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MCD Election: ये 90 सीटें तय करेंगी किसके हाथ में होगी नगर निगम की सत्ता, किसके साथ होंगे झुग्गी-झोपड़ी वाले

Wed, 16 Nov 2022 02:09 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Nov 2022 02:09 PM IST
सार

MCD Election 2022: भाजपा के एक शीर्ष नेता ने अमर उजाला को बताया कि राजधानी के मिडल क्लास वाले इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन हमेशा से मजबूत रहा है। शहरी मध्य वर्ग में पार्टी की नीतियों के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व के प्रति भी आकर्षण है। पार्टी को इसका लाभ मिलना तय है...

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MCD Election: These 90 seats will decide in whose will got the power of the Municipal Corporation
MCD Election: भाजपा वचन पत्र - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

दिल्ली नगर निगम (MCD Election 2022) में लगातार चौथी बार वापसी करने के लिए भाजपा कमर कस चुकी है। भाजपा दिल्ली नगर निगम की सौ सीटों पर अपनी जीत तय मानकर चल रही है। राजधानी की मुस्लिम बाहुल्य वाली 60 सीटों पर वह पारंपरिक रूप से कमजोर रही है। इस बार भी उसे इन सीटों पर जीत की परिस्थिति बनते दिखाई नहीं पड़ रही है। असली लड़ाई शेष 90 सीटों पर होगी, जहां भाजपा को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस से जबर्दस्त मुकाबला करना होगा। ये 90 सीटें ही तय करेंगी कि दिल्ली नगर निगम में इस बार कौन सरकार बनाएगा।

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कहां मजबूत है भाजपा

भाजपा के एक शीर्ष नेता ने अमर उजाला को बताया कि राजधानी के मिडल क्लास वाले इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन हमेशा से मजबूत रहा है। शहरी मध्य वर्ग में पार्टी की नीतियों के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व के प्रति भी आकर्षण है। पार्टी को इसका लाभ मिलना तय है। इन इलाकों में पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार, प्रीत विहार, निर्माण विहार, झिलमिल, गीता कालोनी और गांधी नगर के इलाके आते हैं। जबकि पूर्वी दिल्ली की ही सीलमपुर, जाफराबाद, चौहान बांगर, श्रीराम कॉलोनी के इलाके ऐसे हैं, जहां पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।  

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झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों से उम्मीद

राजधानी के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों वाली सीटों पर सबसे ज्यादा कांग्रेस मजबूत हुआ करती थी। शीला दीक्षित के समय में इन सीटों पर कांग्रेस का एकछत्र शासन माना जाता था, जबकि अरविंद केजरीवाल के आने के बाद इन मतदाताओं का झुकाव आम आदमी पार्टी की और हो गया। भाजपा के लिए इन सीटों पर मिला-जुला परिणाम मिलता रहा है। उसे निगम और विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर जीत मिलती रही है, तो पिछले दो लोकसभा चुनाव में इन मतदाताओं का झुकाव पूरी तरह नरेंद्र मोदी को जीत दिलाने वाली साबित हुई है।

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चूंकि, पीएम नरेंद्र मोदी ने इस बार 3024 झुग्गी-झोपड़ी वालों को मकान उपलब्ध कराया है, और इसी तरह के लगभग 18 हजार फ़्लैट लगभग बनकर तैयार हो चुके हैं, जिन्हें इन्हीं झुग्गी-झोपड़ी वाले मतदाताओं में वितरित किया जाना है। भाजपा मानकर चल रही है कि उसे इस बार निगम चुनावों में भी इन सीटों पर सफलता मिल सकती है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा की निगम में वापसी की राह आसान हो सकती है।

11 पहाड़ी बहुल सीटों पर जीत की उम्मीद

उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश से आये पहाड़ी मतदाता भाजपा के लिए दिल्ली में अच्छे मतदाता साबित हुए हैं। पिछली बार भाजपा ने सात पहाड़ी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इनमें से छह उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी। भाजपा ने इस बार नौ से अधिक पहाड़ी उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा को उम्मीद है कि इनमें से आठ से ज्यादा सीटों पर उसकी जीत हो सकती है।

पहाड़ी उम्मीदवारों में सबसे रोचक टक्कर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विधानसभा की विनोद नगर सीट पर देखने को मिल सकती है, जहां सिसोदिया को टक्कर देने वाले रवि सिंह नेगी को भाजपा ने निगम चुनाव में उतार दिया है। इससे मनीष सिसोदिया के अपने गृह क्षेत्र में आप उम्मीदवारों को जिताने की चुनौती बढ़ गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने रवि सिंह के सामने पहाड़ी चेहरे कुलदीप भंडारी को मैदान में उतार दिया है।

पहले कांग्रेस में रहे कुलदीप भंडारी को ‘पैसे वाला’ उम्मीदवार माना जाता है। वे भाजपा के समीकरण को अपने स्थानीय संपर्कों के बल पर पलटने की क्षमता रखते हैं। इसी प्रकार संत नगर की पहाड़ी बहुल सीट पर भाजपा ने रेखा रावत को उतारा है। आम आदमी पार्टी ने यहाँ से रूबी रावत को मैदान में उतारकर मामला पहाड़ी समुदाय की आपस की लड़ाई में तब्दील कर दिया है।

इन सीटों पर भाजपा को मुश्किल

राजधानी में लगभग 60 निगम की सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। ओखला, सीलमपुर, जाफराबाद, पुरानी दिल्ली, सोनिया विहार और भजनपुरा इलाके की चार सीटें, शकूरपुर बस्ती, चांदनी चौक, माटिया महल और बुराड़ी इलाके की दो सीटें भाजपा के लिए अच्छे परिणाम वाली नहीं रही हैं। पार्टी ने इस बार तीन मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसमें से कितनों को सफलता मिलेगी, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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