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Matua Community: मतुआ नेता बोले, जल्द सीएए लागू नहीं हुआ तो समुदाय भाजपा पर भरोसा करना छोड़ देगा
Fri, 04 Nov 2022 05:54 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 04 Nov 2022 05:54 PM IST
सार
धार्मिक उत्पीड़न के कारण राज्य की अनुसूचित जाति की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मतुआ समुदाय के लोग 1950 के दशक से बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल की ओर पलायन करते रहे हैं।
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मतुआ समुदाय के व्यक्ति के यहां भोजन करते अमित शाह (FILE PHOTO)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
केंद्र द्वारा पड़ोसी देश से आए और गुजरात में बसने वाले लोगों के एक वर्ग को नागरिकता देने का फैसला करने के कुछ दिनों बाद बंगाल में मतुआ समुदाय ने भाजपा पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है। मतुआ समुदाय के सदस्यों ने कहा कि अगर उन्हें इसी तरह का लाभ नहीं दिया गया तो वे भाजपा पर भरोसा करना बंद कर देंगे। समुदाय के नेताओं ने कहा कि अगर नागरिकता की उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरेंगे। अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के एक वरिष्ठ नेता मुकुट मोनी अधिकारी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमें नागरिकता भी दी जाएगी, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मतुआ समुदाय के लोग विरोध में सड़कों पर उतरेंगे।
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धार्मिक उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश छोड़ा
धार्मिक उत्पीड़न के कारण राज्य की अनुसूचित जाति की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मतुआ समुदाय के लोग 1950 के दशक से बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल की ओर पलायन कर रहे हैं। मार्च 1971 तक प्रवास करने वाले सभी लोग 1955 के नागरिकता अधिनियम के अनुसार भारत के कानूनी नागरिक हैं। 1971 के बाद आने वालों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सात साल के प्रवास के बाद नागरिकता के लिए आवेदन करना होता है। केंद्र ने हाल ही में उन हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने का फैसला किया, जो अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान छोड़कर गुजरात के दो जिलों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बस गए थे।
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सीएए के तहत नागरिकता देने का किया था वादा
अधिकारी ने कहा, हालांकि मतुआ लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत नागरिकता देने का वादा किया गया है। हम जानते हैं कि गुजरात में 1955 के कानून के तहत नागरिकता दी जा रही है। मतुआ नेताओं के अनुसार, समुदाय के सदस्य कानून के भविष्य को लेकर आशंकित हैं, जो लगभग तीन वर्षों से लागू होना लंबित है। मतुआ बहुल रानाघाट दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक अधिकारी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि केंद्र की भाजपा सरकार अपना वादा निभाएगी। अधिकारी ने कहा कि मतुआ चाहते हैं कि सीएए 2019 के तहत नागरिकता दी जाए, जिनका धार्मिक उत्पीड़न होता है। सीएए 2019, एक बार लागू होने के बाद मतुआ समुदाय को इसकी उचित मान्यता देगा।
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हालांकि, मतुआ महासंघ के एक अन्य वरिष्ठ नेता असीम सरकार ने कहा कि अगर सीएए 2024 से पहले लागू नहीं किया गया तो समुदाय के सदस्यों को अब भाजपा में विश्वास नहीं होगा, जैसा कि उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान किया था। हमें लगता है कि भाजपा नेतृत्व 2019 का अपना चुनावी वादा निभाएगा। लेकिन अगर इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं किया गया, तो मतुआ लोग भाजपा पर भरोसा करना बंद कर देंगे।