फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mayawati's new strategy in assembly election

मायावती ने बदली रणनीति, चुनावी रणनीति में ये हैं नए हथियार

Mon, 06 Feb 2017 05:48 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 06 Feb 2017 05:48 PM IST
विज्ञापन
Mayawati's new strategy in assembly election
- फोटो : amar ujala

फर्रुखाबाद में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने जिस तरह सपा और भाजपा पर निशाना साधा उससे उनकी बदलती चुनावी रणनीति की झलक साफ दिखी। 

विज्ञापन


अभी तक अपने वोटरों को एकजुट रखने के लिए मायावती उन्हें दूसरे दलों का डर दिखाया करती थीं लेकिन इस बार के चुनाव में वह बदले बदले अंदाज में नजर आ रही हैं। कभी वह सपा की अंदरूनी लड़ाई में मुस्लिमों को उनका वोट बैंक बंटने का डर दिखाती हैं तो कभी यह कहकर उन्हें डराती हैं कि इस झगड़े का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा जो सपा का मु‌स्लिम वोट बैंक बंटने से सत्ता में दोबारा वापसी कर सकती है। लब्बोलुआब ये ही है कि इस बार मुस्लिम सपा की बजाय बसपा को ही वोट दें। मायावती जानती हैं अगर ऐसा हुआ तो उन्हें सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता। 
विज्ञापन


इस बार के विधानसभा चुनावों में मायावती ने थोक के भाव मुस्लिमों को टिकट दिए हैं। मुस्लिमों को लेकर मायावती की मेहरबानी का आलम ये है कि अभी तक घोषित सभी उम्‍मीदवारों में से 93 यानि 23 फीसदी टिकट मुस्लिमों के हिस्से में आए हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

मुस्लिमों के टिकट पर ही सारा फोकस

Mayawati's new strategy in assembly election

टिकट ही नहीं चुनावी रैलियों में भी मायावती का पूरा फोकस मुसलमानों पर ही है। टिकटों की घोषणा के बाद से मायावती का शायद ही कोई भाषण रहता हो जिसमें वह समाजवादी पार्टी के झगड़े के बारे में लोगों को याद दिलाना न भूलती हों।

इस झगड़े में वह कभी अखिलेश पर निशाना साधती हैं तो कभी मुलायम पर, लेकिन शिवपाल के प्रति वह जानबूझकर सहानभूति दिखाई देती हैं, जिसमें वह यह दिखाने का प्रयास करती हैं कि शिवपाल के साथ गलत हुआ है और वह अखिलेश के उम्‍मीदवारों को वोट नहीं करेंगे।

इसीलिए मुसलमानों का सपा को वोट देना बेकार है। इसी तरह वह भाजपा को लेकर भी लगातार मुसलमानों को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि सपा के झगड़े में अगर मुस्लिम वोट बंटे तो इसका सीधा फायदा भाजपा को ही मिलेगा।

फर्रुखाबाद की रैली में उन्होंने पूरा जोर यह समझाने पर लगाया कि सपा में ऊपरी स्तर पर बेशक सबकुछ सुलझता दिख रहा हो लेकिन अभी अंदरूनी लड़ाई जारी है। मायावती ने यह भी बताया कि शिवपाल के समर्थक अखिलेश को वोट नहीं देंगे और पार्टी को भीतरघात का सामना करना पड़ेगा।

2007 का करिश्मा दोहराना चाहती हैं मायावती

Mayawati's new strategy in assembly election

ऐसे में अंदरूनी लड़ाई के कारण सपा किसी हाल में सत्ता में वापसी नहीं कर सकती। इसलिए मुसलमानों को अपना वोट सपा को देकर बेकार नहीं करना चाहिए। यह पहला मौका है जब मायावती अपने दलित वोटबैंक को एकजुट करने के साथ साथ किसी दूसरे तबके के वोट खींचने में इतने जोर लगा रही हैं।

उसकी बड़ी वजह ये भी है कि साल 2007 के चुनावों में जब सभी कयासों को दरकिनार करते हुए मायावती पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, तब दलितों के साथ मुस्लिमों ने भी काफी तादाद में उन्हें वोट किए थे।

हालांकि उन चुनावों में एक फैक्टर ब्राह्मणों का भी ‌था। उनके इसी सियासी गणित को नई सोशल इंजीनियरिंग की संज्ञा दी गई थी। एक बार फिर मायावती अपने उसी आजमाए हुए फार्मूले को सफलता से दोहराना चाहती हैं इसके लिए उन्हें वक्त भी अपने माकूल लग रहा है और हालात भी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed