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मथुरा हिंसा: अफसरों ने 6 बार भेजी थी रिपोर्ट, टेंशन में आकर मांगने लगे थे ट्रांसफर

Mon, 06 Jun 2016 10:32 AM IST
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा Updated Mon, 06 Jun 2016 10:32 AM IST
सार

  • लखनऊ में होने वाली हर मीटिंग में अफसरों ने रखा मुद्दा
  • कहा था, या तो फोर्स दे दीजिए या फिर हमे वहां से हटा दो
  • सियासी प्रेशर में कुछ नहीं कर पा रही थी सरकारी मशीनरी

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Mathura Clash: Mathura Administration kept asking for force but Lucknow avoided
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा के जवाहरबाग की टेंशन में अफसर ट्रांसफर मांगने लगे थे। सियासी प्रेशर ने अफसरों को इस तरह जकड़ लिया था कि वह मथुरा से हटने में ही अपनी भलाई समझने लगे थे। लखनऊ में होने वाली मासिक बैठक में अधिकारियों ने यहां तक कह दिया था कि या तो कब्जा हटवाने को फोर्स दीजिए या फिर उनका तबादला कर दीजिए।

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जवाहरबाग पर 14 मार्च 2014 को रामवृक्ष यादव ने सत्याग्रह के नाम पर कब्जा कर लिया था। दो दिन की अनुमति प्रशासन से मिली थी। वह अनुमति भी शासन से आए फोन के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने दी। समय सीमा खत्म होने के साथ ही एसपी सिटी सीओ पहुंचे और बाग खाली करने को कहा गया। लेकिन बाग खाली नहीं किया गया। 
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खैर महीने दो महीने तो यूं ही बीत गए लेकिन फिर तत्कालीन डीएम ने शासन को रिपोर्ट भेजी। उसके बाद दूसरे जिलाधिकारी भी रिपोर्ट भेजते रहे। छह रिपोर्ट शासन में गईं। कहा गया कि यह लोग जवाहरबाग पर कब्जा करना चाहते हैं। क्योंकि संख्या बल ज्यादा है लिहाजा फोर्स उपलब्ध कराई जाए।
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शासन में जो हर माह मीटिंग होती है उसमें भी जवाहर बाग का मुद्दा अफसरों ने उठाया। एक वरिष्ठ अधिकारी अनौपचारिक बताचीत में बताया कि प्रमुख सचिव गृह और मुख्य सचिव की मीटिंग में अफसरों ने कह दिया था कि कार्रवाई की इजाजत नहीं है तो उन्हें हटा दिया जाए। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी ने तो यहां तक कह दिया था कि उन्हें जवाहरबाग खाली कराने के लिए पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिल रहा है। इससे हालात बिगड़ सकते हैं लिहाजा उन्हें या तो कार्रवाई का अधिकार दें या फिर हटा दें।

शासन को भेजी गई रिपोर्ट के बिंदु

Mathura Clash: Mathura Administration kept asking for force but Lucknow avoided
  • जवाहरबाग में सुबह शाम होने वाली गतिविधियां भी ठीक नहीं हैं।
  • यहां मौजूद भीड़ के इरादे ठीक नहीं है। ये माहौल खराब कर सकते हैं।
  • रामवृक्ष लोगों को भड़का रहा है। उन्हें सिस्टम के खिलाफ कर रहा है।
  • बाकायदा कैंप लगाए जा रहे हैं जहां लोगों का ब्रेनवॉश किया जाता है।
  • कई राज्यों के युवाओं को इकट्ठा किया जा रहा है, असलाह से लैस है।
  • कुछ लोग यहां रसद की सप्लाई कर रहे हैं, लग्जरी गाड़ियां भी इनके पास।  

कमांडो कार्रवाई की सिफारिश हुई थी

अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट और वीडियो कांफ्रेसिंग में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से कहा था कि जवाहरबाग में जो लोग रह रहे हैं वह काफी खतरनाक हैं। इनके पास असलहा भी हैं। लिहाजा जवाहरबाग में हैलीकाप्टर से कमांडों उतारे जाएं। बगैर किसी जनहानि के वह कार्रवाई कर सकते हैं। बताया जाता है कि इस पर सहमति बन भी गई थी मगर फिर टाल दिया गया। अगर कमांडो कार्रवाई को अनुमति दे दी जाती है तो बगैर किसी नुकसान के बाग को खाली कराया जा सकता था।

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