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जयशंकर बोले: भारत-फ्रांस की भागीदारी अब अधिक प्रासंगिक, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए हमारे संबंध महत्वपूर्ण

Fri, 29 Oct 2021 04:31 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 29 Oct 2021 04:31 PM IST
सार

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को भारत और फ्रांस की भागीदारी को इस क्षेत्र के भविष्य के लिए काफी अहम बताया। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक हित के लिए दोनों देशों के संबंधों की अहमियत पर भी जोर दिया।

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MEA Jaishankar says India France partnership is more relevant now as it is important for Indo Pacific region
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar

विस्तार

जयशंकर ने भारत और फ्रांस के संबंधों को वर्तमान समय में बेहत महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि 21वीं सदी में बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से समृद्ध भविष्य के लिए भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी और भी अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि भारत, फ्रांस को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थायित्व के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखता है और इस क्षेत्र में अपना एक प्रमुख भागीदार मानता है।

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विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विकास दर 9.5 फीसदी रहने की और कम से कम 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद है। सभी क्षेत्रों में व्यापक रूप से विकास हो रहा है और कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है। पिछले साल हमारे एफडीआई में 13 फीसदी का इजाफा हुआ था जबकि वैश्विक प्रवाह 42 फीसदी कम हुआ था। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ने घरेलू निवेश में वृद्धि के साथ गति बनाए रखी है।
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उन्होंने कहा कि हमारे सामूहिक भविष्य के लिए तीन क्षेत्र गंभीर महत्व वाले हैं। ये क्षेत्र हैं स्वास्थ्य, जलवायु और डिजिटल। इनमें से हर एक न केवल हमारी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बल्कि उभरती दुनिया में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व का निर्माण करने के लिए भी हमारी साझेदारी के लिए एक आशाजनक अवसर हैं। विदेश मंत्री जयशंकर की यह टिप्पणी, क्षेत्र में चीन की सैन्य ताकत को लेकर वैश्विक समुदाय के बीच बढ़ती चिंता के बीच आई है।
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भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था में करता है विश्वास : जयशंकर
हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य आक्रामकता से बढ़ी वैश्विक चिंता के बीच ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सभी की समृद्धि के लिये बातचीत के जरिये एक ऐसी नियम आधारित साझी व्यवस्था में विश्वास करता है, जो सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती हो। चौथे हिंद प्रशांत कारोबारी मंच की बैठक को बृहस्पतिवार को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि हिंद प्रशांत वैश्विकरण की वास्तविकता, बहुपक्षता के उभरने तथा लाभ के पुनर्संतुलन को प्रदर्शित करता है।

उन्होंने कहा, यह हमारी अंतर्निर्भरता और अंतर प्रवेश को रेखांकित करता है। जब हम साझे हितों और साझे प्रयासों की बात करते हैं तो यह स्वाभाविक है कि यह अन्य माध्यमों से, कारोबारी मंचों से भी हो। जयशंकर ने कहा कि भारत, हिंद प्रशांत को एक मुक्त, खुले और समावेशी क्षेत्र के रूप में देखता है जो प्रगति और समृद्धि के सामूहिक प्रयास में सभी को शामिल करता है। उन्होंने कहा कि इसमें इस भौगोलिक क्षेत्र के सभी देश शामिल हैं और वे भी हैं जिनके हित इससे जुड़े हैं। 


विदेश मंत्री ने कहा कि इसके तहत देशों को समुद्र एवं हवा में साझे क्षेत्र के उपयोग की पहुंच सुगम हो जिसमें नौवहन एवं उड़ान संबंधी स्वतंत्रता, निर्बाध वाणिज्य हो और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादों का शांतिपूर्ण ढंग से निपटारा हो सके। विदेश मंत्री के इस बयान को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दक्षिण चीन सागर में चीन का कई देशों के साथ क्षेत्रीय विवाद है।

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