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MEA: ऑपरेशन सिंदूर में चीन-पाकिस्तान के गठजोड़ का पर्दाफाश, विदेश मंत्रालय ने कहा- हमारी जानकारी सच साबित हुई
Tue, 12 May 2026 04:53 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 12 May 2026 04:53 PM IST
सार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को चीन से मदद मिली थी। उन्होंने कहा कि नई रिपोर्ट सिर्फ उसी बात को सच बताती हैं, जो भारत को पहले से ही अच्छी तरह से पता थी। वहीं, तनाव के बीच होर्मुज से 11 भारतीय जहाज सुरक्षित बाहर आ गए हैं। हालांकि, 13 जहाज अभी भी वहां मौजूद हैं।
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रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को मिले चीन के समर्थन पर एक बड़ी जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि हाल ही में आई वे सभी रिपोर्ट बिल्कुल सही हैं, जिनमें 'ऑपरेशन सिंदूर' के समय चीन द्वारा पाकिस्तान की मदद करने का दावा किया गया था। भारत सरकार को यह बात पहले से ही पता थी और नई रिपोर्ट सिर्फ उस पुरानी जानकारी को सच साबित करती हैं।
हाल ही में चीन के सरकारी मीडिया ने खुद इस बात को कबूल किया है कि मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान बीजिंग ने पाकिस्तान को तकनीकी मदद दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन की मदद वाली रिपोर्ट सिर्फ उसी बात को सच साबित करती हैं, जो बात भारत को पहले से ही बहुत अच्छी तरह से पता थी। भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई एक बेहद सटीक और सधी हुई कार्रवाई थी। इसका एकमात्र मकसद पाकिस्तान की जमीन पर चल रहे आतंकवाद के ढांचे को पूरी तरह से नष्ट करना था।
भारत ने चीन को किस तरह से कड़ा जवाब दिया है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चीन का बिना नाम लिए उस पर सीधा और करारा प्रहार किया है। रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा कि जो देश खुद को बहुत जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्हें खुद इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को बचाने की कोशिश करने वालों का समर्थन करने से उनकी अपनी इज्जत और साख पर कोई असर नहीं पड़ता है? भारत ने दुनिया को यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद को बचाने वालों का साथ देने वाले देशों की नीयत पर हमेशा बड़े सवाल उठते रहेंगे।
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तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री व्यापार के लिए एक बहुत ही संवेदनशील इलाका बना हुआ है। वहां से जुड़ी एक राहत भरी खबर देते हुए विदेश मंत्रालय ने बताया कि 11 भारतीय समुद्री जहाज इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 13 अन्य भारतीय जहाज अब भी उसी क्षेत्र यानी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और अपनी आगे की सुरक्षित यात्रा के लिए इंतजार कर रहे हैं।
ब्रिक्स देशों की बड़ी बैठक में क्या-क्या होगा?
भारत 14 और 15 मई 2026 को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की एक बहुत ही बड़ी और अहम बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर खुद करेंगे। इस बैठक में ब्रिक्स के सभी सदस्य और साझीदार देशों के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आएंगे। यह भी तय हुआ है कि ये सभी बड़े नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी खास मुलाकात करेंगे।
बैठक के पहले दिन सभी देशों के विदेश मंत्री दुनिया और अपने क्षेत्र के अहम मुद्दों पर बहुत ही विस्तार से बातचीत करेंगे। इसके बाद दूसरे दिन एक खास सत्र का आयोजन होगा। इस सत्र का विषय ब्रिक्स एट 20, बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी रखा गया है। इसके बाद दुनिया की शासन व्यवस्था में सुधार लाने पर भी चर्चा होगी। बता दें कि इससे पहले ब्रिक्स देशों की आखिरी बैठक 26 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी।
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शनों पर भारत का क्या रुख?
बांग्लादेश में इन दिनों जो भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उस पर भी भारत सरकार ने अपनी बात रखी है। भारत ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के रिश्ते बहुत ही अच्छी और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हमारी सरकार बांग्लादेश के साथ रिश्तों को बहुत अहमियत देती है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत का एक अहम दौरा किया था।
इसके अलावा, जब हाल ही में बांग्लादेश में चुनाव हुए और वहां एक नई सरकार बनी, तो उसके शपथ ग्रहण समारोह और जश्न में भारत की तरफ से एक स्पीकर ने भी खास तौर पर हिस्सा लिया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्तमान में यही सकारात्मक स्थिति बनी हुई है। भारत सरकार अपने इस अहम पड़ोसी देश के साथ लगातार अच्छे और मजबूत संबंध बनाए रखने की दिशा में बहुत तेजी से काम कर रही है।
नेपाल के साथ भारत के रिश्तों को लेकर क्या जानकारी आई सामने?
नेपाल के साथ भारत के संबंधों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने पूरी स्थिति साफ की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत और नेपाल के बीच कई तरह के गहरे और मजबूत रिश्ते हैं। ये रिश्ते केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार और संस्कृति से भी जुड़े हैं। जब नेपाल में चुनाव हुए और वहां नई सरकार का गठन हुआ, तो भारत के प्रधानमंत्री ने खुद वहां के नए नेता से फोन पर लंबी बात की थी।
विदेश मंत्रालय ने यह भी अहम जानकारी दी कि नेपाल सरकार की तरफ से भारत के विदेश मंत्री को वहां आने का आधिकारिक न्योता मिला है। विदेश मंत्री भारत से नेपाल कब जाएंगे, इसकी सटीक तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं। दोनों देशों के अधिकारी आपस में बात करके और दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार जल्द ही यात्रा की तारीखें तय कर लेंगे। भारत नेपाल के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
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हाल ही में चीन के सरकारी मीडिया ने खुद इस बात को कबूल किया है कि मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान बीजिंग ने पाकिस्तान को तकनीकी मदद दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन की मदद वाली रिपोर्ट सिर्फ उसी बात को सच साबित करती हैं, जो बात भारत को पहले से ही बहुत अच्छी तरह से पता थी। भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई एक बेहद सटीक और सधी हुई कार्रवाई थी। इसका एकमात्र मकसद पाकिस्तान की जमीन पर चल रहे आतंकवाद के ढांचे को पूरी तरह से नष्ट करना था।
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भारत ने चीन को किस तरह से कड़ा जवाब दिया है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चीन का बिना नाम लिए उस पर सीधा और करारा प्रहार किया है। रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा कि जो देश खुद को बहुत जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्हें खुद इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को बचाने की कोशिश करने वालों का समर्थन करने से उनकी अपनी इज्जत और साख पर कोई असर नहीं पड़ता है? भारत ने दुनिया को यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद को बचाने वालों का साथ देने वाले देशों की नीयत पर हमेशा बड़े सवाल उठते रहेंगे।
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तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री व्यापार के लिए एक बहुत ही संवेदनशील इलाका बना हुआ है। वहां से जुड़ी एक राहत भरी खबर देते हुए विदेश मंत्रालय ने बताया कि 11 भारतीय समुद्री जहाज इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 13 अन्य भारतीय जहाज अब भी उसी क्षेत्र यानी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और अपनी आगे की सुरक्षित यात्रा के लिए इंतजार कर रहे हैं।
ब्रिक्स देशों की बड़ी बैठक में क्या-क्या होगा?
भारत 14 और 15 मई 2026 को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की एक बहुत ही बड़ी और अहम बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर खुद करेंगे। इस बैठक में ब्रिक्स के सभी सदस्य और साझीदार देशों के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आएंगे। यह भी तय हुआ है कि ये सभी बड़े नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी खास मुलाकात करेंगे।
बैठक के पहले दिन सभी देशों के विदेश मंत्री दुनिया और अपने क्षेत्र के अहम मुद्दों पर बहुत ही विस्तार से बातचीत करेंगे। इसके बाद दूसरे दिन एक खास सत्र का आयोजन होगा। इस सत्र का विषय ब्रिक्स एट 20, बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी रखा गया है। इसके बाद दुनिया की शासन व्यवस्था में सुधार लाने पर भी चर्चा होगी। बता दें कि इससे पहले ब्रिक्स देशों की आखिरी बैठक 26 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी।
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शनों पर भारत का क्या रुख?
बांग्लादेश में इन दिनों जो भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उस पर भी भारत सरकार ने अपनी बात रखी है। भारत ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के रिश्ते बहुत ही अच्छी और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हमारी सरकार बांग्लादेश के साथ रिश्तों को बहुत अहमियत देती है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत का एक अहम दौरा किया था।
इसके अलावा, जब हाल ही में बांग्लादेश में चुनाव हुए और वहां एक नई सरकार बनी, तो उसके शपथ ग्रहण समारोह और जश्न में भारत की तरफ से एक स्पीकर ने भी खास तौर पर हिस्सा लिया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्तमान में यही सकारात्मक स्थिति बनी हुई है। भारत सरकार अपने इस अहम पड़ोसी देश के साथ लगातार अच्छे और मजबूत संबंध बनाए रखने की दिशा में बहुत तेजी से काम कर रही है।
नेपाल के साथ भारत के रिश्तों को लेकर क्या जानकारी आई सामने?
नेपाल के साथ भारत के संबंधों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने पूरी स्थिति साफ की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत और नेपाल के बीच कई तरह के गहरे और मजबूत रिश्ते हैं। ये रिश्ते केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार और संस्कृति से भी जुड़े हैं। जब नेपाल में चुनाव हुए और वहां नई सरकार का गठन हुआ, तो भारत के प्रधानमंत्री ने खुद वहां के नए नेता से फोन पर लंबी बात की थी।
विदेश मंत्रालय ने यह भी अहम जानकारी दी कि नेपाल सरकार की तरफ से भारत के विदेश मंत्री को वहां आने का आधिकारिक न्योता मिला है। विदेश मंत्री भारत से नेपाल कब जाएंगे, इसकी सटीक तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं। दोनों देशों के अधिकारी आपस में बात करके और दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार जल्द ही यात्रा की तारीखें तय कर लेंगे। भारत नेपाल के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
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