट मामले के बाद पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व प्रदर्शनों को लेकर अपना एजेंडा थोपने का प्रयास कर रहे हैं और किसानों के एक छोटे समूह को कृषि कानूनों को लेकर आपत्ति है जबकि इन कानूनों को पूरी चर्चा के बाद संसद ने पारित किया है।

अब भी जारी है किसान आंदोलन
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के काफी संख्या में किसान तीन विवादित कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की भी मांग कर रहे हैं।

सरकार कर चुकी आरोपों को खारिज

वहीं, केंद्र ने ये आरोप सिरे से खारिज किए हैं कि वह एमएसपी और मंडी व्यवस्था को समाप्त करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार किसानों को आश्वस्त किया है कि एमएसपी व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार किसानों को कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दे रही है, लेकिन कानून वापसी पर तैयार नहीं है।
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